Ashes : एशेज डे-नाइट टेस्ट इंग्लैंड बैजबॉल पर कायम – ऑस्ट्रेलिया अपनी शैली से नहीं हटेगा

Atul Kumar
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Ashes – गाबा की हवा में हल्की-सी नमी और रात की गुलाबी गेंद की चमक—इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा डे-नाइट एशेज टेस्ट ठीक इन्हीं विरोधाभासों के बीच शुरू होने जा रहा है।
पर्थ में दो दिन के अंदर मिली धमाकेदार जीत ने ऑस्ट्रेलिया का आत्मविश्वास ऊपर भेज दिया है, लेकिन एशेज की कहानी कभी भी सिर्फ फॉर्म से नहीं लिखी जाती—यह परंपरा, दबाव, और मनोवैज्ञानिक लड़ाइयों का खेल है।

और गाबा?
यह वह मैदान है जहाँ इंग्लैंड आखिरी बार 1986 में एशेज टेस्ट जीता था।
38 साल… एक पूरा क्रिकेट युग निकल चुका है।

ऑस्ट्रेलिया की नज़र लगातार दूसरी जीत पर—लेकिन गाबा की एक याद अभी भी चुभती है

डे-नाइट टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का रिकॉर्ड शानदार रहा है—शायद दुनिया में सबसे अच्छा।
लेकिन स्मिथ की टीम एक बात नहीं भूली है—
पिछले साल इसी गाबा पर वेस्टइंडीज ने उसे 8 रन से मात दी थी।
यह वही मैच था जिसने साबित किया कि गुलाबी गेंद और रात की रोशनी में यह मैदान उतना आसान नहीं जितना आंकड़े बताते हैं।

पर्थ में जो आसान जीत मिली, वह एड्रेनालाईन बढ़ाने के लिए काफी है, लेकिन गाबा नई परीक्षा है—खासकर तब जब कप्तान पैट कमिंस बाहर हैं और स्टीव स्मिथ नेतृत्व संभाल रहे हैं।

स्मिथ का नया हथियार—आँखों के नीचे काली पट्टी

यह तो क्रिकेट में कम ही देखा गया है कि कोई बल्लेबाज फुटबॉलर स्टाइल की काली पट्टी लगाकर उतरे।
लेकिन स्मिथ ने यह बदलाव सिर्फ शो-ऑफ के लिए नहीं किया—
उन्होंने बाकायदा शिवनारायण चंद्रपाल से सलाह ली, जो वर्षों तक इसी स्टाइल में बल्लेबाजी करते आए हैं।

क्यों ज़रूरत पड़ी?

  • रात की दूधिया रोशनी (floodlights)
  • गुलाबी गेंद का late swing
  • field depth perception
  • तेज रोशनी में गेंद ढूँढने की दिक्कतें

स्मिथ जानते हैं कि इंग्लैंड की गेंदबाजी—खासकर पिंक गेंद के साथ एंडरसन/वुडी/रॉबिन्सन—अलग ही चुनौती पेश करती है।
काली पट्टी glare कम करती है, contrast बढ़ाती है, और आँखों को गेंद की लाइन जल्दी पकड़ने में मदद देती है।

यह तकनीकी बदलाव छोटा लगता है, लेकिन रात के सत्र में यह मैच का संतुलन बदल सकता है।

प्लेइंग XI—उस्मान ख्वाजा नहीं खेलेंगे, ट्रेविस हेड फिर ओपन कर सकते हैं

ऑस्ट्रेलिया को एक अनिवार्य बदलाव करना पड़ेगा—
उस्मान ख्वाजा पीठ की समस्या के कारण बाहर।

अब दो बड़े प्रश्न:

  1. ओपनिंग कौन करेगा?
    सबसे बड़ा संकेत—ट्रेविस हेड।
    हेड पहले टेस्ट के ‘X-factor’ खिलाड़ी थे और स्मिथ चाहेंगे कि उनका फॉर्म ऊपर ही रखा जाए।
  2. मध्यक्रम में कौन आएगा?
    जोश इंग्लिश की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।

लेकिन स्मिथ ने कहा है कि पिच देखने के बाद ही प्लेइंग XI फाइनल होगी।
गाबा का डे-नाइट मैच आम तौर पर शुरू में तेज गेंदबाजों को मदद देता है, और रात में यह लाभ दुगुना हो सकता है।

इंग्लैंड—आक्रामक रणनीति पर कायम, नतीजा चाहे जो हो

बेन स्टोक्स वही कर रहे हैं जो उन्होंने पिछले दो साल से किया है—
बिल्कुल भी पीछे हटने का नाम नहीं।

पहला टेस्ट पर्थ में दो दिनों में खत्म हो गया।
इंग्लैंड हार गया—but स्टोक्स की बैजबॉल मानसिकता एक इंच भी नहीं हिली।

स्टोक्स ने कहा:

“परिस्थितियों के अनुसार ढलना ही टेस्ट क्रिकेट में सफलता की कुंजी है…
और यह टीम ऐसा करने में सक्षम है।”

यही इंग्लैंड की खूबी भी है और कमज़ोरी भी।
कभी यह रणनीति मैच को अपनी तरफ मोड़ देती है, और कभी उतनी ही तेजी से बाहर भी कर देती है।

ऑस्ट्रेलिया: “हम अपनी शैली नहीं बदलेंगे”

स्टीव स्मिथ ने साफ कहा—

“हम ऑस्ट्रेलियाई ढंग से ही खेलेंगे।”

यानी गति, bounce, और tactical patience—ऑस्ट्रेलिया अपनी strengths से हटने वाला नहीं।

पहला टेस्ट—दो दिन में खत्म, इंग्लैंड हैरान, ऑस्ट्रेलिया सहज

पर्थ टेस्ट इंग्लैंड को याद रहेगा—
बेन्स स्टोक्स ने एग्रेसन नहीं छोड़ा, लेकिन पिच और फायर-पावर वाले ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें छह सत्र में खत्म कर दिया।

अब गाबा की परिस्थितियाँ अलग होंगी:

  • दोपहर—pace and bounce
  • evening—glaring lights
  • night—pink ball spell
  • day 3–4—slower bounce, reverse swing

कहना गलत नहीं होगा कि मैच दो सत्रों में तय हो सकता है—रात का पहला सत्र और तीसरे दिन सुबह का spell।

क्या गाबा का इतिहास इंग्लैंड को डरा रहा है?

संक्षिप्त में कहें—हाँ।

गाबा में इंग्लैंड का एशेज रिकॉर्ड

दशकपरिणाम
1986 के बादकोई जीत नहीं
पिछली ऑस्ट्रेलिया श्रृंखलाकई बार फॉलो-ऑन जैसी स्थिति
पिंक बॉल टेस्टसीमित अनुभव, मिश्रित नतीजे
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