Pandya – निरंजन शाह स्टेडियम की फ्लडलाइट्स के नीचे गुरुवार की शाम कुछ खास होने वाली थी—इसके संकेत हार्दिक पांड्या ने मैदान पर उतरते ही दे दिए थे। बड़ौदा मुश्किल में थी, स्कोरबोर्ड दबाव में था और सामने गेंदबाज़ आत्मविश्वास से भरे हुए।
लेकिन फिर हार्दिक ने वही किया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं—मैच का टेंपरेचर पल भर में बदल दिया। विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में चंडीगढ़ के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 31 गेंदों में 75 रन ठोककर एक बार फिर साबित किया कि घरेलू क्रिकेट उनके लिए सिर्फ तैयारी नहीं, बल्कि बयान देने का मंच है।
31 गेंदों का तूफान: हार्दिक पांड्या शो
हार्दिक पांड्या जब बल्लेबाज़ी करने आए, तब बड़ौदा का स्कोर 123/4 था। भाई क्रुणाल पांड्या के आउट होते ही जिम्मेदारी सीधे उनके कंधों पर आ गई। लेकिन जिम्मेदारी और दबाव—हार्दिक के लिए ये शब्द सिर्फ शब्द हैं।
पहली पांच गेंदें।
तीन छक्के।
मैसेज साफ।
उन्होंने महज 19 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। स्ट्राइक रेट रहा 241.94—जो लिस्ट-ए क्रिकेट में किसी टी20 फिनिशर की याद दिला देता है, न कि 50 ओवर के मैच की।
एक ओवर, 27 रन और गेंदबाज़ों की परीक्षा
चंडीगढ़ के गेंदबाज़ तरणप्रीत सिंह का एक ओवर हार्दिक के लिए फ्री-हिट जैसा साबित हुआ।
एक ओवर में 27 रन—और मैच पूरी तरह बड़ौदा के पक्ष में झुक गया।
निशुंक बिरला भी नहीं बच सके। उनके ओवर में हार्दिक ने तीन छक्के जड़ दिए। हर शॉट में वही पुरानी आक्रामकता, वही आत्मविश्वास—जिसने उन्हें भारत का एक्स-फैक्टर बनाया है।
बड़ौदा का 391 रन का पहाड़
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी बड़ौदा की शुरुआत खराब रही थी।
11 रन पर दो विकेट गिर चुके थे—
- नित्य पंड्या – 2
- अमित हरिराम पासी – 5
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने स्कोरबोर्ड को पूरी तरह पलट दिया।
प्रियांशु मोलिया और विष्णु सोलंकी की नींव
तीसरे विकेट के लिए प्रियांशु मोलिया और विष्णु सोलंकी ने पारी संभाली।
दोनों ने मिलकर 80 रन जोड़े।
विष्णु सोलंकी ने 49 गेंदों में 54 रन बनाए (8 चौके), जबकि मोलिया ने एक छोर थामे रखा।
कप्तान क्रुणाल का संक्षिप्त योगदान
कप्तान क्रुणाल पांड्या से बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह सिर्फ 20 रन बनाकर आउट हो गए।
यहीं से लगा कि बड़ौदा को किसी बड़े हाथ की ज़रूरत है—और वह हाथ हार्दिक का था।
हार्दिक–मोलिया साझेदारी: मैच का टर्निंग पॉइंट
हार्दिक पांड्या और प्रियांशु मोलिया ने पांचवें विकेट के लिए 90 रन जोड़े।
एक तरफ मोलिया टिके रहे, दूसरी तरफ हार्दिक हर गेंद को स्टैंड्स में भेजते रहे।
हार्दिक की पारी—
- 31 गेंद
- 75 रन
- 9 छक्के
- 2 चौके
उन्हें 30वें ओवर में जगजीत सिंह ने आउट किया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
जितेश शर्मा ने भी नहीं छोड़ी कसर
हार्दिक के बाद आए जितेश शर्मा ने भी गेंदबाज़ों की जमकर खबर ली।
उन्होंने सिर्फ 33 गेंदों में 73 रन ठोके—
- 8 चौके
- 4 छक्के
रन रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
प्रियांशु मोलिया का शतक
46वें ओवर में सातवें विकेट के रूप में प्रियांशु मोलिया आउट हुए।
उन्होंने 106 गेंदों में 113 रन बनाए—
- 10 चौके
- 1 छक्का
उनकी यह पारी पूरी पारी की रीढ़ साबित हुई।
391 पर खत्म हुई बड़ौदा की पारी
अंत में बड़ौदा ने पूरे 50 ओवर में 391 रन ठोक दिए।
राज लिंबानी 50वें ओवर की पहली गेंद पर आउट हुए और पारी का अंत हुआ।
दो मैच, 20 छक्के और साफ संदेश
यह प्रदर्शन कोई एक दिन की कहानी नहीं है।
हार्दिक पांड्या इससे पहले विदर्भ के खिलाफ 133 रन की पारी खेल चुके हैं—जो उनका पहला लिस्ट-ए शतक था।
दो मैचों में—
20 छक्के।
घरेलू क्रिकेट में भी हार्दिक का दबदबा
हार्दिक पांड्या का यह प्रदर्शन बताता है कि वह घरेलू क्रिकेट को हल्के में नहीं ले रहे।
विजय हजारे ट्रॉफी में उनकी पारियां चयनकर्ताओं के लिए सीधा संकेत हैं—
फॉर्म है।
फिटनेस है।
और वही पुरानी मारक क्षमता भी।
अब सवाल सिर्फ एक है—
क्या यह लय इंटरनेशनल क्रिकेट में भी जल्द दिखेगी?















