U19 – घटना जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही परेशान करने वाली भी—पुडुचेरी के क्रिकेट सर्किट के भीतर simmer करता हुआ तनाव आखिरकार ऐसे फूटा कि एक अंडर-19 टीम के कोच को रातोंरात अस्पताल के बिस्तर पर पहुँचना पड़ा।
खेल में चयन को लेकर नाराजगी पुरानी कहानी है, लेकिन नाराजगी जब हिंसा में बदल जाए, तो तस्वीर खेल की नहीं, सिस्टम की खामियों की तरफ़ इशारा करती है।
पुडुचेरी क्रिकेट में हिंसा—एक कोच, तीन खिलाड़ी और एक फटी हुई व्यवस्था
मंगलवार शाम, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ पुडुचेरी (CAP) की ट्रेनिंग सुविधा में हर रोज की तरह प्रैक्टिस चल रही थी। बाहर धूप ढल रही थी, अंदर नेट्स में बल्ले-गेंद की आवाज़ गूँज रही थी। लेकिन अचानक माहौल बदल गया। आरोप के मुताबिक, टीम में चयन न होने से नाराज़ तीन खिलाड़ियों—सीनियर क्रिकेटर कार्तिकेयन जयसुंदरम, फर्स्ट-क्लास खिलाड़ी ए अरविंदराज और एस संतोष कुमारन—ने अंडर-19 हेड कोच एस वेंकटरमन पर हमला कर दिया।
अटैक इतना गंभीर था कि कोच के माथे पर 20 टांके लगाने पड़े और उनके शोल्डर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फिलहाल फरार हैं।
और ये सब किसी पार्किंग लॉट में नहीं, बल्कि एक क्रिकेट एसोसिएशन की आधिकारिक ट्रेनिंग फैसिलिटी के भीतर हुआ। यही बात इस घटना को और भी असहज बना देती है—खिलाड़ी अपने ही कोच पर टूट पड़े, वो भी चयन को लेकर व्यक्तिगत नाराज़गी में।
पुलिस की पुष्टि—“हमले की गंभीरता साफ दिख रही है”
सब-इंस्पेक्टर एस राजेश ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए बयान में कहा कि हमले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
“वेंकटरमन के माथे पर 20 टांके लगे हैं, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर है। आरोपी खिलाड़ियों को ट्रैक किया जा रहा है, गिरफ्तारी जल्द होगी।”
वे एक लाइनें आज भी तनाव की तीव्रता बयान करती हैं—एक कोच, जिसने यूथ क्रिकेटरों को आगे बढ़ाने के लिए अपना करियर समर्पित किया, उन्हीं खिलाड़ियों की हिंसा का शिकार बन गया।
कोच की शिकायत—हमला प्लान्ड था, सिर्फ ग़ुस्सा नहीं
वेंकटरमन ने अपनी पुलिस शिकायत में सिर्फ तीन खिलाड़ियों का नाम नहीं लिया, बल्कि भरथिदासन पुडुचेरी क्रिकेटर्स फोरम के सेक्रेटरी जी चंद्रन पर भी उकसाने का आरोप लगाया।
यह आरोप कहानी को सिर्फ “खेलाड़ी vs कोच” तक सीमित नहीं रखता। यहां एक बड़ा मुद्दा उभर रहा है—पुडुचेरी क्रिकेट के भीतर गुटबाजी, असंतोष और बाहर के खिलाड़ियों को मिल रहे बढ़े हुए अवसर।
असली तनाव कहाँ से शुरू हुआ?
चयन विवाद नई बात नहीं है, लेकिन पुडुचेरी में यह मामला कई सालों से simmer कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है:
2021 के बाद से रणजी टीम में पुडुचेरी के सिर्फ 5 लोकल खिलाड़ी खेले हैं।
बाकी टीम बाहर से बुलाए गए खिलाड़ियों पर खड़ी रही—कुछ इस व्यवस्था को प्रोफेशनलाइजेशन मानते हैं, तो कई इसे स्थानीय टैलेंट का दमन बताते हैं।
BCCI तक कई शिकायतें पहुँची हैं कि घरेलू क्रिकेटर मौके के लिए तरस रहे हैं। और अब यह हमला उसी बड़े तंत्र की टूट-फूट का हिंसक उदाहरण बन गया है।
पुडुचेरी क्रिकेट—एक वादा, जो बना विवाद
जब 2018 के आसपास पुडुचेरी को BCCI की मान्यता मिली थी, तब इसे दक्षिण भारत में उभरते हुए क्रिकेट सेंटर के रूप में देखा जा रहा था। नई सुविधाएँ, नए अवसर, और स्थानीय युवाओं के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म—ऐसा सपना था।
लेकिन बीते तीन-चार वर्षों में विवादों की संख्या बढ़ती गई—
सेलेक्शन में ग़लत हस्तक्षेप, बाहर के खिलाड़ियों का वर्चस्व, और अब हिंसा।
CAP ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है—जो अपने आप में एक बयान बन जाता है।
टेबल: पुडुचेरी क्रिकेट पर उठे प्रमुख सवाल (2021–2024)
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| लोकल खिलाड़ियों के अवसर | रणजी में 3 वर्षों में सिर्फ 5 स्थानीय खिलाड़ी |
| चयन विवाद | SMAT और अन्य टूर्नामेंटों में बाहरी खिलाड़ियों को प्राथमिकता |
| प्रशासनिक तनाव | स्थानीय फोरम्स बनाम CAP अधिकारियों के बीच असहमति |
| ताज़ा घटना | कोच पर हमला, तीन खिलाड़ी फरार |
| संभावित कार्रवाई | BCCI जांच, CAP पर दबाव बढ़ा |
बड़ा सवाल—ये सिर्फ तीन खिलाड़ियों की हरकत है या व्यवस्था की दरार?
कोच पर हाथ उठाना किसी भी तर्क में फिट नहीं बैठता। लेकिन यह भी सच्चाई है कि खिलाड़ी अक्सर सिस्टम की गलतियों का भार खुद ढोते-ढोते टूट जाते हैं।
यहाँ मामला दो स्तरों पर बैठता है:
- व्यक्तिगत अपराध—जिसके लिए आरोपी खिलाड़ियों पर कार्रवाई निश्चित है।
- प्रणालीगत समस्या—जहाँ चयन की पारदर्शिता, स्थानीय खिलाड़ियों की अनदेखी और प्रशासनिक गलतियाँ साफ दिख रही हैं।
क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, करियर है। और करियर जब बंद दरवाज़ों के पीछे नीतियों में उलझ जाए, तो frustration वहीं explode होता है जहाँ दबाव सबसे ज़्यादा होता है—ग्राउंड पर।















