Shami – चयन सूची आई, नाम पढ़े गए, और फिर एक खाली जगह ने सबसे ज़्यादा शोर मचाया। न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए चुनी गई भारतीय टीम में मोहम्मद शमी नहीं हैं। एक बार फिर। और इस बार सवाल पहले से ज़्यादा भारी है—क्या यह सिर्फ रोटेशन है, या वाकई भारतीय क्रिकेट अपने सबसे भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ों में से एक से आगे बढ़ चुका है?
क्योंकि यह कहानी सिर्फ एक सीरीज़ की नहीं है। यह लगातार छूटते मौके, अनसुने प्रदर्शन और बदलती प्राथमिकताओं की कहानी है।
घरेलू क्रिकेट में शमी का जवाब: आंकड़े बोलते हैं
अगर चयन सिर्फ फॉर्म पर होता, तो मोहम्मद शमी का नाम सबसे ऊपर होना चाहिए था। चोट से वापसी के बाद उन्होंने बंगाल के लिए तीनों फॉर्मेट में लगातार विकेट निकाले हैं—बिना किसी शोर के, बिना किसी बयानबाज़ी के।
2025–26 के घरेलू सीज़न पर एक नज़र डालिए—
| टूर्नामेंट | मैच | विकेट | औसत |
|---|---|---|---|
| रणजी ट्रॉफी | 4 | 20 | 18.60 |
| सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी | 7 | 16 | 14.93 |
| विजय हजारे ट्रॉफी | 5 | 11 | — |
| कुल | 16 | 47 | — |
रणजी में नई गेंद से धार,
टी20 में डेथ ओवर्स की सटीकता,
और वनडे में लीड पेसर की भूमिका—
शमी ने हर बॉक्स टिक किया है।
फिर भी चयन नहीं—तो वजह क्या है?
यहीं से कहानी उलझती है।
शमी फिट हैं।
मैच खेल रहे हैं।
विकेट ले रहे हैं।
फिर भी चयनकर्ता बार-बार उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। इसका सीधा संकेत यही है कि शमी अब टीम इंडिया की फ्यूचर प्लानिंग का हिस्सा नहीं हैं—कम से कम वनडे और टी20 में।
चयनकर्ताओं का झुकाव अब साफ दिखता है—
- जसप्रीत बुमराह (वर्कलोड मैनेजमेंट)
- मोहम्मद सिराज (कंडीशंस-बेस्ड विकल्प)
- अर्शदीप सिंह (लेफ्ट-आर्म वैरायटी)
- युवा पेसर्स (लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट)
इस भीड़ में 30+ उम्र का, क्लासिकल फास्ट बॉलर शायद फिट नहीं बैठ रहा।
आख़िरी इंटरनेशनल मैच: वही पुराना दिन
मोहम्मद शमी ने भारत के लिए आख़िरी बार न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल खेला था।
9 ओवर, 74 रन, 1 विकेट।
वह कोई यादगार दिन नहीं था।
लेकिन क्या एक मैच किसी करियर की दिशा तय कर सकता है?
उसके बाद से शमी इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर हैं—हालांकि घरेलू मैदानों पर पूरी तरह सक्रिय।
करियर जिसे यूं ही नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
यह वही मोहम्मद शमी हैं जिन्होंने—
- टेस्ट: 64 मैच, 229 विकेट
- वनडे: 108 मैच, 206 विकेट
- टी20I: 25 मैच, 27 विकेट
खासकर वनडे क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट और नई गेंद से विकेट निकालने की क्षमता भारत के लिए सालों तक गेम-चेंजर रही है।
चयनकर्ताओं और शमी के बीच गैप
क्रिकेट गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि शमी और टीम मैनेजमेंट के बीच कम्युनिकेशन गैप है।
कोई साफ संकेत नहीं।
कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं।
खिलाड़ी खेलता जा रहा है, विकेट लेता जा रहा है—और इंतज़ार करता जा रहा है।
और शायद शमी उस खांचे में फिट नहीं बैठ रहे।
क्या टेस्ट क्रिकेट ही आख़िरी रास्ता है?
एक संभावना अब भी खुली है—टेस्ट क्रिकेट।
लाल गेंद, लंबी स्पेल, सीम मूवमेंट—यह शमी का नैचुरल टेरिटरी है। अगर कहीं उनकी वापसी हो सकती है, तो वहीं।
लेकिन वनडे और टी20 के संदर्भ में तस्वीर लगभग साफ दिखने लगी है।
चुपचाप खत्म होता एक दौर?
मोहम्मद शमी का करियर किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खत्म नहीं हो रहा।
कोई फेयरवेल मैच नहीं।
कोई आख़िरी ओवर नहीं।
बस—टीम लिस्ट में नाम नहीं आ रहा।
घरेलू क्रिकेट में 47 विकेट लेने के बाद भी अगर दरवाज़ा नहीं खुलता, तो यह मान लेना गलत नहीं होगा कि भारतीय क्रिकेट अब आगे बढ़ चुका है।
शमी खेलते रहेंगे।
विकेट लेते रहेंगे।
लेकिन शायद… बाहर से।















