Rahane – न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में लगातार तीन नाकाम पारियों के बाद संजू सैमसन एक बार फिर उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां हर रन नहीं—हर फैसला मायने रखता है। सवाल सिर्फ फॉर्म का नहीं है, सवाल पहचान का है।
क्या संजू को वही बनना चाहिए, जो दूसरे छोर पर चमक रहा है? या फिर उन्हें वही रहना चाहिए, जो वह असल में हैं? इसी बहस के बीच, भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत लेकिन ठोस दिमागों में से एक अजिंक्य रहाणे सामने आए हैं—और उन्होंने बिना लाग-लपेट के बात रख दी है।
अभिषेक बनने की ज़रूरत नहीं—रहाणे का सीधा संदेश
क्रिकबज से बातचीत में अजिंक्य रहाणे ने साफ कहा कि संजू सैमसन को अभिषेक शर्मा की तरह बल्लेबाज़ी करने की ज़रूरत नहीं है। उनका मानना है कि संजू का संकट तकनीक से ज़्यादा मानसिक है—और उसकी जड़ तुलना में छुपी है।
रहाणे के शब्दों में, जब दूसरे छोर पर अभिषेक जैसा खिलाड़ी हो—जो पहली गेंद से मैच को पकड़ ले—तो अनजाने में दबाव बनता है कि आप भी वैसा ही करें। और यहीं से चीज़ें बिगड़ती हैं।
आंकड़े जो दबाव बढ़ाते हैं
टी20 वर्ल्ड कप 2026 की तैयारी के बीच संजू के ओपनिंग रोल पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि हालिया आंकड़े राहत नहीं देते।
| अवधि | रन | औसत | स्ट्राइक रेट |
|---|---|---|---|
| पिछली 9 पारियां (ओपनर) | 104 | 11.55 | 133.33 |
टी20 में 133 का स्ट्राइक रेट काग़ज़ पर ठीक लगता है, लेकिन जब पास में अभिषेक शर्मा 200+ की रफ्तार से खेल रहे हों, तो तुलना अपने आप शुरू हो जाती है।
अभिषेक सुपरहिट, संजू संघर्षरत—यहीं फंसा मामला
कुछ समय पहले तक संजू–अभिषेक की जोड़ी भारत के लिए हिट थी। पावरप्ले में बैलेंस था—एक तरफ़ विस्फोट, दूसरी तरफ़ क्लास। अब तस्वीर बदली है। अभिषेक रन बरसा रहे हैं, जबकि संजू पिछले 10 मैचों में बतौर ओपनर लय नहीं पकड़ पाए।
और जैसे-जैसे रन नहीं आते, टीम कॉम्बिनेशन की बहस तेज़ होती जाती है।
ईशान किशन का उभार, संजू की चुनौती
स्थिति को और जटिल बना दिया है ईशान किशन ने—जो बैकअप ओपनर के तौर पर आए, लेकिन नंबर 3 पर उतरकर दमदार पारियां खेल रहे हैं। रन भी, इंटेंट भी। ऐसे में चयनकर्ताओं की नज़र उसी खिलाड़ी पर जाती है जो “रिदम” में दिखे।
यही वजह है कि रहाणे “बातचीत” पर ज़ोर देते हैं।
तुम ये सारे मैच खेलोगे—भरोसा सबसे बड़ा इलाज
रहाणे के मुताबिक इस वक्त टीम मैनेजमेंट और कप्तान सूर्यकुमार यादव की भूमिका निर्णायक है। उनका सुझाव साफ है—संजू को यह भरोसा दिया जाए कि उनकी जगह सुरक्षित है।
रहाणे कहते हैं,
“मैनेजमेंट और कैप्टन को संजू से कहना चाहिए—तुम ये सारे मैच खेलोगे और वर्ल्ड कप में भी खेलोगे। अपनी जगह की चिंता मत करो।”
टी20 में आत्मविश्वास ही करंसी है। और भरोसा—उसका ब्याज।
तुलना छोड़ो, अपना गेम पकड़ो
रहाणे का सबसे अहम पॉइंट यही है—तुलना बंद। अभिषेक अलग खिलाड़ी हैं; संजू अलग। दोनों की ताक़तें अलग हैं।
“चलो अभिषेक से तुलना नहीं करते। संजू सैमसन में अलग काबिलियत है।”
यह लाइन छोटी है, लेकिन संदेश बड़ा। संजू की सबसे बड़ी गलती यही हो सकती है कि वह खुद को किसी और में ढालने की कोशिश करें।
घरेलू क्रिकेट की याद दिलाते हैं रहाणे
रहाणे ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का उदाहरण देते हुए बताया कि संजू जब घरेलू क्रिकेट में होते हैं, तो अपना नैचुरल गेम खेलते हैं—और सफल भी रहते हैं।
यही नैचुरल गेम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लौटना चाहिए—बिना ओवरथिंकिंग, बिना जल्दबाज़ी।
हर मैच “फिनिश” नहीं मांगता
रहाणे की सलाह में व्यावहारिकता भी है। उनका कहना है कि हर बार मैच को खत्म करने की ज़रूरत नहीं।
“15 गेंद में 25, 20 गेंद में 30–35 रन भी फॉर्म में लौटने के लिए काफी हैं।”
मतलब साफ—पहले समय बिताओ, पहले ओवर-दो ओवर निकालो, फिर गियर बदलो। टी20 सिर्फ छक्कों का खेल नहीं, टेम्पो का खेल भी है।
राजस्थान रॉयल्स वाला संजू याद है?
रहाणे एक और अहम बात याद दिलाते हैं—राजस्थान रॉयल्स के लिए संजू ने कई बार अकेले दम पर मैच जिताए हैं। टाइमिंग, प्लेसमेंट, शॉट सेलेक्शन—सब कुछ रहा है।
वही खिलाड़ी आज भी है। बस उसे खुद को याद दिलाने की ज़रूरत है।
टीम मैनेजमेंट की कसौटी
यह सिर्फ संजू की परीक्षा नहीं है। यह मैनेजमेंट की भी परीक्षा है—क्या वे फॉर्म के शोर में भरोसे की आवाज़ सुन पाएंगे? या फिर तात्कालिक समाधान चुनेंगे?















