IPL – आईपीएल 2026 से मुस्तफिज़ुर रहमान का नाम बाहर होते ही ढाका में जैसे आग लग गई। मामला सिर्फ़ एक खिलाड़ी का नहीं रहा—देखते ही देखते यह राष्ट्रीय स्वाभिमान, राजनीति और सुरक्षा के त्रिकोण में फंस गया। और इसी उबाल के बीच बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने टी20 वर्ल्ड कप को लेकर ऐसा कदम उठा दिया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया है।
अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि बांग्लादेश भारत में खेलेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या भावनाओं में लिया गया फैसला आने वाले दस साल बर्बाद कर सकता है?
मुस्तफिज़ुर विवाद से टी20 वर्ल्ड कप तक बात कैसे पहुंची?
मुस्तफिज़ुर रहमान को आईपीएल 2026 से बाहर किए जाने के बाद बांग्लादेशी क्रिकेट हलकों में नाराज़गी पहले से थी। उसी बीच बीसीबी ने यह कहते हुए विवाद खड़ा कर दिया कि टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज के सभी मैच भारत में खेलना सुरक्षा के लिहाज़ से ठीक नहीं है।
बीसीबी ने आईसीसी से मांग की कि बांग्लादेश के मैच किसी अन्य देश में शिफ्ट किए जाएं।
लेकिन आईसीसी का जवाब दो टूक था।
या तो भारत में खेलिए,
या फिर अपने पॉइंट्स फोरफिट कर दीजिए।
आईसीसी की सख्ती और बीसीबी की ज़िद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीसी ने साफ कहा कि सुरक्षा को लेकर कोई असाधारण अलर्ट नहीं है। भारत इससे पहले भी कई आईसीसी इवेंट्स की सफल मेजबानी कर चुका है।
इसके बावजूद बीसीबी का रुख नरम नहीं पड़ा। उल्टा, बयान और तीखे होते चले गए।
तमीम इकबाल बीच में आए—और विवाद और बढ़ गया
इसी तनाव के बीच बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने संतुलन की बात की। उनका लहजा शांत था, लेकिन संदेश गहरा।
तमीम ने कहा कि
अगर सब मिलकर संवाद करें, तो कई समस्याएं हल हो सकती हैं।
और यह भी कि आज लिया गया फैसला अगले दस साल तक बांग्लादेश क्रिकेट को प्रभावित करेगा।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
सार्वजनिक भावनाओं के आधार पर इतने बड़े संस्थान नहीं चलाए जा सकते।
यह बयान दरअसल बीसीबी को आईना दिखाने जैसा था।
“भारतीय एजेंट” — जब सीमा लांघ गया बयान
लेकिन यहीं से मामला पूरी तरह बिगड़ गया।
बीसीबी की फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन नजमुल ने फेसबुक पर तमीम इकबाल को सीधे-सीधे “भारतीय एजेंट” कह दिया।
उनकी पोस्ट में लिखा था—
“इस बार, बांग्लादेश के लोगों ने अपनी आंखों से एक और पक्के भारतीय एजेंट को उभरते हुए देखा।”
यह सिर्फ़ एक बयान नहीं था।
यह बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास के सबसे सम्मानित चेहरों में से एक पर सीधा हमला था।
खिलाड़ियों में गुस्सा, ड्रेसिंग रूम आहत
इस बयान का असर तुरंत दिखा।
बांग्लादेश के मौजूदा टेस्ट कप्तान ने खुलकर नाराज़गी जताई।
उन्होंने कहा कि
एक पूर्व कप्तान, एक रोल मॉडल, और बांग्लादेश के सबसे सफल क्रिकेटरों में से एक के बारे में ऐसी बात कहना बेहद दुखद है।
उनके शब्दों में सबसे अहम बात यह थी—
“क्रिकेट बोर्ड हमारा गार्जियन होता है।”
यानी बोर्ड से उम्मीद होती है कि वह खिलाड़ियों की रक्षा करेगा, न कि उन्हें सार्वजनिक रूप से निशाना बनाएगा।
“घर में सुधार हो, बाजार में नहीं”
टेस्ट कप्तान की बातों ने इस पूरे विवाद का सार पकड़ लिया।
उन्होंने कहा कि
अगर किसी को सुधारना है, तो वह घर के अंदर होनी चाहिए, सबके सामने नहीं।
एक खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने ऐसी टिप्पणी को पूरी तरह खारिज कर दिया—और यह संकेत साफ था कि ड्रेसिंग रूम और बोर्ड के बीच भरोसे में दरार पड़ चुकी है।
क्या बांग्लादेश सच में पॉइंट्स फोरफिट करेगा?
यह अब भी सबसे बड़ा सवाल है।
आईसीसी पीछे हटने के मूड में नहीं है।
बीसीबी बयानबाज़ी में उलझा हुआ है।
और खिलाड़ी—फिर से—बीच में फंसे हुए हैं।
अगर बांग्लादेश अपने मैच नहीं खेलता, तो यह सिर्फ़ टूर्नामेंट का नुकसान नहीं होगा। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसकी साख पर भी सीधा असर डालेगा।
क्रिकेट साउथ एशिया में भावनाओं से चलता है, लेकिन वैश्विक मंच पर नियमों से।
भावनाओं की जीत या क्रिकेट की हार?
मुस्तफिज़ुर रहमान से शुरू हुआ मामला अब तमीम इकबाल बनाम बीसीबी तक पहुंच चुका है।
बीच में फंसा है—बांग्लादेश का भविष्य।
क्रिकेट में मतभेद हो सकते हैं।
बहस भी ज़रूरी है।
लेकिन जब सम्मान खत्म हो जाए, तो खेल सबसे पहले हारता है।
और अगर यह विवाद यूं ही चलता रहा, तो बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप मैदान पर नहीं, मीटिंग रूम में हार सकता है।















