ODI : विराट कोहली की ‘चार पारियों’ की स्ट्रिक ने ODI इतिहास में नया मानक गढ़ा

Atul Kumar
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ODI – विशाखापत्तनम की दोपहर में विराट कोहली का बल्ला फिर उसी स्टेबल, भरोसेमंद और अविश्वसनीय रूप में दिखा, जिसने उन्हें “रन मशीन” की उपाधि दिलाई है।
65* की नाबाद पारी जितनी सहज थी, उतनी ही खतरनाक भी—क्योंकि इस एक अर्धशतक ने उनके नाम ऐसा वनडे वर्ल्ड रिकॉर्ड और मजबूत कर दिया है, जिसके पास दुनिया का कोई बल्लेबाज़ पास तक नहीं फटक पा रहा।

यह वह रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ने में बाकी बल्लेबाजों को सालों नहीं, शायद एक दशक लग जाए—और शायद तब भी न टूटे।

कोहली का अटूट रिकॉर्ड—लगातार चार पारियों में 50+ स्कोर… 9 बार!

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम वनडे: 74 रन*
साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला वनडे: 135 रन
दूसरा वनडे: 102 रन
तीसरा वनडे (विशाखापट्टनम): 65 रन*

यानी लगातार चार पारियों में 50+ स्कोर—और यह विराट कोहली ने अपने ODI करियर में 9वीं बार किया।

और मुश्किल यह है कि बाकी दुनिया कितनी पीछे है

खिलाड़ीबारस्थिति
विराट कोहली9सक्रिय, अद्वितीय
कुमार संगकारा4रिटायर
केन विलियमसन4सक्रिय, पर कम ODI खेलते
बाकी सभी बल्लेबाज़4 से कमकोहली के आसपास भी नहीं

यानी कोहली ने जितनी बार यह कारनामा अकेले किया, बाकी दो दिग्गज मिलकर भी उससे पीछे हैं।

और ODI क्रिकेट अब पहले की तरह ज्यादा खेला भी नहीं जाता—इसलिए इस रिकॉर्ड के कोहली के आसपास कोई आने ही नहीं वाला। यह रिकॉर्ड लगभग “अनब्रेकेबल जोन” में पहुंच चुका है।

कोहली की कंसिस्टेंसी—दबाव में सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़

इस सीरीज में कोहली ने दिखाया कि उम्र 35 हो सकती है, लेकिन क्लास 25 का है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ:

  • शतक (135)
  • शतक (102)
  • अर्धशतक (65*)

और इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 74—
कोई ब्रेक नहीं, कोई कमी नहीं, कोई गलती नहीं—सिर्फ एक पावरफुल रन मशीन की सहज धारा।

विशाखापत्तनम—कोहली का निजी किला

अविश्वसनीय लेकिन सच:

विराट कोहली का वाइजैग में बल्लेबाज़ी औसत 100+ है

यानी इस मैदान पर उनका औसत दुनिया के किसी भी अन्य बल्लेबाज़ से बेहतर है।
यह केवल कंडीशंस नहीं—यह मानसिक सहजता और उस पिच को पढ़ने की महारत का परिणाम है।

वाइजैग के गेंदबाज़ों के लिए यह “कोहली का ऑफिस” है—आते हैं, रन बनाते हैं, वापस चले जाते हैं।

कोहली का सीरीज टेम्पो—गति बदलने की कला

तीनों मैचों में एक पैटर्न दिखा:

  • शुरुआत में कंट्रोल
  • बीच में स्थिरता
  • अंत में गियर-शिफ्ट

यह ODI बैटिंग का परफेक्ट ब्लूप्रिंट है—रिस्क कम, असर ज्यादा।

जब टीम 1-1 से बराबर थी, तभी विराट ने तीसरे वनडे में 45 गेंदों में 65* मारकर चेज़ को एकतरफा बना दिया।
वह सिर्फ रन नहीं बना रहे—वह भारत की चेज़ टेम्पलेट तैयार कर रहे हैं।

यह रिकॉर्ड टूटना इतना मुश्किल क्यों होगा?

  1. ODI क्रिकेट अब हर टीम साल में 8–12 मैच ही खेल रही है
  2. लगातार 4 पारियों में 50+ बनाना पहले ही बड़ा काम
  3. इसे करियर में 9 बार दोहराना लगभग नामुमकिन
  4. विलियमसन ही अकेले सक्रिय खिलाड़ी हैं जो सूची में हैं—लेकिन वे इतनी ODI क्रिकेट खेलते ही नहीं
  5. कोहली अभी भी सक्रिय हैं—यह संख्या 10, 11, 12 तक जा सकती है

इसलिए यह रिकॉर्ड सिर्फ मजबूत नहीं—“सदी का शायद अविजित रिकॉर्ड” बन चुका है।

विराट की चार पारियों की श्रंखला—एक नजर में

मैचविपक्षरन
भारत vs ऑस्ट्रेलियाअंतिम ODI74 रन*
vs SAपहला ODI135
vs SAदूसरा ODI102
vs SAतीसरा ODI65*

हर पारी एक अलग गियर, एक अलग भूमिका—और एक ही नतीजा: भारत को फायदा।

कोहली की फॉर्म—भारत के लिए 2025 फॉर्मेट चक्र की सबसे बड़ी ताकत

टेस्ट में मैच फिनिशर
T20I में स्ट्राइक-बिल्डर
ODI में एंकर + अटैकर

कोहली अभी अपने करियर के “लेट प्राइम” में हैं—दिमाग और तकनीक दोनों परफेक्ट तालमेल में।
और भारत के लिए यह आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में निर्णायक साबित होगा।

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