Kohli : चेजमास्टर का कड़वा रिकॉर्ड जीत नहीं इतिहास बना

Atul Kumar
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Kohli – इंदौर की रात में रन बरसे, रिकॉर्ड टूटे, तालियां बजीं… और फिर वही सन्नाटा। चेजमास्टर विराट कोहली ने एक और यादगार शतक जड़ा, लेकिन स्कोरबोर्ड के आख़िर में जो लाइन चमकी, वह भारत के हक़ में नहीं थी।

338 के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए कोहली ने 124 रन की शानदार पारी खेली, पर दूसरे छोर से साथ नहीं मिला। नतीजा—भारत 296 पर ढेर, न्यूजीलैंड 41 रन से विजेता।

और इसी हार के साथ कोहली के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया, जिसे कोई भी बल्लेबाज़ अपने नाम नहीं करना चाहेगा।

चेज करते हुए हार में शतक: कोहली सबसे आगे

वनडे करियर में विराट कोहली के अब 54 शतक हो चुके हैं। इनमें से 9 शतक टीम की हार में आए हैं। और इन 9 में से 5 शतक तब आए, जब भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए हारा।
यानी, चेज के दौरान हार में सबसे ज़्यादा शतक—अब यह रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम है।

यूनिवर्स बॉस को पीछे छोड़ा

इस अनचाही सूची में कोहली ने क्रिस गेल को पीछे छोड़ दिया है।
गेल के नाम चेज में हार के दौरान 4 शतक थे। कोहली अब 5 के साथ सबसे ऊपर हैं।

चेज में हार के दौरान सबसे ज्यादा वनडे शतक

खिलाड़ीशतक
विराट कोहली5
क्रिस गेल4
शिवनरेन चंद्रपॉल3
कुमार संगाकारा3
रोहित शर्मा3
सचिन तेंदुलकर3

रिकॉर्ड बता रहे हैं कि यह सूची महान बल्लेबाज़ों से भरी है। फर्क बस इतना है कि कोहली का टैग “चेजमास्टर” है—और यही बात इस रिकॉर्ड को और भी चुभने वाला बनाती है।

इंदौर वनडे: रिकॉर्ड्स की भरमार, जीत नहीं

इंदौर में कोहली की पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी। वह रिकॉर्ड्स की झड़ी थी।

  • न्यूजीलैंड के खिलाफ 7वां वनडे शतक
  • इंटरनेशनल क्रिकेट का 85वां शतक
  • वनडे करियर का 54वां शतक
  • घरेलू मैदानों पर सभी फॉर्मेट मिलाकर 41वां शतक

न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में यह किसी भी बल्लेबाज़ का सबसे ज़्यादा शतक है—
रिकी पोंटिंग और वीरेंद्र सहवाग (6-6) से भी आगे।

कुल मिलाकर, न्यूजीलैंड के खिलाफ यह कोहली का 10वां इंटरनेशनल शतक है—
जैक्स कैलिस, जो रूट और सचिन तेंदुलकर (9-9) से आगे।

35 अलग-अलग वेन्यू पर शतक: एक और माइलस्टोन

कोहली ने अब वनडे क्रिकेट में 35 अलग-अलग मैदानों पर शतक जड़ दिए हैं।
यह आंकड़ा भी उन्हें सचिन तेंदुलकर से आगे ले जाता है।

खिलाड़ीवेन्यू
विराट कोहली35
रोहित शर्मा26
रिकी पोंटिंग21
हाशिम अमला21
एबी डिविलियर्स21

यह बताता है कि कोहली की क्लास किसी एक कंडीशन या पिच की मोहताज नहीं है।

फिर सवाल वही: शतक, लेकिन जीत क्यों नहीं?

यहां से बहस शुरू होती है।
क्या कोहली की पारी धीमी थी? नहीं।
क्या उन्होंने जिम्मेदारी नहीं निभाई? बिल्कुल निभाई।
तो फिर हार क्यों?

जवाब आसान नहीं, पर संकेत साफ हैं—

  • मिडिल ऑर्डर का साथ नहीं
  • बड़े लक्ष्य के सामने साझेदारियां नहीं बनीं
  • रन रेट का दबाव बढ़ता गया

वनडे क्रिकेट अब अकेले शतक से नहीं जीता जाता। फिनिशिंग और सपोर्ट उतने ही जरूरी हैं।

रिकॉर्ड शर्मनाक या हालात का नतीजा?

“शर्मनाक रिकॉर्ड” सुनने में कठोर लगता है।
लेकिन सच यह भी है कि कोहली अक्सर उन मैचों में शतक लगा रहे हैं, जहां टीम मुश्किल हालात में होती है।

फर्क बस इतना है कि—

  • पहले ऐसी पारियां जीत में बदल जाती थीं
  • अब टीम कॉम्बिनेशन और टेम्पो कहीं-कहीं चूक रहा है
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