World Cup – क्रिकेट में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ बयान नहीं देतीं—सिस्टम को झकझोर देती हैं। कृष्णमचारी श्रीकांत की ताज़ा टिप्पणी ठीक वैसी ही है।
भारत के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व चयन समिति अध्यक्ष ने खुलकर कहा है कि वैभव सूर्यवंशी को अब इंतज़ार में नहीं रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह वही पल है जब चयनकर्ताओं को जोखिम नहीं, भरोसा करना चाहिए।
और भरोसे की मिसाल के तौर पर श्रीकांत ने एक ही नाम लिया—सचिन तेंदुलकर।
“सचिन भी 16 की उम्र में खेले थे” – श्रीकांत का तर्क
श्रीकांत का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की उम्र को बहाना बनाना अब ठीक नहीं। उन्होंने साफ कहा कि अगर प्रतिभा तैयार दिख रही है, तो उम्र सिर्फ एक नंबर है।
उनके शब्दों में:
“सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में डेब्यू किया था। वैभव ने भी अपने से बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलकर दिखाया है कि वह किस मिट्टी का बना है। अब इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है।”
यह बयान सिर्फ तुलना नहीं था, बल्कि चयन नीति पर सीधा संदेश था।
टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड घोषित, फिर भी दरवाज़ा बंद नहीं?
टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का ऐलान हो चुका है। आम तौर पर यहां कहानी खत्म हो जाती है। लेकिन श्रीकांत इससे सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है:
- हां, देर हो चुकी है
- लेकिन चयनकर्ता चाहें तो अब भी फास्ट-ट्रैक एंट्री संभव है
- वाइट-बॉल क्रिकेट में ऐसा पहले भी हो चुका है
यानी श्रीकांत की नज़र में यह “अब या कभी नहीं” वाला पल है।
एज-ग्रुप से डोमेस्टिक तक: वैभव क्यों खास हैं?
श्रीकांत सिर्फ भावनात्मक बात नहीं कर रहे। उनके तर्क के पीछे वैभव का लगातार प्रदर्शन है।
उन्होंने कहा कि वैभव की सबसे बड़ी ताकत है:
- मजबूत तकनीक
- बड़े रन बनाने की भूख
- हर लेवल पर खुद को जल्दी ढालने की क्षमता
यही वजह है कि वह उम्र के बंधन से आगे निकलते दिखते हैं।
विजय हजारे ट्रॉफी में ऐतिहासिक पारी
वैभव सूर्यवंशी ने विजय हजारे ट्रॉफी में बिहार की ओर से खेलते हुए ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा।
वैभव सूर्यवंशी – ऐतिहासिक लिस्ट A पारी
| उपलब्धि | आंकड़ा |
|---|---|
| रन | 190 |
| गेंदें | 84 |
| शतक | 36 गेंद |
| रिकॉर्ड | लिस्ट A में सबसे कम उम्र में शतक |
यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि चयनकर्ताओं के लिए खुला संदेश थी—मैं तैयार हूं।
“हर जगह शतक, हर फॉर्मेट” – श्रीकांत का दावा
अपने यूट्यूब चैनल Cheeky Cheeka पर श्रीकांत ने काफी तीखे शब्दों में बात रखी।
उन्होंने कहा:
“वैभव हर जगह शतक जड़ रहा है। आईपीएल, अंडर-19, डोमेस्टिक—हर जगह। लोग कहेंगे कि ये अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ था, लेकिन ये अलग कहानी है। ये लड़का हर किसी को कूट रहा है।”
श्रीकांत ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पिछले साल ही वैभव को टी20 वर्ल्ड कप के लिए फास्ट-ट्रैक करने की बात कही थी।
चयनकर्ताओं की दुविधा: जोखिम या मौका?
भारतीय चयन प्रणाली अक्सर “परफेक्ट टाइम” का इंतज़ार करती है। लेकिन श्रीकांत का मानना है कि कुछ खिलाड़ियों के लिए वह समय खुद बनाना पड़ता है।
उनके अनुसार:
- ज्यादा इंतज़ार = आत्मविश्वास का नुकसान
- जल्दी मौका = जिम्मेदारी की भावना
- वाइट-बॉल क्रिकेट में प्रयोग की गुंजाइश
यही मॉडल सचिन के साथ अपनाया गया था, और इतिहास सबके सामने है।
क्या वैभव सच में रेडी हैं?
यह सबसे बड़ा सवाल है। जवाब पूरी तरह हां या ना में नहीं है, लेकिन संकेत साफ हैं।
- लगातार बड़े स्कोर
- उम्र से बड़ी मैच्योरिटी
- दबाव में खेलने की आदत
यही कारण है कि श्रीकांत जैसे अनुभवी क्रिकेट दिमाग इस खिलाड़ी को लेकर इतने मुखर हैं।
यह बहस सिर्फ वैभव की नहीं
श्रीकांत की बात सिर्फ वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है। यह भारतीय क्रिकेट के उस दर्शन पर सवाल है, जहां टैलेंट को कभी-कभी “और समय” की फाइल में डाल दिया जाता है।
वैभव सूर्यवंशी के मामले में सवाल सीधा है:
- अगर नहीं अब, तो कब?
- अगर नहीं ऐसे खिलाड़ी को, तो किसे?
श्रीकांत का संदेश साफ है—टैलेंट को रोको मत, रास्ता दो।
अब देखना यह है कि चयनकर्ता इस आवाज़ को सुनते हैं या नहीं।















