Bishnoi : एक साल की मेहनत और आत्मनिरीक्षण बिश्नोई की दमदार वापसी

Atul Kumar
Published On:
Bishnoi

Bishnoi – एक साल पहले तक रवि बिश्नोई भारतीय टीम से बाहर थे। आईपीएल खराब गया था, कॉन्ट्रैक्ट हाथ से निकल चुका था और वापसी की राह आसान नहीं दिख रही थी। लेकिन गुवाहाटी में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 के बाद तस्वीर बदल चुकी है। चार ओवर, 18 रन, दो विकेट—और उससे भी अहम, एक ऐसा आत्मविश्वास जो बताता है कि यह वापसी इत्तेफाक नहीं है।

मैच के बाद बिश्नोई के शब्दों में न तो कोई शिकायत थी, न ही कोई दिखावा। बस एक सीधी बात—कड़ी मेहनत, आत्मनिरीक्षण और लेंथ पर कंट्रोल।

एक साल का आत्ममंथन, वहीं से बदली कहानी

रवि बिश्नोई ने खुलकर स्वीकार किया कि पिछला आईपीएल उनके करियर का मुश्किल दौर था। प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और इसका असर सीधे टीम इंडिया की रेस पर पड़ा।

“पिछले एक साल में मैंने अपनी लेंथ पर बहुत काम किया है। पिछले आईपीएल में मेरा लाइन और लेंथ पर कंट्रोल नहीं था,”
बिश्नोई ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा।

टी20 क्रिकेट में लेग स्पिनर के लिए मार झेलना नई बात नहीं, लेकिन बिश्नोई समझ चुके थे कि अगर कंट्रोल नहीं सुधरा, तो सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होगा।

5–6 मीटर की लेंथ: छोटा सा बदलाव, बड़ा असर

बिश्नोई ने अपनी गेंदबाज़ी में जो सबसे बड़ा बदलाव किया, वह था लेंथ का चयन।

“मैंने स्टंप्स पर 5–6 मीटर की लेंथ पर गेंदबाज़ी करने की कोशिश की, क्योंकि उस लेंथ पर शॉट लगाना मुश्किल होता है।”

यही वजह रही कि न्यूजीलैंड के बल्लेबाज़ मध्य ओवरों में खुलकर हाथ नहीं खोल सके। गेंद बहुत फुल नहीं थी कि ड्राइव हो जाए, और बहुत छोटी भी नहीं कि कट या पुल आसान हो।

यह वही बारीकी है, जो अच्छे स्पिनर को मैच-विनर बनाती है।

टीम से बाहर रहना आसान नहीं होता

रवि बिश्नोई ने यह भी माना कि भारतीय टीम से बाहर रहना मानसिक तौर पर सबसे कठिन दौर होता है।

“जब आप टीम से बाहर होते हैं तो काफी मुश्किल होता है। यह भारतीय टीम बहुत मजबूत है और इसमें जगह बनाना आसान नहीं है। मौके बहुत सीमित मिलते हैं।”

यहीं से घरेलू क्रिकेट की अहमियत सामने आती है। बिश्नोई ने माना कि घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन ही उनकी वापसी की नींव बना।

आईपीएल झटका, लेकिन नई शुरुआत

पिछले आईपीएल के बाद लखनऊ सुपर जायंट्स ने बिश्नोई को रिलीज कर दिया था। उस वक्त यह बड़ा झटका माना गया। लेकिन क्रिकेट में एक दरवाज़ा बंद होता है, तो दूसरा खुलता है।

पिछली नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 7.20 करोड़ रुपये में खरीदा। यह सिर्फ भरोसे की रकम नहीं थी, बल्कि संकेत था कि फ्रेंचाइज़ी अब भी उनकी क्षमता पर विश्वास रखती है।

अचानक मिला मौका, और नर्वस शुरुआत

दिलचस्प बात यह रही कि बिश्नोई इस सीरीज़ के लिए शुरुआती स्क्वॉड में भी नहीं थे। उन्हें मौका मिला वाशिंगटन सुंदर के चोटिल होने के बाद।

उन्होंने माना कि मैदान पर उतरते वक्त नर्वसनेस थी।

“शुरू में मैं थोड़ा नर्वस था, लेकिन साथ ही उत्साहित भी। जब भी मौका मिलता है, आपको अच्छा करना होता है—तो घबराहट और उत्साह दोनों होते हैं।”

लेकिन पहले ही स्पेल के बाद वह नर्वसनेस गायब हो चुकी थी।

बुमराह, हार्दिक और टीम का असर

बिश्नोई ने अपनी सफलता का श्रेय सिर्फ खुद को नहीं दिया। उन्होंने गेंदबाज़ी यूनिट की तारीफ की, खासकर जसप्रीत बुमराह की।

“जस्सी भाई ने अच्छी गेंदबाज़ी की, हार्दिक भाई ने भी, हर्षित ने शुरुआत में विकेट लिया। अगर शुरुआत में ही 2–3 विकेट गिर जाएं, तो बल्लेबाज़ी करने वाली टीम के लिए मुश्किल हो जाती है।”

यही टीम गेम टी20 में फर्क पैदा करता है—एक छोर से दबाव, दूसरे छोर से विकेट।

स्पीड नहीं, फीलिंग पर भरोसा

बिश्नोई ने एक दिलचस्प बात और कही—कि वह स्पीड के नंबरों के पीछे नहीं भागते।

“ऐसा नहीं है कि मुझे 100 किमी/घंटा से ऊपर या नीचे ही गेंदबाज़ी करनी है। मैं उस दिन जैसा महसूस करता हूं, वैसी ही गेंदबाज़ी करता हूं।”

यह बयान बताता है कि अब वह गेंदबाज़ी को सिर्फ तकनीक नहीं, अहसास से भी जोड़ रहे हैं।

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