ODI – वडोदरा एयरपोर्ट की भीड़ अभी शांत भी नहीं हुई थी कि विराट कोहली एक बार फिर सुर्खियों के बीच आ गए। फर्क बस इतना है—इस बार चर्चा बल्ले से ज़्यादा, उनके टेस्ट संन्यास पर है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए शहर पहुंचे विराट कोहली को लेकर बहस फिर तेज़ हो गई है, और इसकी वजह बने हैं भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर।
मांजरेकर के बयान ने ऐसा तूल पकड़ा कि विराट के भाई विकास कोहली खुद मैदान में उतर आए—और आलोचकों को सीधा, सख्त जवाब दे डाला।
टेस्ट रिटायरमेंट पर फिर छिड़ी बहस
विराट कोहली ने मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर कई लोगों को चौंका दिया था। एक ऐसा बल्लेबाज़, जिसने सफेद जर्सी में भारत को नई पहचान दी—अचानक उस फॉर्मेट से दूर चला गया, जिससे उसकी पहचान बनी थी।
अब, जब जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन जैसे बल्लेबाज़ टेस्ट क्रिकेट में रन बना रहे हैं, तो तुलना स्वाभाविक हो गई है। और इसी तुलना को आधार बनाकर संजय मांजरेकर ने विराट के फैसले पर सवाल खड़े किए।
संजय मांजरेकर का बयान: “सबसे आसान फॉर्मेट चुना”
संजय मांजरेकर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास पर खुलकर अपनी नाराज़गी जाहिर की।
उनका कहना था,
“जब जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, तो मन विराट कोहली की ओर जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट छोड़ दिया। अगर वे सभी फॉर्मेट से संन्यास लेते तो समझ आता, लेकिन वनडे खेलना जारी रखना निराशाजनक है—क्योंकि टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के लिए यह सबसे आसान फॉर्मेट है।”
मांजरेकर ने यह भी कहा कि विराट की फिटनेस ऐसी थी कि वह और संघर्ष कर सकते थे, और टेस्ट में वापसी के लिए लड़ते रह सकते थे।
‘दिल और आत्मा’ वाला तंज
मांजरेकर का बयान सिर्फ फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने पिछले पांच सालों में विराट के टेस्ट संघर्ष का ज़िक्र करते हुए कहा कि शायद उन्होंने अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए पूरी तरह दिल और आत्मा नहीं लगाई।
यही लाइन सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा वायरल हुई—और सबसे ज़्यादा विवाद की वजह भी बनी।
विकास कोहली का करारा जवाब
संजय मांजरेकर के इस बयान पर विराट के भाई विकास कोहली चुप नहीं बैठे।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Threads पर एक छोटा, लेकिन बेहद तीखा पोस्ट किया—
“ऐसा लगता है कि विराट कोहली का नाम लिए बिना कुछ लोगों की दाल-रोटी नहीं चलती।”
बस, यही एक लाइन काफी थी।
ना नाम लिया गया, ना सफाई दी गई—लेकिन इशारा साफ था।
फैंस भी उतरे समर्थन में
विकास कोहली के बयान के बाद सोशल मीडिया पर विराट के फैंस भी एक्टिव हो गए।
कई लोगों का मानना है कि—
- विराट ने भारतीय क्रिकेट को 15 साल से ज़्यादा दिए
- तीनों फॉर्मेट में कप्तानी की
- टेस्ट क्रिकेट को भारत में दोबारा ग्लैमर दिया
ऐसे में उनके व्यक्तिगत फैसले पर सवाल उठाना अनुचित है।
आंकड़े जो बहस को हवा देते हैं
यह सच है कि पिछले पांच सालों में विराट कोहली का टेस्ट औसत लगभग 31 रहा।
यह वही विराट हैं, जिनका एक समय औसत 50 के पार था।
| फेज़ | टेस्ट औसत |
|---|---|
| 2011–2018 | ~54 |
| 2020–2025 | ~31 |
यही गिरावट मांजरेकर जैसे आलोचकों को सवाल पूछने का मौका देती है।
लेकिन समर्थकों का तर्क सीधा है—करियर का मूल्यांकन आखिरी पांच साल से नहीं होता।
वनडे में अभी भी विराट का राज
जहां टेस्ट से दूरी बनी है, वहीं वनडे क्रिकेट में विराट कोहली अब भी पूरी तरह सक्रिय हैं।
हालिया सीरीज़ और फॉर्म देखें तो साफ है कि उनका खेल अभी खत्म नहीं हुआ।
यही वजह है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ में उनसे उम्मीदें सबसे ज़्यादा हैं—और वडोदरा में उमड़ी भीड़ इसका सबूत है।
टेस्ट छोड़ना: मजबूरी या सोच-समझकर लिया फैसला?
यह सवाल अब भी बना हुआ है।
क्या विराट ने टेस्ट इसलिए छोड़ा क्योंकि शरीर जवाब दे रहा था?
या फिर इसलिए क्योंकि वह अपने करियर को अपने तरीके से खत्म करना चाहते थे?
कोहली ने खुद कभी यह नहीं कहा कि टेस्ट क्रिकेट आसान नहीं रहा—लेकिन उन्होंने यह ज़रूर संकेत दिया कि मानसिक थकान एक बड़ा कारण थी।
फैसला विराट का, बहस सबकी
संजय मांजरेकर की बातों में विश्लेषण है।
विकास कोहली के जवाब में भावनात्मक सच्चाई।
और विराट कोहली के फैसले में—शायद दोनों का मिश्रण।
एक बात तय है—
विराट कोहली का नाम क्रिकेट में इतना बड़ा है कि
उनके फैसले भी हेडलाइन बन जाते हैं।
अब मैदान पर वह क्या करते हैं, वही आखिरी जवाब देगा।
















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