Ashes – क्रिकेट के इतिहास में कुछ पिचें ऐसी होती हैं, जिनका ज़िक्र सालों तक मिसाल के तौर पर किया जाता है—लेकिन गलत वजहों से। एशेज 2025-26 अब उसी रास्ते पर जाती दिख रही है।
पहले पर्थ टेस्ट दो दिन में खत्म हुआ, और अब मेलबर्न का बॉक्सिंग डे टेस्ट। फर्क बस इतना है कि इस बार बात सिर्फ खराब नहीं, बल्कि बेहद घटिया टेस्ट विकेट की हो रही है।
पहले दिन ही 20 विकेट गिर जाएं, दोनों टीमें ऑलआउट हो जाएं, और कोई भी बल्लेबाज़ अर्धशतक तक न पहुंच पाए—तो सवाल पिच पर ही उठेंगे। और इस बार सवाल सिर्फ फैंस नहीं, बल्कि दिग्गज भी उठा रहे हैं।
मेलबर्न में पहले दिन आधा टेस्ट खत्म
26 दिसंबर, बॉक्सिंग डे टेस्ट।
MCG, रिकॉर्ड भीड़, एशेज का दबाव—सब कुछ मौजूद था। लेकिन क्रिकेट? वो पहले दिन ही आधा खत्म हो गया।
- ऑस्ट्रेलिया पहली पारी – 152 रन
- इंग्लैंड पहली पारी – 110 रन
- पहले दिन कुल विकेट – 20
दिन खत्म होते-होते ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 4 रन बिना नुकसान के बना लिए, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था—टेस्ट क्रिकेट की विश्वसनीयता को।
“यह अच्छा टेस्ट विकेट नहीं था” – एलेस्टेयर कुक
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलेस्टेयर कुक ने वो कह दिया, जो कई लोग सोच रहे थे। TNT Sports पर बोलते हुए कुक ने साफ शब्दों में इस पिच को कटघरे में खड़ा किया।
उनके मुताबिक:
“यह एक अच्छा टेस्ट विकेट नहीं था। यह मुकाबला थोड़ा अनुचित था। अगर यह पिच दूसरे, तीसरे या चौथे दिन फ्लैट भी हो जाए, तब भी गेंदबाज़ों को ही मदद मिलेगी। विकेट लेने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।”
यानी कुक के हिसाब से यह सिर्फ शुरुआती स्विंग या सीम का मामला नहीं था—यह डिज़ाइन की गई असंतुलन वाली पिच थी।
बल्लेबाज़ों की गलती? हां… लेकिन पूरी नहीं
कुक ने बल्लेबाज़ों को पूरी तरह क्लीन चिट भी नहीं दी, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि इस विकेट पर बचना ही मुश्किल था।
“क्या दोनों टीमें थोड़ा बेहतर बल्लेबाज़ी कर सकती थीं? हां। लेकिन जब आप सही एरिया में गेंद डालते हैं और वह किसी भी तरफ उछल सकती है, तो यह अनफेयर मुकाबला बन जाता है।”
यही असली मुद्दा है—अनियमित उछाल।
यह न तो स्किल की परीक्षा थी, न ही धैर्य की। यह किस्मत का खेल बन गया।
1901-02 के बाद पहली बार ऐसा शर्मनाक आंकड़ा
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड जैसे ऐतिहासिक मैदान पर एशेज टेस्ट के पहले दिन 20 या उससे ज्यादा विकेट आखिरी बार 1901-02 में गिरे थे। तब पहले दिन 25 विकेट गिरे थे।
यानी 123 साल बाद MCG फिर उसी सूची में पहुंच गया।
और इस बार, मॉडर्न क्रिकेट, बेहतर ड्रेनेज, बेहतर क्यूरेशन—सब होने के बावजूद।
पर्थ से मेलबर्न तक: खराब पिचों की सीरीज़
यह कोई एक मैच की कहानी नहीं है।
- पर्थ टेस्ट –
- सिर्फ 2 दिन में खत्म
- पहले दिन 19 विकेट
- मेलबर्न टेस्ट –
- पहले दिन 20 विकेट
- दोनों टीमें ऑलआउट
यह अब ट्रेंड बनता जा रहा है, और यही चिंता की बात है।
ICC की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
अब असली बहस यहां आकर टिकती है।
अगर:
- भारत
- श्रीलंका
- बांग्लादेश
में ऐसी पिच होती, तो:
- “पिच डॉक्टरिंग”
- “स्पिन ट्रैक”
- “अनफिट विकेट”
जैसे शब्द हेडलाइन बनते।
लेकिन ऑस्ट्रेलिया में?
संभावना है कि इस पिच को:
- Satisfactory
या - Very Good
रेटिंग मिल जाए।
क्योंकि इतिहास गवाह है—एशियाई पिचों के लिए नियम अलग, ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के लिए अलग।
टेस्ट क्रिकेट में क्या सिर्फ गेंदबाज़ों का खेल चाहिए?
टेस्ट क्रिकेट का असली मज़ा तब आता है जब:
- गेंदबाज़ मेहनत करें
- बल्लेबाज़ टिकें
- और विकेट लेने के लिए रणनीति चाहिए हो
यहां?
- सही एरिया में डालो
- गेंद खुद काम कर दे
यह टेस्ट क्रिकेट नहीं, लॉटरी सिस्टम बन जाता है।
नाम बड़ा है, इसलिए सवाल दब जाएंगे?
MCG का नाम बड़ा है।
बॉक्सिंग डे टेस्ट की परंपरा बड़ी है।
एशेज की विरासत बड़ी है।
शायद इसी वजह से यह पिच भी बच निकलेगी।
लेकिन सच यही है—
एशेज 2025-26 की पिचें टेस्ट क्रिकेट के स्तर पर एक दाग छोड़ रही हैं।
और जब क्रिकेट इतिहास लिखा जाएगा, तो यह सीरीज़ “महान मुकाबलों” के लिए नहीं, बल्कि घटिया विकेटों के लिए याद की जा सकती है।















