IPL – आईपीएल ने जिस नियम को “गेम-चेंजर” बताकर पेश किया था, उसी पर अब इंटरनेशनल क्रिकेटर्स खुलकर उंगली उठा रहे हैं। ताज़ा आवाज़ आई है न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर जेम्स नीशम की—और शब्द किसी कूटनीति में नहीं लिपटे।
नीशम ने इम्पैक्ट प्लेयर रूल को सीधा-सीधा “बेवकूफी भरा नियम” कह दिया है और साफ कहा है कि इसे IPL और बाकी T20 लीग्स से हटा देना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब यह नियम भारत में ही नहीं, ग्लोबल T20 इकोसिस्टम में भी लगातार बहस का विषय बना हुआ है।
ILT20 में इम्पैक्ट प्लेयर बने—और गुस्सा फूट पड़ा
इस वक्त ILT20 में दुबई कैपिटल्स के लिए खेल रहे जेम्स नीशम खुद हाल ही में एक मैच में इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतरे।
नतीजा?
– बल्लेबाज़ी में सिर्फ 16 रन
– गेंदबाज़ी में पहले ही ओवर में 22 रन खर्च
लेकिन मुद्दा प्रदर्शन नहीं था। मुद्दा था तैयारी।
नीशम का कहना है कि यह नियम खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मैच के लिए तैयार होने ही नहीं देता।
“आपको पता ही नहीं होता कि आप खेल रहे हैं या नहीं”
दुबई कैपिटल्स द्वारा आयोजित बातचीत में Times of India से बात करते हुए नीशम ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा:
“यह एक बेवकूफी भरा नियम है। यह IPL में काम नहीं करता। सच कहूं तो, मुझे नहीं पता कि यह अभी भी क्यों है। यह खिलाड़ियों को गेम के लिए ठीक से तैयारी करने से रोकता है।”
उनका तर्क सीधा है—
अगर किसी खिलाड़ी को यह नहीं पता कि वह प्लेइंग XI में है या नहीं, तो वह मैच से पहले ट्रेनिंग कैसे करेगा?
“अगर आपको लगता है कि आप नहीं खेल रहे हैं, तो आप गेम से पहले ठीक से ट्रेनिंग नहीं कर सकते, क्योंकि हमेशा यह चांस रहता है कि आखिरी मिनट में आपको बुला लिया जाए।”
ऑलराउंडर क्यों सबसे ज्यादा नुकसान में?
इम्पैक्ट प्लेयर रूल का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट पड़ा है ऑलराउंडर्स पर—और यह बात नीशम जैसे अनुभवी खिलाड़ी से बेहतर कौन समझेगा।
उनके मुताबिक:
– खिलाड़ी अपनी कमजोरियों पर काम करना बंद कर देते हैं
– फील्डिंग जैसी स्किल्स का महत्व कम हो जाता है
– “स्पेशलिस्ट” बनने की प्रवृत्ति बढ़ती है
नीशम ने साफ कहा:
“आप एक खराब फील्डर हो सकते हैं और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आप युवा क्रिकेटर हैं, तो आप अपनी फील्डिंग पर काम क्यों करेंगे? आप बस मैदान से बाहर चले जाएंगे।”
यानी—
क्रिकेटर नहीं, रोल्स बन रहे हैं।
IPL में 2023 से लागू—लेकिन विरोध शुरू से
इम्पैक्ट प्लेयर रूल IPL 2023 में लाया गया था, तर्क था:
– ज्यादा रन
– ज्यादा रोमांच
– टीवी दर्शकों के लिए बेहतर उत्पाद
लेकिन क्रिकेट के अंदरूनी लोगों की राय तब से बंटी हुई रही है।
नियम के खिलाफ खड़े बड़े नाम
– राहुल द्रविड़ (पूर्व हेड कोच, टीम इंडिया)
– रोहित शर्मा
– विराट कोहली
इन सभी ने अलग-अलग मौकों पर कहा है कि यह नियम:
– ऑलराउंडर्स को खत्म कर रहा है
– खेल का संतुलन बिगाड़ रहा है
– टेस्ट और वनडे क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों को अधूरा बना रहा है
अब जेम्स नीशम का बयान इस विरोध को ग्लोबल वैलिडेशन देता है।
इम्पैक्ट प्लेयर रूल: फायदा किसे, नुकसान किसका?
नीचे एक सीधी तुलना देखिए:
| पहलू | फायदा | नुकसान |
|---|---|---|
| बल्लेबाज़ी | बड़े स्कोर | ऑलराउंडर की भूमिका खत्म |
| टीम स्ट्रेटजी | फ्लेक्सिबिलिटी | प्लेयर डेवलपमेंट बाधित |
| युवा खिलाड़ी | जल्दी मौके | स्किल्स अधूरी रह जाती हैं |
| फील्डिंग | कम दबाव | स्तर गिरता है |
| इंटरनेशनल क्रिकेट | — | रेडी खिलाड़ी नहीं मिलते |
यानी शॉर्ट-टर्म एंटरटेनमेंट के बदले लॉन्ग-टर्म क्रिकेटिंग वैल्यू दांव पर लग रही है।
नीशम का करियर और अनुभव—हल्की आवाज़ नहीं है
जेम्स नीशम कोई एक सीज़न का विदेशी खिलाड़ी नहीं हैं।
– करीब 100 T20 इंटरनेशनल मैच
– दुनिया की लगभग हर बड़ी T20 लीग
– 30 से ज्यादा टीमों के लिए खेल चुके
जब ऐसा खिलाड़ी किसी नियम को “बेकार” कहता है, तो वह अनुभव बोल रहा होता है, निराशा नहीं।
“करियर के आखिरी दौर में हूं”—नीशम का साफ प्लान
नीशम ने अपने इंटरनेशनल भविष्य को लेकर भी खुलकर बात की:
“अब मैं 35 साल का हो गया हूं। फरवरी में T20 वर्ल्ड कप है, जो शायद मेरा आखिरी इंटरनेशनल असाइनमेंट होगा।”
इसके बाद फोकस होगा:
– बॉडी मैनेजमेंट
– शेड्यूल मैनेजमेंट
– ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना
– अलग-अलग टीमों के लिए योगदान देना
ऐसे में, उनका यह कहना कि यह नियम खिलाड़ियों की तैयारी बिगाड़ता है—और भी गंभीर हो जाता है।
ICC और BCCI के लिए सीधा सवाल
अब सवाल यह नहीं है कि इम्पैक्ट प्लेयर रूल रोमांच बढ़ाता है या नहीं।
सवाल यह है:
– क्या यह इंटरनेशनल क्रिकेट को कमजोर कर रहा है?
– क्या भारत भविष्य के ऑलराउंडर्स खो रहा है?
– क्या T20 लीग्स टेस्ट और वनडे के लिए खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचा रही हैं?
नीशम का बयान सिर्फ IPL पर नहीं, पूरे T20 मॉडल पर सवाल खड़ा करता है।















