World Cup – कटक में पहली टी20I से ठीक एक दिन पहले सूर्यकुमार यादव की आवाज़ में एक अलग तरह का भरोसा था—कुछ वैसा, जैसा किसी कप्तान को तब मिलता है जब टीम के संतुलन की सबसे अहम कड़ी फिर से उसके पास लौट आती है।
और वह कड़ी है—हार्दिक पांड्या।
एशिया कप फाइनल में हार्दिक की अनुपस्थिति ने भारत की प्लानिंग को हिला दिया था—नयी गेंद से गेंदबाज़ी, फिनिशिंग का रोल, बीच के ओवरों में स्थिरता—सबका असर दिखा। लेकिन अब, SMAT में धमाकेदार वापसी के बाद, हार्दिक फिर उसी मोड में दिख रहे हैं जिसने भारत को पिछले दो साल में टी20 में एक अलग पहचान दी थी।
हार्दिक की वापसी—टीम इंडिया की धड़कन वापस
सूर्या ने सीधे कहा:
“हार्दिक की मौजूदगी टीम को मजबूती और विकल्प देती है। बड़े मैचों में वह और भी शानदार रहते हैं। उनका अनुभव बहुत मायने रखेगा।”
सच भी है—भारत की सफल टी20 टेम्पलेट का असली राज़ यही है कि हार्दिक बैटिंग में नंबर 5–6 की जिम्मेदारी उठाते हुए, गेंद से पावरप्ले और मिडिल में ओवर डाल सकते हैं।
उनकी मौजूदगी टीम को:
- 3–4 स्पिनर खिलाने की आज़ादी देती है
- बैटिंग में गहराई (टिलक → सैमसन → दुबे → हार्दिक → फिनिशर)
- बॉलिंग में फ्लेक्सिबिलिटी
- और ड्रेसिंग रूम में वह फ़ैक्टर—“हम कभी भी मैच पलट सकते हैं”
यह वही संतुलन है जिसकी वजह से भारत ने एशिया कप में सफलता पाई थी।
“नई गेंद से गेंदबाज़ी”—AI नहीं, असली गेम चेंजर
सूर्या ने खास तौर पर नयी गेंद का जिक्र किया, क्योंकि हार्दिक के इस कौशल ने पिछले दो टूर्नामेंटों में भारत को अप्रत्याशित फायदा दिया था।
उन्होंने कहा:
“एशिया कप में जब वह नई गेंद से गेंदबाज़ी कर रहे थे, तो हमारे लिए कई संयोजन खुल गए थे।”
इसका मतलब है:
- भारत दो फ्रंटलाइन पेसर खिलाकर भी संतुलित दिख सकता है।
- स्पिन-फ्रेंडली परिस्थितियों में भारत तीन या चार स्पिनर तक उतार सकता है।
- दुबे और हार्दिक मिलकर टीम को दो ऑलराउंडर देते हैं—जो टी20 में किसी भी टीम की सबसे बड़ी ताक़त होती है।
हार्दिक की फिटनेस—अकेले प्रैक्टिस, पूरी तैयारी
हार्दिक टीम से एक दिन पहले ही कटक आ गए थे और अकेले अभ्यास करते दिखे।
सोमवार को वे ऑप्शनल सेशन में शामिल नहीं हुए, लेकिन सूर्या ने पुष्टि की—
“फिलहाल दोनों (हार्दिक और गिल) स्वस्थ और फिट दिख रहे हैं।”
यह ऐलान लगभग उतना ही राहत भरा था जितना टीम इंडिया के फैन चाहते थे।
टीम इंडिया की टी20 WC तैयारी—बहुत पहले शुरू हो चुकी थी
यह बयान थोड़ा चौंकाने वाला था, लेकिन दिलचस्प भी:
“2026 टी20 विश्व कप की तैयारी 2024 विश्व कप जीतने के बाद ही शुरू हो गई थी।”
अर्थात भारत पिछले डेढ़ साल से एक ही दिशा में काम कर रहा है:
- स्थिर टीम
- स्थिर कॉम्बिनेशन
- कम बदलाव
- और हर सीरीज में रोल-आधारित प्रयोग
सूर्या ने खुलकर कहा:
“हमने पिछली 5-6 श्रृंखलाओं में एक जैसे संयोजन के साथ खेलने की कोशिश की है… सब कुछ ठीक चल रहा है।”
संजू सैमसन, जितेश, और फ्लेक्सिबल बैटिंग ऑर्डर
यह सवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे हॉट टॉपिक था—संजू कहाँ खेलेंगे?
सूर्या ने वही बात दोहराई जो कटक मैच की तैयारी में बार-बार सामने आई थी:
- गिल और अभिषेक = फिक्स ओपनर्स
- सूर्या = नंबर 3
- बाकी सब = फ़्लोटिंग रोल
उन्होंने कहा:
“संजू ने टॉप पर खेला है, लेकिन मौजूदा स्थिति में ओपनरों के अलावा सभी को किसी भी नंबर पर उतरने के लिए तैयार रहना होगा।”
यानी:
- नंबर 4 → मैच की स्थिति
- नंबर 5 → सैमसन (लेकिन उछल सकता है)
- नंबर 6 → दुबे
- नंबर 7 → हार्दिक
यह टी20 में आदर्श मॉडल है—नंबर नहीं, भूमिका मायने रखती है।
रिंकू सिंह vs शिवम दुबे—पहला साफ जवाब
जब रिंकू की वापसी की संभावना पर सवाल हुआ, सूर्या ने स्पष्ट कहा:
“दुबे एक ऑलराउंडर हैं… आप ऑलराउंडर की तुलना बल्लेबाज़ से नहीं कर सकते।”
इसका मतलब है:
- रिंकू = फिनिशर बैटर
- दुबे = बैटिंग + बॉलिंग + पावर गेम
- और टी20 में “ऑलराउंडर” हमेशा रणनीतिक रूप से ऊपर होता है
रिंकू का रास्ता बंद नहीं, लेकिन दुबे की तेजी से उभरती अहमियत अब टीम के नए ढांचे की पहचान है।
















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