SMAT – झारखंड की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 की जीत बाहर से जितनी अचानक लगी, अंदर से उतनी ही योजनाबद्ध थी। ईशान किशन की कप्तानी, युवा खिलाड़ियों का जोश और सही वक्त पर सही फैसले—सब कुछ एक साथ क्लिक कर गया।
लेकिन अब जो परत खुली है, उसने इस ऐतिहासिक खिताब को और खास बना दिया है।
इस पूरी कहानी के पीछे एक नाम खामोशी से मौजूद था—महेंद्र सिंह धोनी।
मैदान पर नहीं, ड्रेसिंग रूम में नहीं, कैमरों के सामने भी नहीं। लेकिन रणनीति, सोच और दिशा—तीनों जगह धोनी की छाप थी।
पहली बार चैंपियन, और पहली बार ऐसा प्लान
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के इतिहास में झारखंड ने पहली बार खिताब जीता। फाइनल में हरियाणा जैसी मजबूत टीम को हराना आसान नहीं था, लेकिन झारखंड ने दबाव में जिस तरह का संयम दिखाया, वह किसी अनुभवी इंटरनेशनल टीम जैसा लगा।
यही वो बात है, जिसने बाद में सबको सोचने पर मजबूर किया—इतनी मैच्योरिटी अचानक कहां से आई?
शाहबाज नदीम का खुलासा: धोनी थे हर कदम पर साथ
इस सवाल का जवाब दिया भारत के पूर्व स्पिनर और झारखंड क्रिकेट से लंबे समय से जुड़े शाहबाज नदीम ने। ESPNcricinfo से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि इस ऐतिहासिक जीत की नींव एमएस धोनी ने ही रखी।
नदीम के शब्दों में:
“सीजन की शुरुआत से ही हम धोनी की सलाह लेते रहे। कोचिंग स्टाफ की नियुक्ति से लेकर खिलाड़ियों की भूमिका तय करने तक, उन्होंने पूरे टूर्नामेंट को बारीकी से देखा और लगातार हमसे चर्चा की।”
यह कोई औपचारिक बातचीत नहीं थी। धोनी हर मैच, हर खिलाड़ी और हर स्थिति पर नज़र रखे हुए थे।
हर खिलाड़ी का डेटा, हर कमजोरी की समझ
नदीम ने एक और अहम बात कही, जो धोनी को बाकी दिग्गजों से अलग बनाती है।
“धोनी झारखंड के हर डोमेस्टिक खिलाड़ी के आंकड़े जानते हैं। उनकी स्ट्रेंथ, उनकी वीकनेस—सब कुछ। और सबसे अहम बात, वह झारखंड क्रिकेट को आगे बढ़ाने में सच में दिलचस्पी रखते हैं।”
यही वजह है कि यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि सिस्टम की जीत बन गई।
JSCA की रीस्ट्रक्चरिंग में भी धोनी की भूमिका
शाहबाज नदीम, जो फिलहाल झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) के संयुक्त सचिव हैं, उन्होंने यह भी बताया कि धोनी ने सिर्फ टीम को नहीं, बल्कि पूरे झारखंड क्रिकेट स्ट्रक्चर को नया आकार देने में मदद की।
धोनी की सलाह साफ थी:
- बाहरी नामों से ज्यादा लोकल नॉलेज को तरजीह
- कोचिंग में स्थायित्व
- खिलाड़ियों के साथ लंबा विज़न
इसी सोच के तहत:
| पद | नियुक्ति |
|---|---|
| हेड कोच | रतन कुमार |
| बॉलिंग कोच | सन्नी गुप्ता |
ये फैसले चमकदार नहीं थे, लेकिन असरदार साबित हुए।
ईशान किशन की कप्तानी, धोनी की सोच
ईशान किशन इस टीम का चेहरा थे, कप्तान थे। लेकिन उनकी कप्तानी में जो ठहराव और स्पष्टता दिखी, वह कहीं न कहीं धोनी स्कूल ऑफ क्रिकेट की झलक लगती है।
- फील्ड प्लेसमेंट में धैर्य
- गेंदबाजों का सही इस्तेमाल
- दबाव में शांत फैसले
यह सब अचानक नहीं आता।
रिटायरमेंट के बाद भी असर बरकरार
महेंद्र सिंह धोनी ने 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ।
- आईपीएल में लगातार सक्रिय
- 2025 IPL में CSK की कप्तानी
- और अब—झारखंड क्रिकेट का मार्गदर्शन
धोनी आज भी भारत के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने ICC के तीनों बड़े खिताब जीते हैं:
- T20 वर्ल्ड कप
- ODI वर्ल्ड कप
- चैंपियंस ट्रॉफी
यही अनुभव अब वह अपने होम स्टेट को दे रहे हैं।
झारखंड के लिए यह जीत क्यों खास है?
यह ट्रॉफी सिर्फ एक सीजन की सफलता नहीं है। यह संकेत है कि:
- छोटे राज्यों से भी चैंपियन निकल सकते हैं
- सही मार्गदर्शन हो तो संसाधनों की कमी मायने नहीं रखती
- और जब धोनी जैसा दिमाग पीछे हो, तो दिशा भटकती नहीं
धोनी जहां होते हैं, सिस्टम मजबूत होता है
झारखंड की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीत को इतिहास में ईशान किशन की कप्तानी से जाना जाएगा। लेकिन अंदरखाने, क्रिकेट के जानकार हमेशा यह भी जानते रहेंगे कि—
इस जीत की नींव महेंद्र सिंह धोनी ने रखी थी।
बिना शोर, बिना क्रेडिट और बिना कैमरे के सामने आए।
ठीक वैसे ही, जैसे वह अपने करियर में करते आए हैं।



















