Kohli – रविवार से शुरू हो रही भारत–न्यूजीलैंड वनडे सीरीज़ सिर्फ़ तीन मैचों की कहानी नहीं है। यह सीरीज़ विराट कोहली और इतिहास के बीच खड़ी एक खुली खिड़की है।
रिकॉर्ड्स वैसे तो कोहली के लिए नए नहीं हैं, लेकिन इस बार दांव पर जो नाम है—वह भारतीय क्रिकेट की सबसे ऊंची आवाज़ों में से एक है: सचिन तेंदुलकर।
कोहली एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़े हैं, जहां हर रन सिर्फ़ स्कोर नहीं, एक नई लाइन खींचता है इतिहास में।
एक रिकॉर्ड, दो दिग्गज और 34 मैदान
फिलहाल वनडे क्रिकेट में एक अनोखा रिकॉर्ड साझा है।
34 अलग-अलग मैदानों पर शतक—और यह आंकड़ा सिर्फ़ दो बल्लेबाज़ों के नाम दर्ज है।
- विराट कोहली
- सचिन तेंदुलकर
दुनिया भर के स्टेडियम, अलग पिचें, अलग हालात—और फिर भी शतक। यह रिकॉर्ड सिर्फ़ क्लास नहीं, बल्कि एडजस्टमेंट और निरंतरता का पैमाना है।
| खिलाड़ी | अलग-अलग मैदानों पर ODI शतक |
|---|---|
| विराट कोहली | 34 |
| सचिन तेंदुलकर | 34 |
| रोहित शर्मा | 26 |
| रिकी पोंटिंग | 21 |
| हाशिम अमला | 21 |
| एबी डिविलियर्स | 21 |
वडोदरा: जहां कोहली ने कभी ODI खेला ही नहीं
सीरीज़ का पहला मुकाबला वडोदरा में खेला जाएगा।
और यहीं कहानी सबसे दिलचस्प हो जाती है।
विराट कोहली ने अब तक वडोदरा में एक भी वनडे मैच नहीं खेला है। यानी—
- पहला मैच
- पहली पारी
- और अगर शतक…
तो सीधे इतिहास
यह मैदान कोहली के लिए पूरी तरह ब्लैंक कैनवास है। अगर यहां बल्ला बोला, तो वह 35वें मैदान पर शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़ बन जाएंगे।
राजकोट और इंदौर: अधूरी कहानियां
अगर वडोदरा में बात नहीं बनती, तो कोहली के पास दो और मौके हैं—और दोनों ही जगहों पर उनकी कहानी अभी अधूरी है।
राजकोट
राजकोट में कोहली का सर्वश्रेष्ठ वनडे स्कोर 78 रन रहा है।
शतक से बस एक अच्छी साझेदारी दूर।
इंदौर
इंदौर में हालात थोड़े अलग हैं। यहां कोहली का अब तक का सर्वोच्च स्कोर 36 रन है।
लेकिन क्रिकेट में इंदौर ने पहले भी बल्लेबाज़ों को अचानक आज़ादी दी है—और कोहली जैसे खिलाड़ी के लिए एक पारी काफी होती है।
तीन मैदान, एक शतक और इतिहास
सीधा गणित है—
वडोदरा, राजकोट या इंदौर—तीनों में से किसी एक पर भी शतक।
और नतीजा?
- 35 अलग-अलग मैदान
- सचिन से आगे
- और यह रिकॉर्ड सिर्फ़ कोहली के नाम
जहां कई महान खिलाड़ी कुछ पसंदीदा वेन्यू तक सीमित रहे, कोहली ने यह साबित किया है कि उनकी बल्लेबाज़ी भूगोल नहीं पहचानती।
क्यों यह रिकॉर्ड खास है?
शतकों की गिनती बहुत लोग करते हैं।
लेकिन वेन्यू की गिनती कुछ ही करते हैं।
यह रिकॉर्ड बताता है कि बल्लेबाज़:
- नई पिच पढ़ सकता है
- नई बॉल कंडीशन में ढल सकता है
- और भीड़, दबाव, माहौल—सबको मैनेज कर सकता है
सचिन तेंदुलकर ने यह काम एक लंबे युग में किया।
कोहली ने इसे तेज़, फिट और डेटा-ड्रिवन क्रिकेट के दौर में किया है।
और यही तुलना इसे और दिलचस्प बनाती है।
फॉर्म भी साथ है, सिर्फ़ मौका चाहिए
यह कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है, जो खराब फॉर्म में पीछा कर रहा हो।
कोहली हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में शतक लगा चुके हैं। टाइमिंग, टच—सब मौजूद है।
पिछले एक साल में:
- ऑस्ट्रेलिया में प्रभाव
- दक्षिण अफ्रीका में सीरीज़ जीत
- और बड़े मैचों में जिम्मेदारी
सचिन से तुलना—सम्मान के साथ
यहां एक बात साफ है—
यह रिकॉर्ड सचिन को पीछे छोड़ने से ज़्यादा, उनके बराबर खड़े होकर आगे बढ़ने की कहानी है।
तेंदुलकर ने जिस रास्ते को बनाया, कोहली उसी पर दौड़े—और अब शायद एक कदम आगे निकलने वाले हैं। यह प्रतिस्पर्धा नहीं, विरासत का विस्तार है।
फैंस की निगाहें, कैमरों की नजर
तीन मैच।
तीन शहर।
और हर गेंद पर एक सवाल—
क्या आज इतिहास बनेगा?
कोहली के लिए यह दबाव नया नहीं है। बल्कि, यही वह माहौल है जहां वह सबसे सहज दिखते हैं।
एक शतक, एक नाम, एक नई लाइन
वनडे सीरीज़ कल शुरू होगी।
लेकिन रिकॉर्ड की दौड़ पहली गेंद से ही चल पड़ेगी।
वडोदरा, राजकोट या इंदौर—
कोई भी एक शहर।
और अगर कोहली का बल्ला उठ गया,
तो क्रिकेट इतिहास में एक नई लाइन जुड़ जाएगी—
35 मैदान। एक नाम। विराट कोहली।















