ECB – ऑस्ट्रेलिया में एशेज की आखिरी गेंद फेंकी गई, स्कोरकार्ड बंद हुआ और इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा पसर गया। 1-4 की करारी हार सिर्फ एक सीरीज़ का नतीजा नहीं थी—यह इंग्लैंड क्रिकेट के मौजूदा रोडमैप पर बड़ा सवालिया निशान भी छोड़ गई।
अब वही सवाल आधिकारिक रूप से उठाया जा चुका है। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने साफ कर दिया है कि एशेज में मिली हार के बाद खिलाड़ियों से लेकर मैनेजमेंट तक, हर स्तर पर गहन समीक्षा होगी।
एशेज हार के बाद ECB का सख्त रुख
पांचवें टेस्ट में पांच विकेट से हार के कुछ ही घंटों बाद ECB के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड गोल्ड का बयान सामने आया। शब्द संयमित थे, लेकिन संदेश साफ—अब सब कुछ पहले जैसा नहीं चलेगा।
गोल्ड ने कहा कि आने वाले महीनों में “जरूरी बदलाव” किए जाएंगे। यह कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि इंग्लैंड क्रिकेट की दिशा को लेकर एक चेतावनी थी।
मैकुलम-स्टोक्स युग पर भी नज़र
ECB की समीक्षा सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी।
मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम और क्रिकेट निदेशक रॉब की की रणनीति, योजना और तैयारी—सब कुछ जांच के दायरे में होगा।
गोल्ड ने स्पष्ट किया कि यह देखा जाएगा:
- क्या टीम की तैयारी ऑस्ट्रेलियाई हालात के मुताबिक थी?
- क्या रणनीति पूरे मैच में एक जैसी रही?
- और क्या “Bazball” एप्रोच हर परिस्थिति में कारगर साबित हो रही है?
“टुकड़ों में अच्छा खेले, लेकिन काफी नहीं था”
रिचर्ड गोल्ड का बयान भावनात्मक कम और यथार्थवादी ज्यादा था।
उन्होंने माना कि इंग्लैंड ने सीरीज़ में कुछ अच्छे पल जरूर दिखाए, लेकिन निरंतरता पूरी तरह गायब रही।
उनके शब्दों में,
“यह एशेज दौरा बड़ी उम्मीदों और उत्साह के साथ शुरू हुआ था। यह बेहद निराशाजनक है कि हम अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए। हमने सिर्फ टुकड़ों में अच्छा क्रिकेट खेला।”
यही “टुकड़े-टुकड़े” वाला प्रदर्शन इंग्लैंड की सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा।
खिलाड़ियों के प्रदर्शन और व्यवहार की भी जांच
ECB की समीक्षा सिर्फ रन और विकेट तक सीमित नहीं रहेगी।
खिलाड़ियों के व्यवहार, मैदान पर रवैये और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता को भी परखा जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया जैसे हालात—तेज पिचें, आक्रामक गेंदबाज़ी और लगातार मानसिक दबाव—इन सबके सामने इंग्लैंड कई बार असहज दिखा।
यही बात अब बोर्ड के रडार पर है।
एशेज 2025-26: कहां चूकी इंग्लैंड?
अगर पूरी सीरीज़ को देखा जाए, तो कुछ बुनियादी सवाल उभरते हैं:
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| टॉप ऑर्डर | लगातार अस्थिर |
| स्पिन विकल्प | प्रभावहीन |
| तेज़ गेंदबाज़ी | ओवरवर्क और थकान |
| फील्डिंग | मौके गंवाए |
| रणनीति | मैच दर मैच बदली |
टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी पर असर?
ECB की चिंता सिर्फ टेस्ट क्रिकेट तक सीमित नहीं है।
इंग्लैंड टीम अगले महीने भारत और श्रीलंका में होने वाले टी20 विश्व कप की तैयारी में जुटने वाली है।
रिचर्ड गोल्ड ने साफ किया कि सुधार की प्रक्रिया में देरी नहीं की जाएगी, क्योंकि आईसीसी इवेंट्स में वक्त बहुत कम है।
Bazball बनाम परिस्थितियां
ब्रेंडन मैकुलम की आक्रामक सोच ने इंग्लैंड को पिछले दो सालों में नई पहचान दी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में यह सवाल बार-बार उठा—
क्या हर पिच पर वही एप्रोच काम करेगी?
एशेज में कई मौकों पर इंग्लैंड ने आक्रामकता के चक्कर में विकेट गंवाए।
अब ECB यही जानना चाहता है कि यह साहस था या रणनीतिक ज़िद।
आगे क्या बदल सकता है?
ECB ने अभी किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है, लेकिन संकेत साफ हैं।
आने वाले महीनों में संभव बदलाव:
- टीम चयन नीति में बदलाव
- सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका पर पुनर्विचार
- विदेशी दौरों के लिए अलग तैयारी मॉडल
- मानसिक कंडीशनिंग और परिस्थितियों पर फोकस
यह बदलाव सिर्फ हार की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की योजना का हिस्सा माने जा रहे हैं।
हार से सबक या एक और दौर?
एशेज में 1-4 की हार इंग्लैंड क्रिकेट के लिए झटका जरूर है, लेकिन यह आखिरी कहानी नहीं।
ECB का रिव्यू यह तय करेगा कि यह हार एक टर्निंग पॉइंट बनती है या बस एक और असफल दौरा बनकर रह जाती है।
अब असली परीक्षा बोर्ड के फैसलों की होगी—
क्योंकि शब्दों से ज़्यादा मायने, अमल का होता है।















