World Cup 2025 – विश्व कप 2025 में भारतीय महिला टीम के लिए सबसे प्रेरणादायक कहानी सिर्फ फाइनल जीत की नहीं थी, बल्कि उस खिलाड़ी की भी थी जिसने मैदान पर न होते हुए भी टीम को मानसिक ताकत दी — प्रतिका रावल। मनोविज्ञान की छात्रा प्रतिका, चोट की वजह से नॉकआउट मुकाबले और फाइनल नहीं खेल पाईं, लेकिन उन्हें दिल से यकीन था कि उनकी जगह खेलने वाली शेफाली वर्मा कुछ खास करने वाली हैं।
शेफाली के प्रदर्शन की भविष्यवाणी सच निकली
प्रतिका ने एक इंटरव्यू में बताया, “फाइनल से पहले शेफाली मेरे पास आई और बोली — ‘मुझे अफसोस है कि तुम नहीं खेल पाई’। मैंने उससे कहा, ‘कोई बात नहीं, मुझे लगता है तुम आज कुछ बड़ा करोगी।’ और सच में, उसने वही किया।”
शेफाली ने फाइनल में दमदार बल्लेबाजी करते हुए भारत को पहली बार आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 जिताने में अहम भूमिका निभाई।
| खिलाड़ी | भूमिका | प्रदर्शन | खास योगदान |
|---|---|---|---|
| प्रतिका रावल | बल्लेबाज (घायल) | 308 रन (टूर्नामेंट में) | टीम को मानसिक समर्थन |
| शेफाली वर्मा | ओपनर | फाइनल में मैच-विनिंग पारी | भारत को चैंपियन बनाया |
मनोविज्ञान की छात्रा और ‘मानवीय भावनाओं’ की समझ
प्रतिका रावल कहती हैं कि मनोविज्ञान पढ़ने से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि मुश्किल वक्त में खुद को कैसे संभालना है। “मैं यह नहीं कहूंगी कि मैं अभी मनोवैज्ञानिक हूं क्योंकि डिग्री पूरी नहीं हुई है, लेकिन इस विषय ने मुझे इंसानी भावनाओं को समझना सिखाया — जिनमें मेरी अपनी भावनाएं भी शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि चोट लगने के बाद सबसे पहले उन्होंने “स्थिति को स्वीकारना” सीखा। “आप जो हो चुका है, उसे बदल नहीं सकते। मैंने बस वही किया जो मेरे नियंत्रण में था — रिकवरी, नींद, पोषण और टीम का सपोर्ट।”
चोट, संघर्ष और परिवार का सपोर्ट सिस्टम
बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी लीग मैच में टखने और घुटने की चोट ने उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था। लेकिन प्रतिका कहती हैं कि उनका “सपोर्ट सिस्टम” इतना मजबूत था कि वह कभी अकेला महसूस नहीं करती थीं।
“मेरे पापा हमेशा साथ थे, कोच मेरा हाल पूछते रहते थे, मां और भाई रोज़ फोन करते थे। मैं निराश थी, पर टूटी नहीं।”
व्हीलचेयर पर जश्न और भावनाओं से भरा पल
फाइनल के बाद जब भारतीय टीम ने मैदान पर उन्हें व्हीलचेयर पर बिठाकर ट्रॉफी जश्न में शामिल किया, तो वह पल प्रतिका के लिए किसी सपने जैसा था। “मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि हमने वाकई विश्व कप जीत लिया है। शायद इस बात को पूरी तरह स्वीकार करने में थोड़ा वक्त लगेगा।”
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और “सबसे महंगी भेल” वाला पल
जीत के बाद जब टीम इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली, तो उस मुलाकात में एक मजेदार पल भी आया। प्रतिका ने मुस्कुराते हुए बताया, “उन्होंने मुझे भेल खाने की पेशकश की क्योंकि मैं व्हीलचेयर पर थी। मैंने सोचा, ‘यह अब तक की सबसे महंगी भेल है!’”
यह लम्हा दर्शाता है कि जीत की खुशी सिर्फ ट्रॉफी से नहीं, बल्कि टीम और नेताओं के उस स्नेह से भी जुड़ी है जो हर खिलाड़ी के दिल को छू जाता है।
एक खिलाड़ी की मानसिक ताकत का सबक
प्रतिका रावल की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि एक मानसिक रूप से मजबूत इंसान की कहानी है — जिसने चोट को स्वीकार किया, टीम को प्रेरित किया, और अपने साथी खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक सहारा बनीं।
उनकी यह यात्रा साबित करती है कि मैदान पर खेलना ही सब कुछ नहीं होता; कभी-कभी सबसे बड़ी जीत मनोबल की होती है।



















