Markram : ठंडा मौसम लेकिन बहाना नहीं—हार पर मार्करम की ईमानदार प्रतिक्रिया

Atul Kumar
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Markram

Markram – पहले चार ओवर, स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 7 रन—और ड्रेसिंग रूम में बढ़ती बेचैनी।
धर्मशाला की ठंडी शाम में भारत की नई गेंद ने ऐसा दबाव बनाया कि साउथ अफ्रीका की पारी शुरू होने से पहले ही लड़खड़ा गई। मैच खत्म होने के बाद जब एडेन मार्करम मीडिया के सामने आए, तो हार की वजह छिपाने की कोई कोशिश नहीं की।

कप्तान ने साफ कहा—भारतीय पेसर्स ने हमें खेलने ही नहीं दिया।

“पहली गेंद से ही मुश्किलें”—मार्करम का साफ कबूलनामा

तीसरे टी20 इंटरनेशनल में 7 विकेट से हार के बाद मार्करम ने माना कि भारत के नई गेंद के गेंदबाजों ने मैच की दिशा शुरू में ही तय कर दी।

उनके शब्दों में:

“उन्होंने सही जगहों पर गेंद डाली। अर्शदीप ने उम्दा गेंदबाजी की। उनके दोनों नई गेंद के गेंदबाजों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।”

यह सिर्फ औपचारिक तारीफ नहीं थी। यह उस दबाव की स्वीकारोक्ति थी, जो शुरुआती ओवरों में साउथ अफ्रीका पर बना।

4 ओवर, 7 रन, 3 विकेट—यहीं मैच निकल गया

मैच की कहानी बहुत जल्दी लिख दी गई थी।

– पहले 4 ओवर
– स्कोर: 7/3
– पवेलियन लौटे टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़

अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने नई गेंद से ऐसी लाइन-लेंथ पकड़ी कि साउथ अफ्रीका के बल्लेबाज़ न तो खुलकर खेल पाए, न ही टिककर।

इन शुरुआती झटकों से मार्करम की टीम कभी उबर ही नहीं सकी और पूरी पारी 117 रन पर सिमट गई।

अर्शदीप + हर्षित—नई गेंद की परफेक्ट जोड़ी

मार्करम ने खास तौर पर अर्शदीप की गेंदबाजी को सराहा, लेकिन असल असर दोनों छोर से पड़ा।

– स्विंग और सीम मूवमेंट
– बैक ऑफ लेंथ पर अनुशासन
– बल्लेबाजों को क्रीज़ पर सेट होने का मौका नहीं

मार्करम ने कहा:

“आपको हालात मिल सकते हैं, लेकिन आखिर में गेंदबाजों को सही जगहों पर गेंद डालनी होती है—और उन्होंने वही किया।”

यह बयान सीधे-सीधे बताता है कि यह सिर्फ पिच या मौसम का खेल नहीं था, बल्कि एक्ज़ीक्यूशन का फर्क था।

ठंडा मौसम, मुश्किल हालात—लेकिन बहाना नहीं

धर्मशाला में मौसम ठंडा था, हवा में नमी थी—जो तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है।
मार्करम ने यह माना, लेकिन इसे बहाना बनाने से इनकार कर दिया।

उनका कहना था:

“हालात कठिन थे, मौसम ठंडा था और उसका असर पड़ा। लेकिन हमें इसके अनुरूप ढलना होगा। इससे कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।”

यह बयान बताता है कि साउथ अफ्रीका खुद भी मानता है—
टी20 क्रिकेट में एडजस्टमेंट ही असली स्किल है।

कम स्कोर, लेकिन रोमांच? कप्तान की अलग सोच

मार्करम ने एक दिलचस्प बात कही—जो शायद स्कोरकार्ड देखकर अजीब लगे।

उन्होंने कहा:

“कम स्कोर वाले मैच भी रोमांचक हो सकते हैं।”

हालांकि, इस मुकाबले में रोमांच भारत के लिए ज्यादा था।
क्योंकि 118 रन का लक्ष्य चेज करते वक्त भारत कभी दबाव में दिखा ही नहीं।

भारत की बॉलिंग—2026 की तस्वीर?

इस मैच ने भारतीय टीम मैनेजमेंट को एक साफ संदेश दिया है—

– अर्शदीप नई गेंद से और भी परिपक्व हो रहे हैं
– हर्षित राणा जैसे युवा दबाव में घबराते नहीं
– पावरप्ले में विकेट लेने की क्षमता लौट आई है

टी20 क्रिकेट में यही फर्क बनाता है।

साउथ अफ्रीका की चिंता—टॉप ऑर्डर का ढहना

मार्करम की टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि:

– शुरुआती झटकों के बाद कोई रीबिल्ड नहीं हुआ
– मिडिल ऑर्डर पर जरूरत से ज्यादा दबाव आ गया
– स्ट्राइक रोटेशन पूरी तरह ठप रहा

टी20 में अगर पावरप्ले में रन नहीं आते, तो मैच आधा वहीं खत्म हो जाता है।

टेबल: मैच का टर्निंग पॉइंट

पहलूआंकड़ा
पहले 4 ओवर7/3
साउथ अफ्रीका का कुल स्कोर117
भारत की जीत7 विकेट
नई गेंद के विकेट3
मैच का निर्णायक चरणपावरप्ले

कप्तान की जिम्मेदारी—हार से सीख

मार्करम ने यह भी साफ किया कि टीम को ऐसे हालात से सीख लेनी होगी।

– स्विंग कंडीशंस में बेहतर गेम प्लान
– नई गेंद के खिलाफ ज्यादा अनुशासन
– जोखिम और रफ्तार का सही संतुलन

यह हार सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि टी20 एप्रोच की परीक्षा थी।

आगे की राह

सीरीज़ अभी खत्म नहीं हुई है।
लेकिन इस मुकाबले ने साफ कर दिया है—

– भारत की नई गेंद अब सिर्फ विकेट नहीं, मैच जीतने का हथियार है
– और साउथ अफ्रीका को अगर वापसी करनी है, तो शुरुआत से ही बेहतर जवाब देना होगा

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