BCCI – ड्रीम11 के हटने की खबर आई तो पहली प्रतिक्रिया यही थी—बीसीसीआई को झटका लगेगा। ऊपर से आईसीसी की कमाई में हिस्सेदारी घटने की बात भी सामने आई। लेकिन जब एपेक्स काउंसिल के सामने रखे गए ताज़ा वित्तीय आंकड़े खुले, तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकली।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) न सिर्फ स्थिर है, बल्कि पहले से ज़्यादा मजबूत दिख रहा है।
संक्षेप में कहें तो—एक स्पॉन्सर गया, लेकिन बोर्ड की तिजोरी खाली नहीं हुई।
ड्रीम11 गया, एडिडास और अपोलो आए
ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 के लागू होने के बाद ड्रीम11 को अपनी 358 करोड़ रुपये की जर्सी स्पॉन्सरशिप डील से पीछे हटना पड़ा। यह डील रियल-मनी गेमिंग पर लगे प्रतिबंध की वजह से टिक नहीं पाई।
लेकिन बीसीसीआई ने यहां कोई देरी नहीं की।
एपेक्स काउंसिल को सौंपे गए नोट के मुताबिक, बोर्ड ने:
- एडिडास के साथ एक नई और ज्यादा वैल्यूएशन वाली जर्सी स्पॉन्सरशिप डील की
- इसके बाद अपोलो टायर्स के साथ भी करार किया
क्रिकबज़ द्वारा देखे गए नोट में साफ लिखा है कि यह नई जर्सी डील अगले ढाई साल के लिए है और इसकी वैल्यू ड्रीम11 की डील से अधिक है। यानी नुकसान की भरपाई नहीं, बल्कि अपग्रेड।
आईसीसी शेयर में गिरावट, फिर भी चिंता क्यों नहीं?
बीसीसीआई को आईसीसी की कुल आय का 38.5 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। इस बार आईसीसी आयोजनों से कम कमाई के चलते बोर्ड की हिस्सेदारी में गिरावट आई है।
हालांकि, एपेक्स काउंसिल के नोट में यह नहीं बताया गया कि यह गिरावट कितनी है।
लेकिन असली कहानी यहां छुपी है—बीसीसीआई अब आईसीसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। उसकी घरेलू कमाई, मीडिया राइट्स और स्पॉन्सरशिप पोर्टफोलियो इतने मजबूत हो चुके हैं कि आईसीसी शेयर में हल्की गिरावट से सिस्टम नहीं हिलता।
आईसीसी और बीसीसीआई की आधिकारिक जानकारियां क्रमशः
पर उपलब्ध हैं।
FY 2025-26: 8,963 करोड़ रुपये की अनुमानित आय
पूर्व कोषाध्यक्ष और वर्तमान संयुक्त सचिव प्रभातेज सिंह भाटिया ने सितंबर में एपेक्स काउंसिल के सामने:
- FY 2024-25 के ऑडिटेड अकाउंट
- FY 2025-26 का ड्राफ्ट बजट
पेश किया।
FY 2025-26 के लिए बीसीसीआई की कुल अनुमानित आय 8,963 करोड़ रुपये रखी गई है।
यह आंकड़ा पिछले साल से थोड़ा कम है, लेकिन इसकी वजह साफ है—आईसीसी आयोजनों से कम रेवेन्यू। घरेलू मोर्चे पर बोर्ड की कमाई लगभग स्थिर बनी हुई है।
ब्याज से 1,500 करोड़: ट्रेजरी मैनेजमेंट की जीत
सबसे दिलचस्प आंकड़ा है ब्याज आय।
| वित्तीय वर्ष | ब्याज आय (₹ करोड़) |
|---|---|
| FY 2024-25 | 1,368 |
| FY 2025-26 (अनुमानित) | 1,500 |
यानी बिना कोई मैच खेले, बिना टिकट बेचे—बीसीसीआई सिर्फ अपने निवेशों से 1,500 करोड़ रुपये कमा रहा है।
नोट में साफ कहा गया है कि यह बढ़ोतरी:
- मजबूत ट्रेजरी मैनेजमेंट
- सतर्क निवेश रणनीति
- और स्वस्थ कैश रिज़र्व
का नतीजा है।
जनरल फंड में ऐतिहासिक उछाल
अब आते हैं उस नंबर पर जो बीसीसीआई की ताकत को सबसे अच्छे से दिखाता है।
बीसीसीआई का जनरल फंड:
- पहले: 7,988 करोड़ रुपये
- अब: 11,346 करोड़ रुपये
यानि सिर्फ एक साल में 3,358 करोड़ रुपये का सरप्लस।
FY 2024-25 में यह सरप्लस:
- बेहतर रेवेन्यू प्लानिंग
- कंट्रोल्ड खर्च
- और मजबूत स्पॉन्सरशिप
की वजह से आया।
यह आंकड़ा किसी भी खेल बोर्ड के लिए सपना होता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बरकरार
पैसा जमा करने के साथ-साथ बीसीसीआई खर्च भी रणनीतिक ढंग से कर रहा है।
ड्राफ्ट बजट में शामिल हैं:
- 6,728 करोड़ रुपये का अनुमानित सरप्लस
- 500 करोड़ रुपये क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडी के लिए
इसका मकसद साफ है—देशभर में स्टेडियम, अकादमी और ट्रेनिंग फैसिलिटी को बेहतर बनाना।
यह वही मॉडल है जिसने पिछले दशक में भारत को बेंच स्ट्रेंथ का पावरहाउस बनाया।
टैक्स, मुकदमे और आकस्मिक खर्च: सबका इंतजाम
बीसीसीआई ने भविष्य की देनदारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया है।
भाटिया के मुताबिक, बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं:
- 3,320 करोड़ रुपये – इनकम टैक्स देनदारियां
- 1,000 करोड़ रुपये – आकस्मिक खर्च
- 160 करोड़ रुपये (लगभग) – लंबित मुकदमेबाजी खर्च
यानी न सिर्फ आज का हिसाब साफ है, बल्कि कल के लिए भी कुशन मौजूद है।
क्या संकेत देता है यह पूरा डेटा?
सीधा सा जवाब—बीसीसीआई अब एक स्पॉन्सर या एक टूर्नामेंट पर निर्भर संस्था नहीं रही।
ड्रीम11 गया।
आईसीसी शेयर घटा।
फिर भी:
- जनरल फंड बढ़ा
- ब्याज आय बढ़ी
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जारी रहा
यह वही फर्क है जो एक “रिच बोर्ड” और एक “फाइनेंशियली स्मार्ट बोर्ड” में होता है।
पैसा नहीं, प्लानिंग बोल रही है
बीसीसीआई की कहानी अब सिर्फ क्रिकेट की नहीं रही। यह फाइनेंशियल गवर्नेंस की केस स्टडी बन चुकी है।
जहां बाकी बोर्ड्स स्पॉन्सर हटने से लड़खड़ा जाते हैं, वहां बीसीसीआई:
- वैकल्पिक डील करता है
- वैल्यू बढ़ाता है
- और सिस्टम को आगे बढ़ाता है
ड्रीम11 की विदाई शोर बन सकती थी।
लेकिन बीसीसीआई ने उसे बैकग्राउंड नॉइज़ बना दिया।















