ODI – जब भारत–न्यूजीलैंड की तीन मैचों की वनडे सीरीज शुरू हुई थी, तो माहौल लगभग तयशुदा सा था। घर की पिचें, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे नाम, बैटिंग से लेकर बॉलिंग तक गहराई। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड—बिना अपने बड़े सितारों के। कागज़ पर कहानी एकतरफा लग रही थी।
लेकिन क्रिकेट को कागज़ से खेलने की आदत नहीं है।
तीन मैचों के बाद स्कोरलाइन ने सब उलट दिया। न्यूजीलैंड ने भारत को 2–1 से सीरीज में हरा दिया, वो भी भारत की सरजमीं पर। और यह जीत मामूली नहीं थी। यह 37 साल बाद भारत में कीवी टीम की वनडे सीरीज जीत थी।
गिल का साफ जवाब: बुमराह-पांड्या की कमी नहीं थी
हार के बाद सबसे आसान सवाल यही था—
क्या भारत ने जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या को मिस किया?
इंदौर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभमन गिल ने इस सवाल को सीधे खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा,
“हम उन्हें सीरीज में हराने के लिए काफी अच्छी टीम थे, लेकिन उन्होंने हमें हर डिपार्टमेंट में आउटप्ले किया—चाहे बॉलिंग हो, बैटिंग हो या फील्डिंग।”
यानि बहाना नहीं, खुद की कमियां।
इतिहास दोहराया, इस बार वनडे में
न्यूजीलैंड के खिलाफ यह कोई पहली चोट नहीं थी।
2024 में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट सीरीज में 3–0 से हराकर इतिहास रचा था।
अब 2026 में, वनडे फॉर्मेट में भी वही कहानी—2–1 से सीरीज जीत।
रविवार को तीसरे और निर्णायक वनडे में विराट कोहली ने शतक जरूर जड़ा, लेकिन वह फिर से हार में बदल गया।
338 रन का पीछा करते हुए भारत 296 रन पर सिमट गया।
बीच के ओवर्स: असली गेम यहीं हारा गया
अगर इस पूरी सीरीज को एक लाइन में समझना हो, तो वो है—
11 से 40 ओवर।
यहीं भारत की पकड़ ढीली पड़ी।
- इन 30 ओवरों में भारत ने 191 रन लुटाए
- सिर्फ 1 विकेट मिला
- गेंदबाज़ों के पास न कंट्रोल दिखा, न प्लान
पूरी सीरीज में भारत ने
90 ओवर में सिर्फ 8 विकेट लिए।
| आंकड़ा | भारत |
|---|---|
| कुल ओवर | 90 |
| विकेट | 8 |
| औसत | 68.37 |
| स्ट्राइक रेट | 67.5 |
ये नंबर सिर्फ खराब नहीं, चेतावनी हैं।
कुलदीप और जडेजा: स्पिन से उम्मीद, लेकिन जवाब नहीं
मिडिल ओवर्स में भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है—स्पिन।
लेकिन इस सीरीज में वही सबसे बड़ी कमजोरी बन गई।
रवींद्र जडेजा
- पूरी सीरीज में 0 विकेट
- पिछले 5 मैचों में सिर्फ 1 विकेट
कुलदीप यादव
- 3 मैचों में 3 विकेट
- औसत 60+
- स्ट्राइक रेट 50 के आसपास
शुभमन गिल ने कुलदीप का बचाव करते हुए कहा,
“कभी-कभी ऐसा होता है। कुलदीप पिछले कुछ सालों से हमारे लिए स्ट्राइक बॉलर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस बार विकेट नहीं मिले, लेकिन ऐसी सीरीज हमें आगे बढ़ने में मदद करती हैं।”
बात सही है, लेकिन वर्ल्ड क्रिकेट में नतीजे इंतजार नहीं करते।
फील्डिंग: जहां 15–20 रन हार गए
गिल ने एक और अहम बात कही, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है—फील्डिंग।
उन्होंने साफ कहा,
“मुझे सच में लगा कि इस सीरीज में हमारी फील्डिंग ठीक नहीं थी। हमने जरूरी कैच टपकाए। न्यूजीलैंड की फील्डिंग बेहतर थी। उन्होंने कम से कम 15–20 रन बचाए।”
तीनों मैचों में भारत ने
- आसान कैच छोड़े
- बाउंड्री रोकने में सुस्ती दिखाई
और वनडे क्रिकेट में 15–20 रन भी मैच का रुख बदल देते हैं।
न्यूजीलैंड ने जो किया, वही फर्क बना
इस सीरीज में सबसे बड़ा अंतर यही रहा—
- कीवी बल्लेबाज़ों ने अपनी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदला
- गेंदबाज़ों ने मिडिल ओवर्स में दबाव बनाए रखा
- फील्डिंग में ऊर्जा दिखी
नाम बड़े नहीं थे, लेकिन डिसिप्लिन बड़ा था।
क्या यह हार जरूरी थी?
कभी-कभी हार सिर्फ हार नहीं होती।
वह आईना होती है।
भारत के लिए यह सीरीज कई सवाल छोड़ गई—
- क्या स्पिन डिपार्टमेंट को रीथिंक करने की जरूरत है?
- क्या फील्डिंग अब भी “ऐड-ऑन” मानी जा रही है?
- और क्या बड़े स्कोर के चेज में भारत जरूरत से ज्यादा टॉप ऑर्डर पर निर्भर है?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में टीम चयन और रणनीति में दिखेंगे।



















