SMAT – घरेलू क्रिकेट की भीड़ में कभी-कभी कोई प्रदर्शन ऐसा होता है, जो सीधे टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम तक गूंज पैदा कर देता है। मोहम्मद सिराज ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ठीक वही किया है।
भारतीय टी20 सेटअप से बाहर चल रहे इस तेज़ गेंदबाज़ ने मुंबई के खिलाफ ऐसा स्पेल फेंका, जिसने अजीत अगरकर से लेकर गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव तक—सबको नोटिस लेने पर मजबूर कर दिया।
टी20 वर्ल्ड कप से पहले जब पेस अटैक की तस्वीर बन रही है, सिराज ने साफ कर दिया है—उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
भारतीय टी20 पेस अटैक—जहां सिराज फंस जाते हैं
फिलहाल भारतीय टी20 सेटअप में पेस गेंदबाज़ी का ढांचा कुछ ऐसा दिखता है:
– जसप्रीत बुमराह
– अर्शदीप सिंह
– हर्षित राणा
– और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या
यही वजह है कि सिराज जैसे शुद्ध तेज़ गेंदबाज़ को जगह नहीं मिल पा रही। चयन का तर्क साफ है—बैटिंग डेप्थ। हर्षित राणा बल्ले से जो अतिरिक्त योगदान दे सकते हैं, वही सिराज की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
लेकिन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में सिराज ने यह दिखा दिया कि अगर गेंद हाथ में हो, तो वह अकेले दम पर मैच पलट सकते हैं।
मुंबई के खिलाफ वो स्पेल—कम ओवर, ज्यादा असर
हैदराबाद की ओर से खेलते हुए सिराज ने मुंबई के खिलाफ ऐसा स्पेल डाला, जो टी20 क्रिकेट में गेंदबाज़ों के लिए सपना माना जाता है।
3.5 ओवर, 17 रन, 3 विकेट।
न लाइन लूज़, न लेंथ भटकी। नई गेंद से दबाव बनाया, मिडिल ओवर्स में विकेट निकाले और मुंबई की बल्लेबाज़ी को सांस ही नहीं लेने दी।
उनके इस स्पेल की बदौलत मुंबई की टीम 131 रन पर सिमट गई—एक ऐसा स्कोर, जो मौजूदा टी20 दौर में अक्सर बचाव के लायक भी नहीं माना जाता।
टेबल: सिराज बनाम मुंबई — मैच का त्वरित डेटा
| गेंदबाज़ | ओवर | रन | विकेट |
|---|---|---|---|
| मोहम्मद सिराज | 3.5 | 17 | 3 |
कम ओवर, लेकिन पूरा कंट्रोल—यही टी20 में गेंदबाज़ की असली पहचान है।
रनचेज में तनमय अग्रवाल का शो
132 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए हैदराबाद ने कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई। तनमय अग्रवाल ने मौके को पूरी तरह भुनाया और सिर्फ 40 गेंदों में 75 रन ठोक दिए।
हैदराबाद ने यह मुकाबला 11.5 ओवर में, 9 विकेट रहते अपने नाम कर लिया। यह जीत सिर्फ बड़ी नहीं थी—यह डोमिनेशन थी।
प्लेयर ऑफ द मैच—और एक मजबूत संदेश
मोहम्मद सिराज को उनकी धारदार गेंदबाज़ी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। अवॉर्ड से ज्यादा अहम था वह संदेश, जो इस प्रदर्शन ने दिया:
टी20 टीम से बाहर होने का मतलब खत्म होना नहीं होता।
आखिरी टी20 और उसके बाद की कहानी
सिराज ने भारत के लिए आखिरी टी20 मैच 2024 में खेला था। टी20 वर्ल्ड कप स्कीम से बाहर रहने के बावजूद उन्होंने न शिकायत की, न शोर मचाया।
इसके बजाय—
– घरेलू क्रिकेट
– फिटनेस
– और स्किल अपग्रेड
पर फोकस रखा।
आज उसी मेहनत का नतीजा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के मैदान पर दिख रहा है।
चयनकर्ताओं के लिए असहज सवाल
सिराज का यह प्रदर्शन चयनकर्ताओं के सामने एक सीधा सवाल खड़ा करता है:
क्या टी20 में सिर्फ बैटिंग वैल्यू ही सब कुछ है?
या फिर ऐसे गेंदबाज़ के लिए भी जगह बननी चाहिए, जो नई गेंद और डेथ—दोनों में असर डाल सकता है?
टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में कंट्रोल और विकेट-टेकिंग की अहमियत अक्सर रन बनाने जितनी ही होती है—और सिराज उसी कैटेगरी में आते हैं।
आगे क्या?
एक मैच से वापसी तय नहीं होती, लेकिन एक मैच से दरवाज़ा ज़रूर खटखटाया जा सकता है।
सिराज ने वह काम कर दिया है।
अब गेंद चयनकर्ताओं के पाले में है।















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