List A – डोमेस्टिक क्रिकेट में कभी-कभी ऐसे रिकॉर्ड बनते हैं जो सीधे अंतरराष्ट्रीय बहस को छू लेते हैं। विदर्भ के ध्रुव शौरी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।
विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में हैदराबाद के खिलाफ नाबाद 109 रन—और इसके साथ ही वनडे क्रिकेट के एक दुर्लभ वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी। लगातार पांच मैचों में पांच शतक। इससे पहले यह कारनामा सिर्फ एन जगदीशन के नाम था। अब इस क्लब में एक और भारतीय नाम जुड़ गया है।
पांच मैच, पांच शतक: रिकॉर्ड की कहानी
ध्रुव शौरी का यह सिलसिला अचानक नहीं शुरू हुआ। इसकी नींव पिछले सीजन में पड़ी थी। विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 के नॉकआउट स्टेज में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि विदर्भ को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
उनका शतक क्रम कुछ यूं रहा:
- क्वार्टर फाइनल – शतक
- सेमीफाइनल – शतक
- फाइनल – शतक
- विजय हजारे 2025-26, पहला मैच (बंगाल) – 136 रन
- विजय हजारे 2025-26, दूसरा मैच (हैदराबाद) – 109*
यानी लगातार पांच लिस्ट-A मैचों में शतक। यह सिर्फ फॉर्म नहीं, बल्कि असाधारण निरंतरता है।
एन जगदीशन के रिकॉर्ड की बराबरी
इससे पहले यह रिकॉर्ड तमिलनाडु के एन जगदीशन के नाम था, जिन्होंने डोमेस्टिक लिस्ट-A क्रिकेट में लगातार पांच शतक जड़े थे। अब ध्रुव शौरी ने उसी ऊंचाई को छू लिया है।
लिस्ट-A क्रिकेट में लगातार 5 शतक
| खिलाड़ी | देश/टीम | उपलब्धि |
|---|---|---|
| एन जगदीशन | तमिलनाडु | 5 लगातार शतक |
| ध्रुव शौरी | विदर्भ | 5 लगातार शतक |
वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार 4 शतकों का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, लेकिन लिस्ट-A क्रिकेट (डोमेस्टिक + अन्य वनडे) में 5 शतक अब तक सिर्फ दो ही खिलाड़ी लगा पाए हैं।
छठा शतक? इतिहास बस एक पारी दूर
अब असली रोमांच यहां से शुरू होता है। अगर ध्रुव शौरी अगले मैच में भी शतक जड़ देते हैं, तो वे दुनिया के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे, जिसने लिस्ट-A क्रिकेट में लगातार 6 मैचों में शतक लगाए हों।
यह रिकॉर्ड ऐसा होगा, जो शायद लंबे समय तक कोई न छू पाए।
पिछले सीजन भी विदर्भ के स्तंभ
विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 में ध्रुव शौरी:
- विदर्भ के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे
- पूरे टूर्नामेंट में टॉप-5 रन स्कोरर में शामिल रहे
- करुण नायर के साथ मिलकर टीम को फाइनल तक ले गए
यानी यह प्रदर्शन किसी एक सीजन की चमक नहीं है।
आईपीएल का छोटा सा अध्याय
ध्रुव शौरी का नाम आईपीएल से भी जुड़ा है, लेकिन कहानी बहुत छोटी रही।
- टीम: चेन्नई सुपर किंग्स
- सीजन: 2018 और 2019
- मैच: 2
- रन: 5 और 8
बस इतना ही। आईपीएल में उन्हें खुद को साबित करने का मौका नहीं मिला।
फिर भी टीम इंडिया से दूरी क्यों?
यहां सवाल स्वाभाविक है—इतना प्रदर्शन, फिर भी टीम इंडिया क्यों नहीं?
जवाब थोड़ा कड़वा है।
- भारत में वनडे बल्लेबाज़ी की प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी
- कई युवा खिलाड़ी इससे भी ज्यादा दमदार आंकड़ों के साथ बाहर बैठे हैं
- उम्र भी एक फैक्टर बन जाती है (ध्रुव शौरी 33 साल के हैं)
इसलिए फिलहाल राष्ट्रीय टीम की राह आसान नहीं दिखती।
लेकिन डोमेस्टिक क्रिकेट का सम्मान जरूरी
ध्रुव शौरी की यह उपलब्धि याद दिलाती है कि डोमेस्टिक क्रिकेट सिर्फ “स्टेप-अप” प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि रिकॉर्ड-मेकिंग स्टेज भी है। हर खिलाड़ी का सफर इंटरनेशनल कैप तक ही सीमित नहीं होता—कुछ खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट को ही ऊंचाई देते हैं।
नाम बड़ा नहीं, प्रदर्शन बोलता है
एन जगदीशन के बाद ध्रुव शौरी—दोनों ने यह साबित किया है कि निरंतरता, चाहे कहीं भी हो, असाधारण ही होती है। पांच मैचों में पांच शतक कोई संयोग नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और तकनीकी अनुशासन का नतीजा है।
अब निगाहें अगले मैच पर होंगी।
अगर छठा शतक आया—तो इतिहास सिर्फ बराबरी का नहीं, एकल स्वामित्व का होगा।















