T20I – शुभमन गिल का नाम जब भी भारतीय क्रिकेट के भविष्य की बातों में आता है, टोन अपने आप बदल जाती है। “नेक्स्ट ऑल-फॉर्मेट सुपरस्टार”, “फ्यूचर कैप्टन”, “विराट-रोहित के बाद का चेहरा”—लेकिन उसी खिलाड़ी को जब टी20 टीम से बाहर कर दिया जाता है, और वह भी टी20 वर्ल्ड कप 2026 की रेस से, तो सवाल उठना लाज़मी है। क्या यह सिर्फ फॉर्म का मामला है, या फिर बीसीसीआई के प्लान में ही कुछ गड़बड़ थी?
एशिया कप से उपकप्तान, फिर बाहर का रास्ता
कुछ महीने पहले की ही बात है।
एशिया कप के लिए शुभमन गिल को टी20 टीम में चुना गया।
इतना ही नहीं—उन्हें सीधे उपकप्तान बना दिया गया।
क्रिकेट सर्किल में इसे एक साफ संकेत माना गया:
- बीसीसीआई का “वन कैप्टन फॉर ऑल फॉर्मेट” प्लान
- रोहित के बाद गिल
- टेस्ट, ODI और T20—तीनों में एक ही चेहरा
लेकिन क्रिकेट इमोशन से नहीं, आउटपुट से चलता है।
टी20 में गिल का सच: नंबर झूठ नहीं बोलते
एशिया कप और उसके आसपास के टी20 मैचों में शुभमन गिल का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
- मैच: 15
- रन: 291
- हाफ सेंचुरी: 0
- स्ट्राइक रेट: लगातार सवालों में
टी20 फॉर्मेट में, जहां पावरप्ले में मैच पलटने की आदत चाहिए, वहां गिल अक्सर “सेट होने” में ही वक्त गंवाते दिखे।
और यहीं से कहानी पलटी।
न्यूजीलैंड सीरीज़ और वर्ल्ड कप—दोनों से बाहर
नतीजा साफ था:
- न्यूजीलैंड के खिलाफ T20 सीरीज़—गिल नहीं
- T20 वर्ल्ड कप स्क्वाड—गिल नहीं
यानी जिस खिलाड़ी को कुछ समय पहले भविष्य का टी20 लीडर माना जा रहा था, वही प्लान से पूरी तरह बाहर।
डब्लू वी रमन का स्टैंड: “यह ड्रॉप नहीं, फॉर्मेट का फैसला है”
इस पूरे मामले में एक संतुलित आवाज आई डब्लू वी रमन की—भारतीय महिला टीम के पूर्व कोच।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में रमन ने साफ कहा कि गिल को उनकी किसी गलती के लिए नहीं हटाया गया है।
उनके शब्दों में,
“गिल को इसलिए ड्रॉप नहीं किया गया कि उनमें कोई दोष है। मसला सिर्फ यह है कि उनके आसपास के खिलाड़ी उनसे ज्यादा विस्फोटक हैं।”
यानी यह “फेल्योर” नहीं, बल्कि फॉर्मेट मिसमैच है।
गावस्कर vs श्रीकांत—रमन की सबसे सटीक मिसाल
रमन ने बात समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा,
“यह ठीक वैसा है जैसे टी20 में सुनील गावस्कर के ऊपर श्रीकांत को चुनना।”
मतलब:
- गावस्कर महान बल्लेबाज
- लेकिन टी20 में श्रीकांत ज्यादा फिट
इसी तरह:
- गिल क्लास, टाइमिंग और कंसिस्टेंसी के खिलाड़ी
- लेकिन टी20 मांगता है—इम्पैक्ट, एक्सप्लोसिवनेस, इंटेंट
“तो फिर उपकप्तान क्यों?”—यहीं फंसा बीसीसीआई
रमन ने एक अहम सवाल भी उठाया, जो अब कई एक्सपर्ट पूछ रहे हैं।
“जब आपके पास दूसरे फिट खिलाड़ी थे, तो गिल को टी20 का उपकप्तान बनाना जरूरी क्यों था?”
यहीं पर बीसीसीआई का प्लान लड़खड़ाता दिखता है।
अगर गिल टी20 के लिए परफेक्ट फिट नहीं थे, तो:
- उन्हें उपकप्तान क्यों बनाया गया?
- क्या यह जल्दबाज़ी थी?
- या फिर एक ओवर-एम्बिशियस ट्रांजिशन प्लान?
2024 भी मिस, 2026 भी मिस—कितनी बार अनलकी?
यह पहला मौका नहीं है।
- T20 वर्ल्ड कप 2024—गिल बाहर
- T20 वर्ल्ड कप 2026—फिर बाहर
और इस बार तो संकेत और भी मजबूत थे।
एशिया कप में उपकप्तानी देखकर खुद गिल को भी लगा होगा—अब तो जगह पक्की है।
लेकिन क्रिकेट ने फिर वही सिखाया—कुछ भी पक्का नहीं।
“खिलाड़ी की जिंदगी में इमोशन की जगह नहीं” — कड़वी लेकिन सच्ची बात
रमन की सबसे कड़ी टिप्पणी यहीं आई।
उन्होंने कहा,
“एक खिलाड़ी की जिंदगी में इमोशन की जगह नहीं होती।”
साफ संदेश:
- यह फैसला टीम कंपोजिशन का है
- इसका मतलब यह नहीं कि गिल छोटे खिलाड़ी हो गए
- टेस्ट और ODI में उनका रोल जस का तस है
यानी यह करियर डाउनग्रेड नहीं, बल्कि स्पेशलाइजेशन है।
क्या ‘वन कैप्टन फॉर ऑल फॉर्मेट’ प्लान फेल हो गया?
फिलहाल जवाब—हां।
गिल का मामला दिखाता है कि:
- तीनों फॉर्मेट अब अलग-अलग खेल हैं
- अलग स्किल सेट चाहिए
- और अलग माइंडसेट
एक ही कप्तान, एक ही स्टाइल—यह सोच अब पुरानी पड़ती दिख रही है।
गिल के लिए आगे का रास्ता
शुभमन गिल के लिए तस्वीर अब भी काफी पॉजिटिव है:
- टेस्ट कप्तान
- ODI कप्तान
- लॉन्ग टर्म लीडरशिप रोल
बस टी20 में, फिलहाल, दरवाज़ा बंद है। और शायद यह उनके ही भले में है।
क्योंकि हर खिलाड़ी को हर फॉर्मेट में जबरदस्ती फिट करना—सबसे बड़ा जोखिम होता है।
निष्कर्ष: हार नहीं, हकीकत
शुभमन गिल को टी20 से हटाया जाना कोई सज़ा नहीं है।
यह उस सच्चाई की स्वीकारोक्ति है कि:
- टी20 अब सिर्फ टैलेंट नहीं
- इम्पैक्ट का खेल है
गिल की कहानी खत्म नहीं हुई है।
बस एक चैप्टर फिलहाल बंद हुआ है।
और शायद, सही वक्त पर—सही फॉर्मेट में—वही गिल सबसे ज़्यादा खतरनाक साबित होंगे।
















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