Gambhir – भारतीय क्रिकेट में जब भी पर्दे के पीछे की बातों का ज़िक्र आता है, तो माहौल अचानक भारी हो जाता है। ड्रेसिंग रूम, कोच का कंट्रोल, सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका—ये सब हमेशा से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। और अब, जब गौतम गंभीर ने पहली बार इशारों में ही सही, अपनी चुप्पी तोड़ी है, तो यह साफ हो गया है कि मामला सिर्फ अफवाहों का नहीं है।
पिछले कुछ महीनों से टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और सीनियर खिलाड़ियों के बीच कथित अनबन की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। रोहित शर्मा, विराट कोहली और गंभीर—तीनों के रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक चर्चा गर्म थी। अब गंभीर के ताज़ा बयान ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।
“मुझे अपनों के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है” – गंभीर का सीधा इशारा
गौतम गंभीर ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बिना किसी का नाम लिए बहुत कुछ कह दिया।
उन्होंने लिखा,
“जब गुबार शांत होगा तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ का सच और लॉजिक साफ हो जाएगा। तब तक तो मुझे इस पर हंसी आ रही है कि मुझे अपनों के खिलाफ ही खड़ा किया जा रहा है जबकि वे बेस्ट हैं।”
यह बयान छोटा है, लेकिन इसके मायने बड़े हैं।
‘अपने’, ‘बेस्ट’ और ‘मेरे खिलाफ खड़ा किया जा रहा है’—इन शब्दों ने यह साफ कर दिया कि निशाना किन पर है।
शशि थरूर की तारीफ और गंभीर की प्रतिक्रिया
दरअसल, गंभीर का यह पोस्ट शशि थरूर की तारीफ के जवाब में आया।
थरूर ने नागपुर में गंभीर से मुलाकात के बाद लिखा था—
“एक ऐसे शख्स जिनका भारत में काम प्रधानमंत्री के बाद सबसे ज्यादा कठिन है। लाखों लोग रोज सवाल उठाते हैं, लेकिन वह शांत रहते हैं और बेखौफ आगे बढ़ते हैं।”
थरूर की इस सार्वजनिक सराहना ने गंभीर को बोलने का मौका दिया, और उन्होंने उसी मौके पर अपने खिलाफ चल रही धारणाओं पर तंज कस दिया।
रोहित-विराट और गंभीर: कहां से शुरू हुआ विवाद?
गंभीर के कोच बनने के बाद से ही खबरें आने लगी थीं कि उनका सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल सहज नहीं है।
- ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान वनडे सीरीज में
- विराट कोहली और गंभीर के बीच बातचीत बंद होने की खबरें
- रोहित शर्मा और गंभीर के रिश्तों में तनाव
यहां तक कहा गया कि प्रैक्टिस सेशंस के दौरान दोनों एक-दूसरे को इग्नोर करते हैं।
पीटीआई और कुछ हिंदी अखबारों की रिपोर्ट्स ने इन चर्चाओं को और हवा दी।
Ro-Ko के रिटायरमेंट तक जोड़ दी गई कहानी
मामला यहीं नहीं रुका।
रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से हटने के फैसले के पीछे भी कुछ फैंस ने गौतम गंभीर को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया पर यह धारणा तेजी से फैली कि—
- गंभीर सीनियर खिलाड़ियों से आगे बढ़ना चाहते हैं
- वह टीम को पूरी तरह नई दिशा देना चाहते हैं
- और Ro-Ko युग को खत्म करने के पक्ष में हैं
हालांकि इन बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई।
प्रदर्शन ने बढ़ाई मुश्किलें
अगर टीम का प्रदर्शन मजबूत होता, तो शायद ये चर्चाएं इतनी तेज नहीं होतीं।
लेकिन गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट क्रिकेट में भारत का ग्राफ नीचे गया।
- न्यूजीलैंड ने भारत में टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप किया
- दक्षिण अफ्रीका ने भी घरेलू टेस्ट सीरीज जीती
- न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज पर कब्जा जमाया
एक समय घर में अजेय मानी जाने वाली टीम इंडिया, अब अपने किले में ही घिरती दिखी।
सोशल मीडिया ट्रायल और “अलग टेस्ट कोच” की मांग
इन नतीजों के बाद गंभीर को लेकर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।
- सोशल मीडिया पर मीम्स
- कोचिंग स्टाइल पर सवाल
- टेस्ट टीम के लिए अलग कोच की मांग
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भारत ड्रॉ तक नहीं बचा सका, जिसके बाद गंभीर को टेस्ट कोच से हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी।
तब गंभीर ने साफ कहा था—
“मेरे बारे में फैसला बीसीसीआई को करना है।”
गंभीर का संदेश क्या है?
गौतम गंभीर के हालिया बयान से एक बात साफ है—
वह खुद को सीनियर खिलाड़ियों के खिलाफ खड़ा किए जाने की कहानी से खुश नहीं हैं।
उनका कहना, भले इशारों में हो, लेकिन संदेश सीधा है—
- कोच के ‘असीमित अधिकार’ की बात बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है
- उन्हें जानबूझकर अपनों के खिलाफ दिखाया जा रहा है
- जबकि वह खिलाड़ियों को अब भी “बेस्ट” मानते हैं















