ICC – 7 फरवरी से शुरू होने वाले टी20 विश्व कप 2026 से ठीक पहले एक संवेदनशील मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। बांग्लादेश की ओर से भारत में खेले जाने वाले अपने मुकाबलों के वेन्यू बदलने की मांग—और उस पर अब आईसीसी का लगभग साफ इनकार।
सोमवार, 12 जनवरी, को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के भीतर से जो संकेत आए, उन्होंने यह साफ कर दिया कि मौजूदा शेड्यूल से छेड़छाड़ की संभावना बेहद कम है।
सुरक्षा को लेकर शोर जरूर है, लेकिन आईसीसी की आंतरिक रिपोर्ट कहानी कुछ और ही कह रही है।
आईसीसी की रिपोर्ट: खतरा ‘कम’, चिंता ‘सीमित’
आईसीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वैश्विक संचालन संस्था की स्वतंत्र जोखिम आकलन रिपोर्ट में बांग्लादेश टीम के भारत में खेलने को लेकर किसी प्रत्यक्ष या विशिष्ट खतरे का उल्लेख नहीं किया गया है। यही वजह है कि बांग्लादेश की उस मांग को तवज्जो मिलती नहीं दिख रही, जिसमें उन्होंने अपने मैच भारत से बाहर कराने की बात कही थी।
सूत्र ने पीटीआई से बातचीत में साफ शब्दों में कहा,
“आईसीसी के स्वतंत्र सुरक्षा आकलन यह निष्कर्ष नहीं निकालते कि बांग्लादेश भारत में अपने तय मुकाबले नहीं खेल सकता। कुल मिलाकर सुरक्षा जोखिम को कम से मध्यम आंका गया है, जो कई अन्य वैश्विक खेल आयोजनों के अनुरूप है।”
यानी, खतरे की बात है—लेकिन उस स्तर की नहीं, जिससे टूर्नामेंट का ढांचा ही बदल दिया जाए।
बांग्लादेश के चार मैच, दो बड़े शहर
शेड्यूल के मुताबिक, बांग्लादेश को भारत में लीग स्टेज के चार मुकाबले खेलने हैं। इनमें से मैच कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में होने हैं—जहां अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स की मेजबानी का लंबा अनुभव रहा है।
आईसीसी सूत्रों के अनुसार,
- कोलकाता और मुंबई—दोनों जगहों पर जोखिम को कम से मध्यम श्रेणी में रखा गया है
- ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी साबित हो
बीसीसीआई और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर बनाई गई सुरक्षा योजना पर आईसीसी को पूरा भरोसा है।
मुस्तफिजुर रहमान का नाम, विवाद की जड़
इस पूरे मामले की चिंगारी बांग्लादेश के खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ नजरुल के बयान से भड़की थी। ढाका में उन्होंने दावा किया था कि आईसीसी की रिपोर्ट में मुस्तफिजुर रहमान को लेकर खतरे की बात कही गई है।
यहीं से विवाद ने तूल पकड़ा।
दरअसल, मुस्तफिजुर को हाल ही में आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स से हटाया गया था। इसके बाद बांग्लादेश सरकार नाराज हुई और देश में आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी गई।
लेकिन आईसीसी के सूत्रों ने इस दावे को सीधे-सीधे खारिज कर दिया।
बीसीबी का यू-टर्न: बयान से पीछे हटे
आसिफ नजरुल के बयान के कुछ ही घंटों बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक स्पष्टीकरण जारी किया। इस बयान में साफ कहा गया कि—
“जिस बातचीत का जिक्र किया गया, वह आईसीसी और बीसीबी के सुरक्षा विभागों के बीच आंतरिक चर्चा थी। यह बांग्लादेश के मुकाबलों को भारत से बाहर कराने को लेकर आईसीसी की कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं थी।”
हालांकि, बीसीबी ने यह जरूर दोहराया कि उसने
“टीम की सुरक्षा के हित में”
मैचों के वेन्यू बदलने का अनुरोध किया है और वह अभी भी आईसीसी के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।
आईसीसी का रुख: बदलाव की गुंजाइश नहीं
आईसीसी के भीतर से आ रहे संकेतों को देखें तो मौजूदा कार्यक्रम में बदलाव की संभावना लगभग न के बराबर है।
सूत्र के अनुसार,
“आईसीसी को बीसीसीआई और स्थानीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों पर पूरा भरोसा है। भारत का रिकॉर्ड बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं को सुरक्षित ढंग से आयोजित करने का रहा है।”
साथ ही, आईसीसी ने यह भी साफ किया कि सुरक्षा योजना कोई स्थिर दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
संवाद खुला है, लेकिन फैसला लगभग तय
आईसीसी ने यह जरूर कहा है कि वह:
- सभी भागीदार बोर्ड्स से सलाह ले रहा है
- रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है
- और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करेगा
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि टूर्नामेंट का भूगोल बदला जाएगा।
बड़ा सवाल: खेल या राजनीति?
इस पूरे प्रकरण में खेल से ज्यादा राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव की झलक दिखती है। आईपीएल प्रसारण पर बैन, मुस्तफिजुर को लेकर नाराजगी और अब वर्ल्ड कप वेन्यू का मुद्दा—सब एक-दूसरे से जुड़े नजर आते हैं।
लेकिन आईसीसी का संदेश साफ है:
क्रिकेट का कैलेंडर भावनाओं पर नहीं, आकलन पर चलेगा।



















