CPC – कोलंबो की सियासी गलियों से लेकर क्रिकेट की यादों तक, एक ऐसा नाम फिर सुर्खियों में है जिसे श्रीलंका ने कभी विश्व कप ट्रॉफी के साथ जोड़ा था। 1996 के वर्ल्ड चैंपियन कप्तान अर्जुन रणतुंगा—अब क्रिकेट नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के एक हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर चर्चा में हैं।
मामला इतना गंभीर है कि गिरफ्तारी की तलवार उनके सिर पर लटक रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस वक्त वे देश से बाहर हैं।
पहले भाई की गिरफ्तारी, अब अर्जुन पर संकट
इस पूरे केस की शुरुआत अर्जुन रणतुंगा के बड़े भाई और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर दम्मिका रणतुंगा की गिरफ्तारी से हुई। श्रीलंका के भ्रष्टाचार जांच आयोग (CIABOC) ने दम्मिका को 2017 के एक मामले में गिरफ्तार किया था। हालांकि, 15 दिसंबर को उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया, लेकिन जांच वहीं खत्म नहीं होती।
सीआईएबीओसी ने कोलंबो मजिस्ट्रेट कोर्ट को बताया है कि इस मामले में अर्जुन रणतुंगा को दूसरे आरोपी के तौर पर नामित किया गया है। अर्जुन को फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया जा सका, क्योंकि वे श्रीलंका से बाहर हैं। अधिकारियों के मुताबिक, देश लौटते ही उनकी गिरफ्तारी संभव है।
क्या है पूरा मामला?
आरोप 2017 का है, जब सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CPC) द्वारा कच्चे तेल की खरीद की गई थी। उस समय—
– दम्मिका रणतुंगा CPC के चेयरमैन थे
– अर्जुन रणतुंगा श्रीलंका के पेट्रोलियम उद्योग मंत्री
CIABOC के अनुसार, कच्चे तेल की खरीद में निविदा प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया, जिससे सरकारी कंपनी को करीब 80 करोड़ श्रीलंकाई रुपये का नुकसान हुआ। आयोग का दावा है कि दम्मिका ने अपने पद का अनुचित प्रभाव इस्तेमाल किया, और इसी केस में अर्जुन की भूमिका की भी जांच हो रही है।
क्यों अर्जुन रणतुंगा पर टिकी हैं निगाहें?
अर्जुन रणतुंगा सिर्फ एक पूर्व क्रिकेटर नहीं हैं। वे—
– श्रीलंका को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले कप्तान
– लंबे समय तक सक्रिय राजनेता
– पेट्रोलियम, बंदरगाह और शिपिंग जैसे अहम मंत्रालयों का हिस्सा
जब दम्मिका CPC के प्रमुख थे, तब अर्जुन उसी सेक्टर के मंत्री थे। यहीं से जांच एजेंसियों को ‘कमान और नियंत्रण’ की कड़ी पर शक है।
CIABOC ने अदालत को स्पष्ट किया कि अर्जुन रणतुंगा की भूमिका की जांच चल रही है और वे देश लौटते ही पूछताछ व गिरफ्तारी के दायरे में आ सकते हैं।
दम्मिका रणतुंगा: क्रिकेट से कॉरपोरेट पावर तक
दम्मिका रणतुंगा का क्रिकेट करियर छोटा रहा, लेकिन प्रोफाइल भारी रही—
– 1989–90 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट मैच
– सलामी बल्लेबाज के रूप में प्रतिनिधित्व
– बाद में बने श्रीलंका क्रिकेट के पहले CEO
क्रिकेट प्रशासन से लेकर सरकारी संस्थानों तक, दम्मिका कई ताकतवर पदों पर रहे। लेकिन इसी सफर में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगातार उनके साथ जुड़े, जिनका ताज़ा रूप यह CPC मामला है।
जमानत मिली, लेकिन मामला खत्म नहीं
हालांकि दम्मिका को जमानत मिल चुकी है, लेकिन यह राहत अस्थायी मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब केस को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन रणतुंगा की भूमिका पर फोकस कर रही हैं।
श्रीलंका की राजनीति और क्रिकेट को करीब से देखने वालों के लिए यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। यहां खेल और सत्ता का मेल अक्सर विवादों में घिरता रहा है।
क्रिकेट आइकन से कानूनी संकट तक
अर्जुन रणतुंगा का नाम कभी—
– ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दबदबे
– अंपायरों से टकराव
– और एशियाई क्रिकेट की नई पहचान
के लिए लिया जाता था। आज वही नाम कोर्ट रूम, चार्जशीट और गिरफ्तारी जैसे शब्दों के साथ जुड़ रहा है।
यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि श्रीलंका में खेल, राजनीति और सरकारी संस्थानों के बीच की जटिल रिश्तों पर भी सवाल खड़े करता है।















