MCG : 2020 से 2025 तक जॉनी मुलघ मेडल की कहानी – क्यों खास है जॉनी मुलघ मेडल

Atul Kumar
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MCG – मेलबर्न का बॉक्सिंग डे टेस्ट सिर्फ क्रिकेट नहीं होता, वह परंपरा होता है। सफेद कपड़ों में इतिहास, ठंडी हवा में शोर और एक ऐसा अवॉर्ड, जो अब इस टेस्ट की पहचान बन चुका है—जॉनी मुलघ मेडल। हर साल इस मैच का प्लेयर ऑफ द मैच सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं जीतता, बल्कि एमसीजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराता है।

यह मेडल नया है, लेकिन इसकी अहमियत बहुत बड़ी हो चुकी है। साल 2020 से शुरू हुए इस सम्मान ने अब तक सिर्फ 5 खिलाड़ियों को चुना है—और उनमें से एक नाम भारत से भी है।

जॉनी मुलघ मेडल: परंपरा की शुरुआत

जॉनी मुलघ मेडल की शुरुआत 2020 में हुई थी। यह सम्मान पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर जॉनी मुलघ की याद में शुरू किया गया, जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में अहम योगदान दिया था।

नियम साफ है—
एमसीजी में खेले गए बॉक्सिंग डे टेस्ट का प्लेयर ऑफ द मैच = जॉनी मुलघ मेडल।

अब तक कुल 6 मेडल दिए जा चुके हैं, लेकिन विजेता सिर्फ 5 खिलाड़ी हैं। वजह? एक खिलाड़ी ने इसे दो बार जीता है।

पहला नाम, पहला मेडल: अजिंक्य रहाणे

इतिहास का पहला जॉनी मुलघ मेडल भारत के नाम दर्ज हुआ।

2020 – अजिंक्य रहाणे

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट।
टीम इंडिया दबाव में थी, कप्तान कोहली स्वदेश लौट चुके थे। और तभी रहाणे ने एमसीजी में शानदार शतक जड़ा।

  • भारत की ऐतिहासिक जीत
  • रहाणे का यादगार शतक
  • और पहला जॉनी मुलघ मेडल

आज भी यह मेडल इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसकी शुरुआत एक विदेशी खिलाड़ी—वो भी भारतीय—से हुई।

2021: स्कॉट बोलैंड का कहर

2021 – स्कॉट बोलैंड

मेलबर्न में जब इंग्लैंड बल्लेबाज़ी करने उतरा, तो स्कॉट बोलैंड उनके लिए एक पहेली बन गए।

  • पहली पारी – 1 विकेट
  • दूसरी पारी – 6 विकेट
  • कुल – 7 विकेट

ऑस्ट्रेलिया की एकतरफा जीत में बोलैंड की भूमिका निर्णायक रही। इसी प्रदर्शन के दम पर वह जॉनी मुलघ मेडल जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी बने।

2022: डेविड वॉर्नर का डबल धमाका

2022 – डेविड वॉर्नर

साउथ अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में वॉर्नर ने एमसीजी को अपना घर बना लिया।

  • शानदार दोहरा शतक
  • क्लासिक वॉर्नर स्टाइल
  • रिकॉर्ड तोड़ पारी

इस पारी ने उन्हें जॉनी मुलघ मेडल का तीसरा विजेता बना दिया।

2023 और 2024: पैट कमिंस का एकछत्र राज

अब आते हैं उस खिलाड़ी पर, जिसने इस मेडल को दो बार जीता—और ऐसा करने वाला इकलौता क्रिकेटर है।

2023 – पाकिस्तान के खिलाफ

  • दोनों पारियों में 5-5 विकेट
  • कुल 10 विकेट
  • मैच पूरी तरह कमिंस के नाम

2024 – भारत के खिलाफ

  • पहली पारी – 40+ रन, 3 विकेट
  • दूसरी पारी – 40+ रन, 3 विकेट
  • ऑलराउंड परफॉर्मेंस

पैट कमिंस ने साबित किया कि यह मेडल सिर्फ बल्लेबाज़ों का नहीं, बल्कि मैच विनर का होता है।

2025: जोश टंग, नई एंट्री

सबसे नया नाम है—जोश टंग।

ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड बॉक्सिंग डे टेस्ट में, जब इंग्लैंड ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तो उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ टंग का था।

  • पहली पारी – 5 विकेट
  • दूसरी पारी – 2 विकेट
  • कुल – 7 विकेट

ऑस्ट्रेलिया को एमसीजी में हराना आसान नहीं होता। टंग ने वही कर दिखाया और बने पांचवें खिलाड़ी, जिन्होंने जॉनी मुलघ मेडल जीता।

अब तक के जॉनी मुलघ मेडल विजेता

सालखिलाड़ीदेशप्रदर्शन की झलक
2020अजिंक्य रहाणेभारतशतक, ऐतिहासिक जीत
2021स्कॉट बोलैंडऑस्ट्रेलिया7 विकेट
2022डेविड वॉर्नरऑस्ट्रेलियादोहरा शतक
2023पैट कमिंसऑस्ट्रेलिया10 विकेट
2024पैट कमिंसऑस्ट्रेलियाऑलराउंड प्रदर्शन
2025जोश टंगइंग्लैंड7 विकेट

क्यों खास है यह मेडल?

क्योंकि:

  • यह सिर्फ एमसीजी से जुड़ा है
  • यह सिर्फ बॉक्सिंग डे टेस्ट में मिलता है
  • और यह सिर्फ मैच विनर को मिलता है

यह मेडल आंकड़ों से ज़्यादा इम्पैक्ट को पहचानता है।

इतिहास छोटा है, लेकिन वज़नदार

जॉनी मुलघ मेडल भले ही सिर्फ 6 साल पुराना हो, लेकिन जिन नामों ने इसे जीता है, वे अपने-आप में टेस्ट क्रिकेट के बड़े अध्याय हैं।

अजिंक्य रहाणे से लेकर पैट कमिंस और अब जोश टंग तक—
हर मेडल एक कहानी है।
और हर कहानी एमसीजी की ठंडी हवा में गूंजती है।

बॉक्सिंग डे टेस्ट आएगा, खिलाड़ी बदलेंगे—
लेकिन जॉनी मुलघ मेडल अब इस टेस्ट की आत्मा बन चुका है।

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