Arshdeep – कभी टीम में, कभी बाहर। कभी नई गेंद, कभी डेथ ओवर्स। और कभी चयनकर्ताओं की लिस्ट में नाम, कभी सिर्फ स्टैंड्स से मैच देखने की बारी। लेकिन इन सबके बीच अगर कोई भारतीय क्रिकेटर मुस्कुराता हुआ आगे बढ़ रहा है, तो वह हैं अर्शदीप सिंह।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 में भारत की जीत के बाद जब उनसे पूछा गया कि लगातार अंदर-बाहर होने से क्या फर्क पड़ा, तो जवाब वही था जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है—हल्का-फुल्का, लेकिन गहरा।
“जैसे मैं टीम से अंदर-बाहर होता हूं, उसका फायदा भी है। मेरी गेंद भी अंदर-बाहर जाती है,” अर्शदीप ने मुस्कुराते हुए कहा।
यह लाइन सिर्फ मज़ाक नहीं थी। यह उस मानसिकता का बयान थी, जो आज उन्हें भारत का सबसे भरोसेमंद टी20 गेंदबाज बनाए हुए है।
चयन से ज्यादा कंट्रोल पर भरोसा
गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय टीम का संयोजन लगातार बदलता रहा है।
इस उथल-पुथल में अर्शदीप सिंह को भी कई बार बाहर बैठना पड़ा।
- 2025 में भारत ने 21 टी20 खेले
- अर्शदीप को सिर्फ 13 मैच मिले
- एशिया कप में प्रभावशाली रिकॉर्ड के बावजूद अंतिम एकादश से बाहर
लेकिन इन आंकड़ों में कहीं भी शिकायत नहीं दिखती।
अर्शदीप का फोकस साफ है—जो उनके कंट्रोल में है, वही मायने रखता है।
“मेरा काम हर समय तैयार रहना है। जब भी टीम मुझे नई या पुरानी गेंद देगी, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा,” उन्होंने कहा।
73 मैच, 111 विकेट और अब भी नंबर वन
चयन को लेकर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन प्रदर्शन को लेकर नहीं।
- 73 टी20 इंटरनेशनल
- 111 विकेट
- भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टी20 गेंदबाज
यह रिकॉर्ड बताता है कि अर्शदीप सिर्फ सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उसका मजबूत स्तंभ हैं।
इसके बावजूद, उन्हें टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर अक्सर नजरअंदाज किया गया।
लेकिन अर्शदीप ने इसे कभी निजी तौर पर नहीं लिया।
“मेरा लक्ष्य इस सफर का आनंद लेना है, वर्तमान में बने रहना है,” उन्होंने कहा।
फ्लैट पिच, भारी रन और गेंदबाज की प्रार्थना
आज के टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए हालात आसान नहीं हैं।
फ्लैट पिच, छोटे मैदान और बेखौफ बल्लेबाज—सब कुछ गेंदबाज के खिलाफ जाता है।
अर्शदीप ने इस सच्चाई को भी पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया।
“जब बल्लेबाजी के लिए अच्छी पिच मिलती है, तो आप यही प्रार्थना करते हो—हे भगवान, आज मुझे बचा लो।”
लेकिन यहीं से प्रोफेशनलिज्म शुरू होता है।
टीम मीटिंग में प्लान बनता है।
मैच के दिन उसे लागू करना होता है।
और अगर प्लान नहीं चला—तो अगला मैच इंतज़ार करता है।
हर बल्लेबाज, हर पिच—अलग प्लान
अर्शदीप का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में एक ही रणनीति हर जगह काम नहीं करती।
“हमें यह जानना होता है कि किस पिच पर, किस बल्लेबाज के खिलाफ क्या काम करेगा।”
और अगर प्लान A फेल हो जाए?
“तो अगले मैच में बदलाव करना पड़ेगा। परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बदलती रहती है।”
यह लचीलापन ही अर्शदीप की असली ताकत है।
नेट्स में एक दिलचस्प राज़
बातचीत के दौरान अर्शदीप ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसने सबको चौंका दिया।
उन्होंने बताया कि आक्रामक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा नेट प्रैक्टिस में उनके खिलाफ बल्लेबाजी करना पसंद नहीं करते।
“अभिषेक हमेशा कहता है—मैं तुम्हारे खिलाफ बैटिंग नहीं करना चाहता।”
अर्शदीप इसे मज़ाक में कहते हैं, लेकिन इसके पीछे सम्मान साफ झलकता है।
“हमारे लिए अच्छी बात है कि हमें उसे गेंदबाजी नहीं करनी पड़ती। मैंने उसके खिलाफ काफी क्रिकेट खेली है और इस स्तर पर उसे शानदार प्रदर्शन करते देखना अच्छा लगता है।”
गंभीर दौर में शांत चेहरा
जब टीम में बदलाव तेज हों, आलोचनाएं हों और सोशल मीडिया सवाल पूछ रहा हो—
उस दौर में शांत रहना आसान नहीं होता।
लेकिन अर्शदीप सिंह उसी शांत प्रोफाइल के खिलाड़ी हैं,
जो गेंद से जवाब देना पसंद करते हैं, शब्दों से नहीं।
न अंदर-बाहर होने की शिकायत,
न चयन पर तंज,
न भविष्य को लेकर बेचैनी।















