Reddy – न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में हार के बाद भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम जितना शांत था, उतनी ही तीखी बातें बाहर आईं। इस बार बयान किसी पूर्व खिलाड़ी या एक्सपर्ट का नहीं, बल्कि भारत के सहायक कोच रेयान टेन डोएशे का था। और उन्होंने बिना घुमा-फिराकर उन मुद्दों पर बात की, जिन पर आमतौर पर पर्दा डाल दिया जाता है—नितीश कुमार रेड्डी का प्रदर्शन, रोहित शर्मा की मैच प्रैक्टिस और टीम कॉम्बिनेशन की उलझन।
यह कोई भावनात्मक रिएक्शन नहीं था, बल्कि एक कोच का ठंडा, सीधा और थोड़ा सख्त आकलन।
नितीश कुमार रेड्डी: मौके मिले, असर नहीं दिखा
दूसरे वनडे में भारत की प्लेइंग इलेवन में एकमात्र बदलाव के तौर पर नितीश कुमार रेड्डी को शामिल किया गया। उम्मीद थी कि ऑलराउंडर के तौर पर वह संतुलन देंगे। लेकिन हुआ इसके उलट।
रेड्डी ने:
- बल्ले से सिर्फ 20 रन बनाए
- गेंदबाजी में 2 ओवर, 0 विकेट
न्यूजीलैंड ने 285 रन का लक्ष्य 7 विकेट से हासिल कर लिया और सीरीज 1-1 से बराबर हो गई।
मैच के बाद डोएशे ने साफ कहा,
“जब हम नितीश को मौके देते हैं, तो वह अक्सर मैच में कुछ खास नहीं कर पाते।”
यह बयान कठोर लग सकता है, लेकिन टीम मैनेजमेंट का नजरिया साफ है—मौका सिर्फ खेलने के लिए नहीं, पकड़ने के लिए होता है।
“ऐसे मौके रोज़ नहीं मिलते”
डोएशे ने खास तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मैच रेड्डी के लिए कितना बड़ा मौका था।
उन्होंने कहा,
“आपको 15 ओवर तक विकेट पर टिकने का मौका मिला। जो खिलाड़ी टीम में जगह बनाना चाहता है, उसे ऐसे मौकों का पूरा फायदा उठाना होता है।”
वनडे क्रिकेट में, खासकर जब टीम प्रयोग कर रही हो, एक मैच आपकी पूरी कहानी बदल सकता है। लेकिन इस बार रेड्डी उस कहानी के हीरो नहीं बन पाए।
क्या तीसरा स्पिनर बेहतर विकल्प होता?
पीछे मुड़कर देखने पर डोएशे ने एक और अहम बात मानी। उन्होंने स्वीकार किया कि:
- शायद भारत रेड्डी की जगह तीसरे स्पिनर को खिलाता
- खासकर तब, जब न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने पिच का शानदार इस्तेमाल किया
यह बयान दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट भी मान रहा है—कॉम्बिनेशन इस मैच में सही नहीं बैठा।
रोहित शर्मा और “कम क्रिकेट” की सच्चाई
बीसीसीआई के निर्देश के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों ने विजय हजारे ट्रॉफी में वापसी की। रोहित ने दो मैच खेले, लेकिन इसके बावजूद डोएशे का मानना है कि कप्तान अभी भी पर्याप्त क्रिकेट नहीं खेल रहे।
डोएशे ने कहा,
“दो सीरीज के बीच क्रिकेट नहीं खेलना एक चुनौती होती है। पहले वनडे में रोहित उस लय में नहीं थे, जिसमें वह आमतौर पर रहते हैं।”
यह बयान अहम है क्योंकि अक्सर यह मान लिया जाता है कि बड़े खिलाड़ी खुद ही लय में आ जाते हैं। लेकिन कोचिंग स्टाफ मानता है कि मैच प्रैक्टिस का कोई विकल्प नहीं।
क्या रोहित ने जानबूझकर अपना खेल बदला?
जब डोएशे से पूछा गया कि क्या रोहित ने पिच को देखते हुए अपनी बल्लेबाजी शैली बदली, तो जवाब सीधा था—नहीं।
उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं लगता कि यह जानबूझकर किया गया फैसला था। रोहित लय में खेलने वाले बल्लेबाज हैं। जब विकेट बहुत अच्छे नहीं होते, तो उनके लिए टाइमिंग मुश्किल हो जाती है।”
यह रोहित की ताकत भी है और कमजोरी भी। वह पावर से ज्यादा टाइमिंग पर निर्भर करते हैं।
केएल राहुल और नंबर पांच का विकल्प
इस पूरी चर्चा के बीच एक पॉजिटिव नाम सामने आया—केएल राहुल।
डोएशे ने संकेत दिए कि राहुल को:
- नियमित रूप से नंबर पांच पर भेजा जा सकता है
- उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह टीम के लिए फायदेमंद होगा
उन्होंने कहा,
“राहुल पांचवें नंबर पर खेलने के लिए अच्छा खिलाड़ी है। उसने शानदार शतक जड़ा है और विकेटकीपिंग में भी असर डालता है।”
इससे टीम को एक और विकल्प मिलता है—ऑलराउंडर को ऊपर खिलाने का।
बल्लेबाजी क्रम लंबा करने की रणनीति
डोएशे ने यह भी बताया कि पिछले 18 महीनों में टीम इंडिया की एक साफ रणनीति रही है:
- बल्लेबाजी क्रम को लंबा करना
- ऑलराउंडर को टॉप ऑर्डर या नंबर पांच पर खिलाना
उन्होंने उदाहरण दिया वाशिंगटन सुंदर का, जिसे पहले इसी रोल में आज़माया गया था।
रविंद्र जडेजा का बचाव
वनडे क्रिकेट में हालिया प्रदर्शन को लेकर रविंद्र जडेजा पर भी सवाल उठे हैं। लेकिन डोएशे ने यहां साफ-साफ उनका बचाव किया।
उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं लगता कि वह दबाव में हैं। उनके आंकड़े शानदार हैं। हाल में विकेट कम मिले हैं, लेकिन उनकी गेंदबाजी वास्तव में बेहतर हुई है।”
डोएशे के मुताबिक:
- जडेजा की बॉलिंग स्पीड
- लाइन-लेंथ
पहले से बेहतर है, और विकेट जल्द ही आएंगे।















