Mumbai : जयपुर में रोमांचक मुकाबला – पंजाब ने छीनी जीत मार्कंडे ने पलटा मैच

Atul Kumar
Published On:
Mumbai

Mumbai – जयपुर की शाम कुछ और कहानी लिखने को तैयार थी। स्कोरबोर्ड पर नंबर बदल रहे थे, स्टैंड्स में शोर बढ़ रहा था और मुंबई के डगआउट में भरोसा साफ दिख रहा था।

विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में मुंबई बनाम पंजाब मुकाबला लगभग एकतरफा लगता जा रहा था—लेकिन क्रिकेट को अगर किसी एक चीज़ के लिए जाना जाता है, तो वह है आखिरी पल का पलटवार। गुरुवार, 8 जनवरी को जयपुरिया विद्यालय मैदान पर वही हुआ।

पंजाब ने मुंबई को 1 रन से हराकर सबको चौंका दिया, और सरफराज खान की ऐतिहासिक पारी भी जीत की गारंटी नहीं बन पाई।

मैच का संदर्भ: जहां सब कुछ बदल गया

यह मुकाबला सिर्फ अंक तालिका का नहीं था। मुंबई की बल्लेबाजी लाइन-अप में श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे जैसे नाम थे, जबकि पंजाब के पास जज़्बा और अनुशासन। टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी पंजाब की टीम को शुरुआती झटके लगे, लेकिन मैच की असली कहानी बाद में लिखी गई।

पंजाब की लड़खड़ाती शुरुआत

पंजाब की पारी की शुरुआत वैसी नहीं थी, जैसी वे चाहते थे।
सलामी बल्लेबाज—

  • अभिषेक शर्मा
  • प्रभसिमरन सिंह

दोनों ही सस्ते में पवेलियन लौट गए। जो खिलाड़ी इस सीज़न पंजाब के लिए मजबूत शुरुआत दिला रहे थे, वही इस बार फेल हो गए। शुरुआती ओवरों में मुंबई के गेंदबाज पूरी तरह हावी दिखे।

मिडिल ऑर्डर ने संभाली पारी

इसके बाद पंजाब के लिए मोर्चा संभाला मिडिल ऑर्डर ने।
रमनदीप सिंह ने 72 रनों की ठोस पारी खेली, जबकि अनमोलप्रीत सिंह ने 57 रन जोड़कर स्कोरबोर्ड को गति दी।

दोनों ने मिलकर पंजाब को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया। हालांकि टीम पूरे 50 ओवर नहीं खेल पाई और 216 रन पर सिमट गई।
स्कोर ऐसा था, जिसे चेज़ किया जा सकता था—और मुंबई ने यही सोचकर मैदान संभाला।

मुंबई की सधी शुरुआत

217 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई को बिल्कुल वैसी शुरुआत मिली, जैसी कप्तान चाहेंगे।
अंगक्रिश रघुवंशी और मुशीर खान ने पहले विकेट के लिए 8.2 ओवर में 57 रन जोड़े।

पिच आसान लग रही थी, रन आ रहे थे और पंजाब के गेंदबाज लय ढूंढते नज़र आ रहे थे।

सरफराज खान की एंट्री और मैच में आग

नंबर-3 पर सरफराज खान आए—और यहीं से मैच का टेंपरेचर अचानक बढ़ गया।
पंजाब के कप्तान अभिषेक शर्मा का 10वां ओवर निर्णायक साबित हुआ।

6, 4, 6, 4, 6, 4
एक ओवर में 30 रन

स्टेडियम में सन्नाटा और डगआउट में बेचैनी।

15 गेंदों में फिफ्टी: इतिहास रच गया

सरफराज खान ने सिर्फ 15 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया—
जो कि लिस्ट-ए क्रिकेट में किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे तेज़ अर्धशतक है।

उन्होंने अपनी पारी का अंत 20 गेंदों में 62 रन पर किया, जिसमें
7 चौके और 5 छक्के शामिल थे।

139/3 और जीत का भरोसा

जब सरफराज आउट हुए, उस वक्त मुंबई का स्कोर था—
14.4 ओवर में 139 रन, 3 विकेट के नुकसान पर।

ड्रेसिंग रूम में श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे मौजूद थे।
रन ज्यादा नहीं बचे थे, विकेट हाथ में थे—हर संकेत मुंबई की जीत की ओर इशारा कर रहा था।

201 पर टूटा संतुलन

लेकिन क्रिकेट अक्सर वहीं पलटता है, जहां सब कुछ आसान लगता है।
201 के स्कोर पर श्रेयस अय्यर के रूप में मुंबई को छठा झटका लगा—और यहीं से कहानी बदल गई।

पंजाब के गेंदबाजों ने लाइन-लेंथ में सटीकता दिखाई, दबाव बनाया और मौके भुनाए।

मयंक मार्कंडे का निर्णायक स्पेल

पंजाब के लिए मयंक मार्कंडे ने आखिरी ओवरों में कमाल कर दिया।
उन्होंने बैक-टू-बैक विकेट लेकर मुंबई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

नतीजा—
मुंबई की पूरी टीम 215 रन पर ढेर।
पंजाब ने यह मुकाबला 1 रन से जीत लिया।

जब रिकॉर्ड भी हार नहीं बचा सका

यह मैच सरफराज खान के लिए निजी तौर पर ऐतिहासिक रहा, लेकिन टीम के लिहाज से अधूरा।
उनकी पारी ने मैच को एकतरफा बना दिया था, लेकिन टीम का सामूहिक फिनिश उतना मजबूत नहीं रहा।

क्रिकेट की क्रूर सच्चाई

जयपुर में खेला गया यह मुकाबला याद दिलाता है कि क्रिकेट सिर्फ सितारों से नहीं जीता जाता।
रिकॉर्ड, छक्के और तालियां—सब अपनी जगह हैं, लेकिन आखिरी 5 ओवर ही फैसला करते हैं।

सरफराज खान ने इतिहास रचा,
पंजाब ने मैच चुरा लिया—
और मुंबई को एक ऐसी हार मिली, जो लंबे वक्त तक याद रहेगी।

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