BCCI : बीसीसीआई का सख्त संदेश – स्टार्स को घरेलू मैदान में उतरना ही होगा

Atul Kumar
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BCCI – मुंबई के घरेलू क्रिकेट कैलेंडर में इस बार कुछ अलग ही हलचल है।
ड्रेसिंग रूम में वही चेहरे, जो आमतौर पर टीवी स्क्रीन पर इंटरनेशनल जर्सी में दिखते हैं—अब विजय हजारे ट्रॉफी की किट में पसीना बहाने वाले हैं। और यह कोई इत्तेफाक नहीं है। यह बीसीसीआई का साफ संदेश है: अगर टीम इंडिया में नहीं हो, तो घरेलू क्रिकेट खेलना ही होगा।

इसी लाइन पर चलते हुए टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव और ऑलराउंडर शिवम दुबे अब मुंबई के लिए विजय हजारे ट्रॉफी खेलते नज़र आएंगे। बड़े नाम, बड़ा मंच—और सिस्टम की सख्ती।

BCCI का दो टूक नियम: जर्सी नहीं, तो रणभूमि डोमेस्टिक

पिछले कुछ महीनों में बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट एक बात पर बिल्कुल स्पष्ट रहा है—
जो खिलाड़ी:

  • इंटरनेशनल टीम में नहीं हैं
  • या फिलहाल चयन से बाहर हैं

उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट खेलना ही होगा।

यह सिर्फ फिटनेस या फॉर्म की बात नहीं है।
यह डिसिप्लिन और सिस्टम की बात है।

सूर्यकुमार यादव, जो अभी भारत की टी20 टीम के कप्तान हैं, लेकिन हालिया फॉर्म और चयन समीकरणों के चलते इंटरनेशनल एक्शन से दूर हैं—अब वही नियम उनके लिए भी लागू हुआ है।

मुंबई के आखिरी दो ग्रुप मैच: सूर्या और दुबे तैयार

विजय हजारे ट्रॉफी का ग्रुप स्टेज 24 दिसंबर से शुरू हो रहा है।
मुंबई के आखिरी दो मुकाबलों में:

  • सूर्यकुमार यादव
  • शिवम दुबे

खेलते नज़र आएंगे।

इन दोनों की उपलब्धता की पुष्टि हो चुकी है:

  • 6 जनवरी: बनाम हिमाचल प्रदेश (जयपुर)
  • 8 जनवरी: बनाम पंजाब (जयपुर)

यह वही जयपुर है, जहां अब पूरा मुंबई कैंप बेस्ड रहेगा।

यशस्वी जायसवाल: हेल्थ पहले, फिर हजारे

यशस्वी जायसवाल को लेकर अपडेट थोड़ा अलग है।

  • गैस्ट्राइटिस की समस्या
  • हाल ही में अस्पताल में भर्ती
  • अब रिकवरी के आखिरी चरण में

सूत्रों के मुताबिक, यशस्वी 29 दिसंबर तक टीम से जुड़ सकते हैं।
मतलब—ग्रुप स्टेज के कुछ शुरुआती मैच मिस, लेकिन टूर्नामेंट से पूरी तरह बाहर नहीं।

मैनेजमेंट का फोकस साफ है:
जल्दबाज़ी नहीं, लेकिन उपलब्ध होते ही मैदान।

रोहित शर्मा पहले ही जयपुर में

पूर्व कप्तान रोहित शर्मा पहले ही जयपुर पहुंच चुके हैं।
मुंबई अपने ग्रुप फेज के सभी मैच यहीं खेलेगी।

मुंबई – ग्रुप C में

टीम
पंजाब
उत्तराखंड
हिमाचल प्रदेश
सिक्किम
छत्तीसगढ़
महाराष्ट्र
गोवा

यह ग्रुप हल्का नहीं है।
पंजाब और महाराष्ट्र जैसी टीमें मुकाबले को टाइट बनाएंगी—खासतौर पर तब, जब उनके पास भी इंटरनेशनल स्टार्स हैं।

पंजाब, दिल्ली, मुंबई—स्टार्स से भरा डोमेस्टिक

इस विजय हजारे ट्रॉफी की सबसे खास बात यही है—
लगभग एक दशक बाद, इतने बड़े नाम एक साथ घरेलू क्रिकेट में उतर रहे हैं।

पंजाब के लिए

  • शुभमन गिल (टेस्ट और वनडे कप्तान)
  • अर्शदीप सिंह
  • अभिषेक शर्मा

दिल्ली के लिए

  • विराट कोहली
  • ऋषभ पंत

मुंबई के लिए

  • रोहित शर्मा
  • सूर्यकुमार यादव
  • शिवम दुबे
  • (संभावित) यशस्वी जायसवाल

यह लिस्ट अपने आप में बता देती है—
यह कोई आम विजय हजारे नहीं है।

क्यों अचानक घरेलू क्रिकेट इतना जरूरी हो गया?

इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं।

1. फॉर्म का सवाल

सूर्यकुमार यादव जैसे खिलाड़ी इस वक्त फॉर्म को लेकर सवालों में हैं।
नेट्स काफी नहीं।
मैच सिचुएशन चाहिए।

2. फिटनेस और लय

लगातार ब्रेक लेने से:

  • टाइमिंग जाती है
  • मैच अवेयरनेस गिरती है

डोमेस्टिक क्रिकेट इसे वापस लाने का सबसे सीधा तरीका है।

3. मैसेज टू द सिस्टम

बीसीसीआई यह साफ कर देना चाहता है कि:

  • स्टारडम अलग चीज है
  • टीम कल्चर अलग

कोई भी खिलाड़ी सिस्टम से ऊपर नहीं।

न्यूज़ीलैंड सीरीज़ आएगी, फिर सब बदल जाएगा

यह भी साफ है कि यह पूरा सेटअप स्थायी नहीं है।

जनवरी में:

  • न्यूज़ीलैंड के खिलाफ ODI और T20 सीरीज़
  • मुख्य खिलाड़ी विजय हजारे से हट जाएंगे

और उसके बाद फोकस शिफ्ट होगा:

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026 की तैयारियों पर

लेकिन तब तक—
जो भी उपलब्ध है, उसे घरेलू क्रिकेट में ही दिखाना होगा।

सूर्या के लिए यह टूर्नामेंट क्यों अहम?

सूर्यकुमार यादव के लिए विजय हजारे ट्रॉफी सिर्फ औपचारिकता नहीं है।

  • हालिया टी20 फॉर्म पर सवाल
  • कप्तानी के दबाव
  • और लगातार आलोचना

50 ओवर का फॉर्मेट उन्हें:

  • शॉट सेलेक्शन
  • टेम्परामेंट
  • और इनिंग बिल्डिंग

तीनों पर काम करने का मौका देगा।

यही वजह है कि यह टूर्नामेंट उनके लिए रीसेट बटन जैसा है।

शिवम दुबे: रोल तय करने का मौका

दुबे के लिए भी यह बड़ा मंच है।

  • मिडिल ऑर्डर ऑलराउंडर
  • सीम गेंदबाज़ी का बैकअप
  • और सीमित मौके

विजय हजारे में अच्छा प्रदर्शन:

  • उन्हें वनडे सेटअप के करीब ला सकता है
  • या कम से कम सिलेक्टर्स की नोटबुक में वापस डाल सकता है

घरेलू क्रिकेट की इज्जत लौटती हुई

कभी वक्त था जब घरेलू टूर्नामेंट:

  • खाली स्टेडियम
  • कम चर्चा
  • और सेकेंडरी समझे जाते थे

अब तस्वीर बदल रही है।

जब:

  • रोहित शर्मा स्लिप में खड़े हों
  • विराट कोहली कवर ड्राइव मारें
  • और सूर्या 360 डिग्री शॉट खेले

तो घरेलू क्रिकेट फिर से प्राइम टाइम बन जाता है।

सिस्टम का जीतना, खिलाड़ियों की परीक्षा

यह फैसला खिलाड़ियों के खिलाफ नहीं है।
यह उनके भले के लिए है।

बीसीसीआई का स्टैंड साफ है:

  • इंटरनेशनल जर्सी प्रिविलेज है
  • और डोमेस्टिक क्रिकेट उसकी नींव

जो नींव मज़बूत रखेगा,
वही ऊपर टिकेगा।

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