USA : मुंबई से अमेरिका और फिर मुंबई – नेत्रवलकर का इमोशनल कमबैक

Atul Kumar
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USA – मुंबई की उमस, वानखेड़े की सीढ़ियां और लाल मिट्टी की खुशबू—कुछ कहानियां जगह छोड़ देती हैं, लेकिन जगह उन्हें नहीं छोड़ती। सौरभ नेत्रवलकर के लिए 7 फरवरी सिर्फ एक मैच की तारीख नहीं है। यह उस सफर का पड़ाव है, जो मुंबई से अमेरिका गया और अब फिर से मुंबई लौट रहा है—बस जर्सी बदल गई है।

34 साल के नेत्रवलकर जब भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप के अपने पहले मैच में वानखेड़े स्टेडियम में कदम रखेंगे, तो सामने सिर्फ रोहित-विराट नहीं होंगे। सामने उनका पूरा अतीत खड़ा होगा।

वानखेड़े से अमेरिका तक: एक अधूरी कहानी, जो पूरी हुई

सौरभ नेत्रवलकर का क्रिकेट मुंबई में पला-बढ़ा।
यही मैदान, यही ड्रेसिंग रूम, यही सपने।

उन्होंने 2010 अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला।
ड्रेसिंग रूम शेयर किया—सूर्यकुमार यादव और शार्दुल ठाकुर जैसे नामों के साथ।

लेकिन सीनियर इंडिया कॉल कभी नहीं आई।

और फिर 2015 में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जो आमतौर पर क्रिकेट कहानियों में नहीं लिखा जाता—
क्रिकेट छोड़कर अमेरिका जाना।

क्रिकेट छोड़ा, लेकिन किस्मत ने नहीं छोड़ा

नेत्रवलकर अमेरिका गए कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री लेने।
उनका फोकस बदल गया था।
क्रिकेट? लगभग खत्म।

खुद नेत्रवलकर मानते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे दोबारा क्रिकेट खेलेंगे, इंटरनेशनल क्रिकेट तो दूर की बात थी।

लेकिन किस्मत ने स्क्रिप्ट बदल दी।

वह यूएसए क्रिकेट टीम का हिस्सा बने।
2024 में टी20 वर्ल्ड कप खेला।
और अब—भारत के खिलाफ, वानखेड़े में।

“यह मेरे लिए टाइम का पूरा सर्कल है”

कोलंबो में अमेरिकी टीम के अभ्यास कैंप से पीटीआई से बात करते हुए नेत्रवलकर की आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं।

उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता कि वहां पहुंचकर मेरी प्रतिक्रिया क्या होगी, लेकिन यह निश्चित रूप से भावुक पल होगा। मैंने मुंबई में क्रिकेट शुरू किया था, फिर इसे छोड़ दिया। अब उसी शहर में दोबारा खेलना—यह मेरे लिए टाइम का एक पूरा सर्कल है।”

यह सिर्फ मैच नहीं, दूसरी पारी है।

परिवार, दोस्त और बचपन का सपना

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी अपने परिवार और दोस्तों के सामने वानखेड़े में खेलने की कल्पना की थी, तो जवाब बहुत इंसानी था।

“कुछ हद तक हां। मैं मुंबई में पला-बढ़ा हूं। जब से क्रिकेट खेलना शुरू किया, सपना देश के लिए खेलने का था। हम अंडर-15 दिनों से वानखेड़े में ट्रेनिंग करते थे।”

अब देश अलग है, लेकिन जज्बा वही

गेंदबाजी का प्लान: सपाट विकेट, स्मार्ट माइंड

नेत्रवलकर सिर्फ भावनाओं में नहीं बह रहे।
उन्होंने भारत और कोलंबो में होने वाले मुकाबलों के लिए स्पष्ट रणनीति बना ली है।

उनका मानना है कि सपाट विकेटों पर रफ्तार नहीं, वैरायटी काम आती है।

  • नई गेंद से स्विंग निकालना
  • अलग-अलग तरह की स्लोअर बॉल
  • डेथ ओवर्स में यॉर्कर
  • ओस के साथ गीली गेंद से गेंदबाजी की प्रैक्टिस

उन्होंने कहा,
“सपाट विकेटों पर आपके पास कुछ खास गेंदें होनी चाहिए। स्किल से ज्यादा यह मायने रखता है कि आप हालात को कैसे पढ़ते हैं।”

अभ्यास भी सोच-समझकर

अमेरिका की टीम ने अभ्यास के लिए जगह भी सोच-समझकर चुनी है।

  • कोलंबो में कैंप
  • डी वाई पाटिल स्टेडियम में दो अभ्यास मैच

मकसद साफ है—भारतीय हालात के लिए खुद को तैयार करना।

अमेरिकी क्रिकेट पर भरोसा

नेत्रवलकर सिर्फ अपनी कहानी नहीं देख रहे, वे अमेरिकी क्रिकेट की ग्रोथ को भी महसूस कर रहे हैं।

उनके शब्दों में,
“आज हमारे 8–9 खिलाड़ी दुनिया की अलग-अलग फ्रेंचाइजी लीग में खेल रहे हैं। यह दिखाता है कि हमारे स्किल्स को अब वैल्यू मिल रही है।”

यह बयान छोटे देश की बड़ी महत्वाकांक्षा को बयां करता है।

भारत के खिलाफ मैच: भावनाएं बनाम प्रोफेशनलिज़्म

7 फरवरी को वानखेड़े में जब नेत्रवलकर रन-अप लेंगे, तो सामने भारत होगा।
पीछे परिवार।
आसपास दोस्त।
और भीतर—सालों की यादें।

लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है—
भावनाएं रहेंगी, फोकस नहीं टूटेगा।

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