Gavaskar : गावस्कर बोले—यह सीरीज़ अभ्यास है असली काम 7 फरवरी से

Atul Kumar
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Gavaskar

Gavaskar – गुवाहाटी की शाम खत्म होते-होते स्कोरबोर्ड ने कहानी सुना दी थी, लेकिन असली मैसेज बाद में आया—सुनील गावस्कर की जुबान से। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ में भारत की एक और दबदबे वाली जीत के बाद गावस्कर ने साफ कहा: इसे अभ्यास समझिए। असली इम्तिहान 7 फरवरी से शुरू होगा।

भारत ने तीसरे टी20 में आठ विकेट से जीत दर्ज कर पांच मैचों की सीरीज़ में 3–0 की अजेय बढ़त बना ली है। रन बने, रिकॉर्ड टूटे, लेकिन गावस्कर की नज़र कहीं और थी—टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर।

यह सीरीज़ भूख जगाने जैसी है”

जियो हॉटस्टार के एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान गावस्कर ने कहा,
“यह सीरीज़ तो भूख जगाने की तरह है। असली काम 7 फरवरी से शुरू होगा। सीरीज़ जीतने के बाद अब सारा ध्यान विश्व कप खिताब का बचाव करने पर है।”

यह बयान सिर्फ एक लाइन नहीं, एक माइंडसेट है। संदेश साफ है—वर्तमान जीतें अच्छी हैं, लेकिन मंज़िल बड़ी है।

जीत के बावजूद कोई ढिलाई नहीं

गावस्कर ने जिस बात पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया, वह है तैयारी की गंभीरता। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया कुछ भी हल्के में नहीं ले रही।

“इन खिलाड़ियों में से कुछ को तो बल्लेबाज़ी का मौका भी नहीं मिला है। फिर भी वे रेंज हिटिंग, टाइमिंग, रिदम, बैट फ्लो और पिक-अप पर काम कर रहे हैं। इससे दिखता है कि इस टीम का फोकस पूरी तरह लक्ष्य पर है।”

यानी जो खिलाड़ी मैच में नहीं उतरे, वे भी वर्कलोड और स्किल-शार्पनिंग में पीछे नहीं हैं। यही डिटेल्स बड़े टूर्नामेंट जीताती हैं।

बल्लेबाज़ी की गहराई: सबसे बड़ा हथियार

गावस्कर ने भारत की बैटिंग डेप्थ को इस टीम की पहचान बताया—और उदाहरण भी दिए।
“जब आपके पास निचले क्रम में रिंकू सिंह और हार्दिक पांड्या जैसे बल्लेबाज़ हों, और उन्हें दो मैचों में बल्लेबाज़ी करने की ज़रूरत ही न पड़े, फिर भी भारत आसानी से जीत रहा हो—तो इससे टीम की क्षमता और गहराई का अंदाज़ा लगता है।”

यह कोई छोटी बात नहीं। आमतौर पर टी20 में मैच फंसते हैं, तब फिनिशर्स की परीक्षा होती है। यहां स्थिति यह है कि टॉप ऑर्डर ही काम तमाम कर दे रहा है।

गुवाहाटी की जीत: स्कोर से ज़्यादा संदेश

रविवार को गुवाहाटी में भारत ने न्यूजीलैंड को आठ विकेट से हराया। लक्ष्य 154 रन था—और भारत ने उसे 10 ओवर में हासिल कर लिया। यह जीत सिर्फ तेज़ नहीं थी, निर्दयी थी।

टीम ने दिखाया कि:

  • पावरप्ले में इंटेंट क्या होता है
  • मिडिल ओवर्स में रिस्क कैसे मैनेज किया जाता है
  • और लक्ष्य का पीछा कैसे “क्लीन” रखा जाता है

वर्ल्ड कप डिफेंस: तैयारी का ब्लूप्रिंट

गावस्कर की बातों से एक ब्लूप्रिंट साफ उभरता है—

  1. रोल-क्लैरिटी: हर खिलाड़ी को पता है कि उससे क्या चाहिए।
  2. वर्कलोड मैनेजमेंट: खेलने वाले भी तैयार, न खेलने वाले भी।
  3. मेंटल फ्रेशनेस: जीत के बाद भी ज़मीन से जुड़े रहना।

क्यों ‘अभ्यास’ कहना सही है?

गावस्कर का “अभ्यास” वाला शब्द कुछ लोगों को हल्का लग सकता है। लेकिन संदर्भ समझिए।
यह अभ्यास है—

  • कॉम्बिनेशन परखने का
  • टेम्पो सेट करने का
  • और दबाव के बिना एक्सपेरिमेंट करने का

जब टीम 3–0 से आगे हो और फिर भी फोकस प्रोसेस पर हो, तो समझिए कि तैयारी सही दिशा में है।

आत्मविश्वास बनाम अति-आत्मविश्वास

गावस्कर ने जिस संतुलन की बात की, वही इस टीम की ताकत है। आत्मविश्वास है—क्योंकि जीत आ रही है। अति-आत्मविश्वास नहीं—क्योंकि असली लक्ष्य सामने है।

यह फर्क अक्सर ट्रॉफी तय करता है।

आंकड़ों के पीछे की कहानी

नीचे एक नज़र डालिए—क्यों भारत की गहराई पर गावस्कर इतना भरोसा दिखा रहे हैं:

पहलूसंकेत
टॉप ऑर्डरलक्ष्य जल्दी चेज़
मिडिल ऑर्डरअवसर सीमित, पर तैयार
फिनिशर्सबिना खेले जीत
बेंचरेंज हिटिंग/रिदम पर काम

यानी टीम सिर्फ “प्लेइंग XI” नहीं, स्क्वॉड-डीप है।

फैंस के लिए संदेश

फैंस के लिए यह सीरीज़ एंटरटेनमेंट है। टीम के लिए—टेस्ट ड्राइव। गावस्कर का संदेश साफ है: जीत का जश्न मनाइए, लेकिन निगाहें 7 फरवरी पर टिकाइए।

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