IND vs NZ – शुभमन गिल की कप्तानी में उतरी यह भारतीय टीम सिर्फ एक वनडे जीतने नहीं आई थी। वह एक बयान देने आई थी। और ऑकलैंड की इस शाम भारत ने वही किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में 4 विकेट की जीत, तीन मैचों की सीरीज़ में 1-0 की बढ़त, और साथ ही वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड, जिसे छूना भी अब बाकी टीमों के लिए मुश्किल लगता है।
301 रन का लक्ष्य। विदेशी धरती। दबाव।
और फिर वही पुरानी तस्वीर—भारत चेज करता हुआ, ठहराव के साथ, आत्मविश्वास के साथ।
300+ रन चेज करने में भारत सबसे आगे
इस जीत के साथ भारत ने वनडे क्रिकेट में 20वीं बार 300 से ज्यादा रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक चेज किया। यह एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जिसके आसपास भी फिलहाल कोई टीम नहीं दिखती।
दुनिया की कोई भी दूसरी टीम 15 से ज्यादा बार ऐसा नहीं कर पाई है। यह आंकड़ा सिर्फ बल्लेबाज़ी की ताकत नहीं, बल्कि चेजिंग माइंडसेट की कहानी कहता है।
सबसे ज्यादा 300+ रन चेज करने वाली टीमें (ODI)
| टीम | 300+ रन चेज |
|---|---|
| भारत | 20 |
| इंग्लैंड | 15 |
| ऑस्ट्रेलिया | 14 |
| पाकिस्तान | 12 |
| न्यूज़ीलैंड | 11 |
| श्रीलंका | 11 |
पहले बल्लेबाज़ी में न्यूजीलैंड की ठोस शुरुआत
टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने शुरुआत में भारत को बैकफुट पर धकेल दिया।
डेवोन कॉनवे और हेनरी निकोलस के बीच पहले विकेट के लिए 117 रनों की साझेदारी ने यह संकेत दे दिया था कि कीवी टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने के मूड में है।
एक वक्त ऐसा लग रहा था कि स्कोर 340–350 के पार जाएगा।
लेकिन यहीं मैच पलटा।
मिडिल ऑर्डर में:
शॉट सिलेक्शन बिगड़ा
रन रेट थमा
और भारतीय गेंदबाज़ों ने लगातार ब्रेक लगाए
डेरिल मिशेल ने जरूर 84 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाज़ उस लय को आगे नहीं बढ़ा सके। नतीजा—50 ओवर में 8 विकेट पर 300 रन।
भारतीय गेंदबाज़ी: बिना शोर, असरदार काम
यह स्कोर जितना मजबूत दिखता है, उतना ही यह भारतीय गेंदबाज़ों की डिसिप्लिन को भी दर्शाता है।
मिडिल ओवर्स में रन रोकना, सही समय पर विकेट निकालना—यही फर्क बना।
रनचेज की शुरुआत: शुरुआती झटका
301 के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारत की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
रोहित शर्मा 26 रन बनाकर आउट हो गए।
पावरप्ले में एक विकेट गिरना—थोड़ा दबाव जरूर बना।
लेकिन तभी क्रीज़ पर आए वह खिलाड़ी, जिनका नाम रनचेज से जुड़ते ही कहानी बदल जाती है।
विराट कोहली: शतक नहीं, लेकिन असर पूरा
विराट कोहली—चेज मास्टर।
इस मैच में उन्होंने 93 रन बनाए।
शतक से सिर्फ 7 रन दूर।
लेकिन यह उन पारियों में से थी, जो स्कोरकार्ड से ज्यादा मैच पर असर डालती हैं।
उन्होंने:
रिस्क को चुना
स्ट्राइक रोटेट की
और गलत गेंद का इंतज़ार किया
शुभमन गिल के साथ दूसरे विकेट के लिए उनकी शतकीय साझेदारी ने मैच को भारत के कंट्रोल में ला दिया।
कप्तान शुभमन गिल का शांत योगदान
शुभमन गिल ने कप्तान के तौर पर इस मैच में एक जरूरी पारी खेली।
56 रन।
बिना हड़बड़ी।
बिना दिखावे के।
वह जानते थे कि कोहली क्रीज़ पर हैं, इसलिए उनकी भूमिका थी—स्टेबिलिटी।
और उन्होंने वही किया।
यह वही परिपक्वता है, जिसकी उम्मीद एक कप्तान से की जाती है।
मिडिल ऑर्डर ने भी निभाई भूमिका
नंबर-4 पर आए श्रेयस अय्यर ने 49 रनों की पारी खेली।
यह पारी इसलिए अहम थी क्योंकि विकेट गिरने की स्थिति में भारत को एक और साझेदारी की जरूरत थी।
इसके बाद हर्षित राणा का 29 रन का योगदान चुपचाप मैच को आसान करता चला गया।
और आखिर में केएल राहुल—नाबाद 29 रन, शांत फिनिश।
रनचेज भारत की पहचान क्यों बन चुका है?
यह सिर्फ इस मैच की बात नहीं है।
पिछले कुछ सालों में भारत ने रनचेज को एक सिस्टम बना लिया है।
कारण साफ हैं:
गहरी बल्लेबाज़ी
डेटा आधारित रणनीति
और विराट कोहली जैसा खिलाड़ी, जो दबाव को अपना साथी बना लेता है
वनडे क्रिकेट में यह भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।















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