List A – भारत में क्रिकेट सिर्फ़ 22 गज़ की पिच तक सीमित नहीं रहता। यहां यह पहचान है, उम्मीद है, और कई बार—किस्मत का फैसला भी। जिस देश में हर गली से एक बल्लेबाज़ निकलता हो, वहां टैलेंट का होना वरदान से ज़्यादा चयन की त्रासदी बन जाता है। और यही बात हाल ही में पूर्व भारतीय ओपनर और मौजूदा क्रिकेट एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा ने खुलकर कह दी।
उनका कहना सीधा था—अगर ये तीन खिलाड़ी भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश में होते, तो कभी वनडे टीम से बाहर नहीं किए जाते। बात सिर्फ़ भावनाओं की नहीं है। आंकड़े भी चीख-चीखकर यही कह रहे हैं।
“किसी और देश में होते तो पर्मानेंट खिलाड़ी होते”
आकाश चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा,
“तीन ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अगर किसी और देश में होते ना, तो अपनी कंट्री की वनडे टीम का पर्मानेंट हिस्सा होते।”
यह बयान जितना साधारण लगता है, उतना ही चुभने वाला है। क्योंकि जिन नामों की उन्होंने बात की, उनमें से एक का औसत 82.15 है—जो इंटरनेशनल क्रिकेट में भी दुर्लभ माना जाता है।
पहला नाम: ऋतुराज गायकवाड़ — रन मशीन, फिर भी इंतज़ार
आकाश चोपड़ा की लिस्ट में पहला नाम था ऋतुराज गायकवाड़ का।
विजय हजारे ट्रॉफी में उनका हालिया प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है। क्लासिक स्ट्रोकप्ले, संयम और बड़ी पारियां—सब कुछ मौजूद।
लिस्ट ए क्रिकेट में अगर कम से कम 5000 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की बात करें, तो सबसे ज्यादा औसत ऋतुराज का ही है।
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| मैच | 114 |
| रन | 5060 |
| औसत | 58.83 |
| शतक | 20 |
फिर भी, भारत में ओपनिंग स्लॉट इतना भरा हुआ है कि निरंतर मौके मिलना आसान नहीं।
दूसरा नाम: देवदत्त पडिक्कल — 82.15 का औसत, लेकिन डेब्यू नहीं
अगर ऋतुराज की कहानी अधूरी लगती है, तो देवदत्त पडिक्कल की कहानी और भी ज्यादा हैरान करती है।
कर्नाटक के इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ का लिस्ट ए औसत है—82.15।
यह कोई टाइपो नहीं है।
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| रन | 2711 |
| औसत | 82.15 |
| शतक | 13 |
इतना औसत रखने वाला खिलाड़ी आज तक भारतीय वनडे टीम के लिए डेब्यू भी नहीं कर पाया।
आकाश चोपड़ा ने साफ कहा,
“ऋतुराज तो फिर भी भारत के लिए खेल गए, लेकिन पडिक्कल का नाम तो कन्वर्सेशन का भी हिस्सा नहीं है।”
तीसरा नाम: रिंकू सिंह — सिर्फ़ फिनिशर नहीं
तीसरा और आखिरी नाम था रिंकू सिंह का।
अधिकतर फैंस उन्हें टी20 का फिनिशर मानते हैं—और मानना भी चाहिए। लेकिन आकाश चोपड़ा का इशारा साफ था: रिंकू को सिर्फ़ इस फ्रेम में मत बांधिए।
लिस्ट ए क्रिकेट में रिंकू सिंह का औसत है 53.44।
निचले क्रम में बल्लेबाज़ी करने के बावजूद।
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| रन | 1899 |
| औसत | 53.44 |
| रोल | मिडल/लोअर ऑर्डर |
शतक कम हैं, क्योंकि मौके कम हैं।
लेकिन प्रभाव? हर बार दिखता है।
भारत में टैलेंट होना क्यों बन जाता है समस्या?
यह सवाल नया नहीं है, लेकिन हर पीढ़ी में और तीखा हो जाता है।
भारत के पास टॉप ऑर्डर से लेकर फिनिशर तक—हर रोल के लिए तीन-तीन विकल्प मौजूद हैं।
जहां न्यूजीलैंड या साउथ अफ्रीका जैसे देश किसी खिलाड़ी को 15–20 मैच का रन देते हैं, वहीं भारत में दो खराब पारियां काफी होती हैं।
यह सिस्टम की मजबूरी है, लेकिन खिलाड़ियों के लिए यह हकीकत कठोर है।
क्या विदेश में होते तो कहानी अलग होती?
आकाश चोपड़ा का तर्क यही है।
अगर यही आंकड़े किसी और देश के खिलाड़ी के होते—
- टीम में लगातार मौके मिलते
- रोल क्लियर होता
- और आत्मविश्वास टिकता
भारत में, टैलेंट की भीड़ में कई बार क्वालिटी भी शोर में दब जाती है।
सपनों की लाइन में खड़े खिलाड़ी
ऋतुराज, पडिक्कल और रिंकू—तीनों की कहानी अलग है, लेकिन दर्द एक जैसा।
वे खराब नहीं हैं।
वे अनफिट नहीं हैं।
वे बस भारत में पैदा हुए हैं—जहां क्रिकेटर्स की लाइन सबसे लंबी है।
और शायद यही भारतीय क्रिकेट की सबसे कड़वी सच्चाई भी है।
















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