Ashes : 3-0 के बाद सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलिया – ब्रॉड अब भी क्यों नहीं बदले

Atul Kumar
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Ashes – एडिलेड की रात खत्म हो चुकी थी, स्कोरलाइन 3-0 चमक रही थी, और एशेज सिर्फ़ 11 दिनों में ऑस्ट्रेलिया की झोली में जा चुकी थी। इंग्लैंड की हालत बदतर थी, सवाल हर तरफ़ थे—लेकिन इन सबके बीच स्टुअर्ट ब्रॉड अपने बयान पर अड़े हुए थे।
न कोई यू-टर्न। न कोई सफ़ाई। सिर्फ़ एक लाइन—“क्या मुझे पछतावा है? नहीं।”

“सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलिया”—और फिर भी 3-0

एशेज शुरू होने से पहले ब्रॉड ने कहा था कि पैट कमिंस की अगुआई वाली टीम 2010 के बाद की सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है।
अब, जब वही टीम इंग्लैंड को तीनों टेस्ट में रौंद चुकी है, तो उम्मीद थी कि ब्रॉड सुर बदलेंगे।

लेकिन ‘For the Love of Cricket’ पॉडकास्ट पर उनका जवाब सीधा था।

“क्या मुझे वो कहने का पछतावा है? नहीं।”

यह बयान सिर्फ़ ज़िद नहीं था, बल्कि उनके आकलन की सफ़ाई भी थी।

ब्रॉड की दलील: संदर्भ को समझिए

ब्रॉड का कहना है कि उनका बयान नतीजों पर नहीं, संभावनाओं पर आधारित था।

“मैंने ये कहा था कि ऑस्ट्रेलिया को खराब खेलना होगा और इंग्लैंड को बहुत अच्छा खेलना होगा,” उन्होंने कहा।
“ऑस्ट्रेलिया ने खराब नहीं खेला और इंग्लैंड बहुत अच्छा नहीं खेला।”

उनके मुताबिक:

  • ऑस्ट्रेलिया फेवरिट ज़रूर थी
  • लेकिन 3-0 जैसी फेवरिट नहीं

यानी ब्रॉड को हार की उम्मीद थी, तबाही की नहीं।

इंग्लैंड के पक्ष में जो मौके थे… और जो गंवाए गए

ब्रॉड ने यह भी गिनाया कि सीरीज़ से पहले इंग्लैंड के पास मौके थे।

  • पैट कमिंस पहले दो टेस्ट में नहीं खेले
  • जोश हेज़लवुड चोट के कारण पूरी सीरीज़ से बाहर
  • स्टीव स्मिथ एडिलेड टेस्ट में नहीं खेले

काग़ज़ पर देखें, तो यह वो परिस्थितियां थीं जहां इंग्लैंड को फायदा उठाना चाहिए था।

लेकिन ब्रॉड साफ़ मानते हैं—इंग्लैंड ने अच्छा क्रिकेट नहीं खेला।

2013–14 बनाम 2025: तुलना अभी भी ज़िंदा

ब्रॉड ने मौजूदा टीम की तुलना ऑस्ट्रेलिया की पिछली एशेज टीमों से की—और यहां भी वह पीछे नहीं हटे।

“क्या मैं मानता हूं कि 2013–14 की टीम बेहतर थी? हां।”

उनके मुताबिक, मौजूदा ऑस्ट्रेलिया:

  • व्यक्तिगत रूप से उतनी मजबूत नहीं
  • लेकिन इंग्लैंड पर दबाव बनाने में बेहद निर्दयी

यही फर्क़ है।

दबाव, निरंतरता और निर्दयता

ब्रॉड का सबसे अहम पॉइंट यही है—
ऑस्ट्रेलिया ने हर सेशन में इंग्लैंड को सांस नहीं लेने दी।

  • बल्लेबाज़ी में धैर्य
  • गेंदबाज़ी में अनुशासन
  • फील्डिंग में ऊर्जा

भले ही नाम बड़े न हों, लेकिन अमल लगातार रहा।

11 दिनों में सीरीज़: रिकॉर्ड की बराबरी

इंग्लैंड के लिए यह सिर्फ़ हार नहीं थी।
यह इतिहास की किताब में दर्ज होने वाला झटका था।

पहलूआंकड़ा
खेले गए टेस्ट3
दिन11
सीरीज़ स्थितिऑस्ट्रेलिया 3-0
इंग्लैंड पर खतरा5-0 की हार

इतनी जल्दी एशेज खत्म होना—अपने आप में बयान है।

तो क्या ब्रॉड गलत थे?

यही असली सवाल है।

अगर आप नतीजे देखें—तो हां।
अगर आप तैयारी, मौके और काग़ज़ी ताकत देखें—तो शायद नहीं।

ब्रॉड की बात यह नहीं थी कि ऑस्ट्रेलिया कमजोर है।
उनकी बात यह थी कि यह कोई अपराजेय ऑस्ट्रेलिया नहीं थी।

लेकिन इंग्लैंड ने उसे अपराजेय बना दिया।

इंग्लैंड की असली हार कहां हुई?

  • गेंद के साथ निरंतरता नहीं
  • बल्लेबाज़ी में लंबे स्पेल नहीं
  • और रणनीति में लचीलापन नहीं

ब्रॉड के शब्दों में—
ऑस्ट्रेलिया ने वही किया जो इंग्लैंड नहीं कर सका: दबाव बनाए रखा।

अब खतरा 5-0 का

दो टेस्ट अभी बाकी हैं।
सीरीज़ तो जा चुकी है, लेकिन सम्मान अभी दांव पर है।

अगर इंग्लैंड जल्दी नहीं संभला, तो यह सिर्फ़ हार नहीं—
व्हाइटवॉश की कहानी बन सकती है।

ब्रॉड क्यों नहीं झुके?

क्योंकि उनके लिए यह बयान भावनात्मक नहीं था।
यह विश्लेषण था—जो मैदान पर गलत साबित हुआ, लेकिन सोच में नहीं।

और शायद यही वजह है कि वह आज भी कह पा रहे हैं—

“मुझे कोई पछतावा नहीं।”

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