Gavaskar – नागपुर में बल्ला बोल रहा था, और स्टैंड्स में बैठा हर शख्स समझ रहा था कि यह सिर्फ एक और टी20 पारी नहीं है। जब अभिषेक शर्मा छक्के पर छक्का जड़ रहे थे, तब कमेंट्री बॉक्स में बैठे सुनील गावस्कर भी खुद को रोक नहीं पाए। फर्क बस इतना था कि इस बार तारीफ किसी रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि क्रिकेट के बदलते दौर की हो रही थी।
भारत ने पहला टी20 न्यूजीलैंड के खिलाफ 48 रनों से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली, लेकिन मैच के बाद चर्चा का केंद्र स्कोरलाइन नहीं, अभिषेक शर्मा की 84 रन की विस्फोटक पारी रही।
“जितनी गेंदों में वो फिफ्टी बनाते हैं…” – गावस्कर का चुटीला सच
मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बात करते हुए सुनील गावस्कर ने ऐसी लाइन कही, जो सीधा दिल में उतर गई।
“जितनी गेंदों में वह हाफ सेंचुरी बनाते हैं, उतनी ही गेंदों में मैं अपना खाता खोलता था। बहुत बड़ा फर्क है।”
यह महज मज़ाक नहीं था। यह एक दिग्गज का ईमानदार कबूलनामा था कि क्रिकेट अब वैसा नहीं रहा। जहां गावस्कर के दौर में विकेट बचाना प्राथमिकता थी, वहीं आज अभिषेक शर्मा जैसे बल्लेबाज पहले ओवर से मैच तोड़ने आते हैं।
35 गेंद, 84 रन और पूरी तरह कंट्रोल में पारी
अभिषेक शर्मा ने 35 गेंदों में 84 रन बनाए।
स्कोरकार्ड पर नंबर बड़े थे—
- 8 छक्के
- 5 चौके
- 22 गेंदों में फिफ्टी
- 240 का स्ट्राइक रेट
लेकिन खास बात यह थी कि यह पारी हड़बड़ी में नहीं आई। हर शॉट के पीछे तैयारी दिख रही थी।
न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने शॉर्ट बॉल, स्लोअर, वाइड यॉर्कर—सब कुछ आजमाया।
लेकिन अभिषेक हर प्लान के लिए तैयार थे।
“200 के स्ट्राइक रेट के लिए इरादा चाहिए” – अभिषेक की सोच
मैच के बाद अभिषेक शर्मा ने अपनी सिक्स-हिटिंग पर खुलकर बात की।
उन्होंने साफ कहा कि यह कोई तुक्का नहीं है।
“अगर आपको 200 या उससे ज्यादा के स्ट्राइक रेट से खेलना है, तो इरादा रखना पड़ता है। और उसके लिए बहुत प्रैक्टिस चाहिए।”
अभिषेक जानते हैं कि अब हर टीम उनके लिए प्लान बनाकर आती है।
लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तैयारी अब सिर्फ नेट्स तक सीमित नहीं है।
“यह सिर्फ फील्डिंग की बात नहीं है। पिच और बॉलिंग—सब कुछ दिमाग में रहता है। मेरे पास मैच से पहले दो-तीन दिन थे, मैं जानता था कि मुझे चुनौती मिलेगी।”
यानी यह आक्रामकता सोची-समझी है, अचानक नहीं।
क्या छक्के मारना हाई-रिस्क है? अभिषेक का साफ जवाब
जब उनसे पूछा गया कि क्या लगातार छक्के मारना हाई-रिस्क स्ट्रैटेजी है, तो जवाब बेहद दिलचस्प था।
“मुझे नहीं लगता कि यह हाई रिस्क है। यह मेरा कम्फर्ट जोन नहीं कहूंगा, लेकिन टीम के लिए फायदेमंद है।”
अभिषेक का लॉजिक सीधा है—
आज के टी20 में मेन गेंदबाज शुरुआती ओवरों में आते हैं।
अगर वहीं रन निकल गए, तो मैच पर पकड़ बन जाती है।
“अगर मुझे पहले तीन-चार ओवर में रन मिल जाते हैं, तो हमारे पास हमेशा अपर हैंड होता है।”
गावस्कर बनाम अभिषेक: दो दौर, दो सोच
सुनील गावस्कर की तुलना सिर्फ मज़ाक तक सीमित नहीं है।
यह बताती है कि—
- पहले बल्लेबाज टिकने आता था
- अब बल्लेबाज तोड़ने आता है
गावस्कर जहां नई गेंद को सम्मान देते थे,
अभिषेक वहीं नई गेंद को टारगेट मानते हैं।
और दोनों अपने-अपने दौर के लिए बिल्कुल सही हैं।
टीम इंडिया को मिल गया फियरलेस ओपनर
रोहित शर्मा, विराट कोहली के दौर के बाद टीम इंडिया जिस चीज़ की तलाश में थी, वह अब साफ दिख रही है—
- पावरप्ले में डर नहीं
- गेंदबाज के नाम से फर्क नहीं
- प्लान A ही सबसे आक्रामक
अभिषेक शर्मा अब सिर्फ “युवा प्रतिभा” नहीं रहे।
वह अब मैच-विनर मोड में हैं।















