Chahal – गुवाहाटी में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 के दौरान मैदान पर रन बरस रहे थे, लेकिन माइक के पीछे बैठे युजवेंद्र चहल ने जो कहा, उसने भारतीय टी-20 क्रिकेट की सोच को नंगे शब्दों में खोल दिया।
चहल ने साफ माना कि 2022 से पहले की टीम इंडिया और आज की टीम इंडिया—दो अलग कहानियां हैं। और इस बदलाव की धुरी रहे रोहित शर्मा।
2022 से पहले मिडिल ओवर्स में हम अटक जाते थे
कमेंट्री के दौरान चहल ने बिना घुमा-फिराकर स्वीकार किया कि पहले भारत की टी-20 अप्रोच सीमित थी।
उनके मुताबिक, 6 से 15 ओवर के बीच टीम अक्सर लय खो देती थी, रन रुक जाते थे और नतीजा—स्कोर 180 के आसपास सिमट जाता था।
चहल ने इशारों-इशारों में कहा कि तब विकेट गिरने का डर बल्लेबाज़ों के दिमाग में बैठा रहता था। जोखिम कम, सुरक्षा ज़्यादा।
रोहित आए, सोच बदली—पूरी टीम ने फॉलो किया
रोहित शर्मा ने कप्तानी संभालते ही यह तय किया कि टी-20 में डर की कोई जगह नहीं। चहल के शब्दों में, रोहित का विज़न बिल्कुल साफ था—
विकेट गिरे तो गिरें, प्रहार नहीं रुकेगा।
यहीं से भारत की टी-20 क्रिकेट की दिशा बदली। हर बल्लेबाज़ को यह मानसिक आज़ादी मिली कि वह अपना शॉट खेले—बिना यह सोचे कि आउट हो गया तो क्या होगा।
अब हर बल्लेबाज़ 200+ स्ट्राइक रेट सोचकर उतरता है
चहल की सबसे मजबूत लाइन यही थी—
“अब अगर मिडिल ऑर्डर में विकेट गिर भी जाते हैं, तब भी हम प्रहार करना बंद नहीं करते।”
आज टीम इंडिया का डीएनए ऐसा है कि मैदान पर मौजूद हर खिलाड़ी 200+ स्ट्राइक रेट के माइंडसेट के साथ बल्लेबाज़ी करता है। नतीजा? विपक्षी गेंदबाज़ों पर पहले ओवर से दबाव।
तब और अब: फर्क साफ दिखता है
| पहलू | 2022 से पहले | 2022 के बाद |
|---|---|---|
| मिडिल ओवर्स | संभल-संभल कर | लगातार हमला |
| विकेट का डर | ज्यादा | न्यूनतम |
| औसत स्कोर | ~170–180 | 200+ सामान्य |
| बल्लेबाज़ी सोच | सुरक्षा | आक्रामकता |
यही फर्क आज के नतीजों में दिखता है—भारत बड़े लक्ष्य भी आराम से चेज़ कर रहा है।
2022 की निराशा से 2024 की ट्रॉफी तक
रोहित शर्मा के लिए 2022 टी-20 वर्ल्ड कप बड़ा झटका था। लेकिन उसी हार ने बदलाव की जमीन तैयार की।
2024 वर्ल्ड कप से पहले रोहित ने कुछ बड़े, साहसी फैसले लिए—सबसे बड़ा फैसला विराट कोहली को ओपनर बनाना।
उस फैसले पर तब सवाल उठे, लेकिन नतीजा सबके सामने है—
भारत ने 2024 का टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया।
रोहित गए, सोच रह गई
वर्ल्ड कप जीतने के बाद रोहित शर्मा ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। लेकिन चहल के मुताबिक, वह अपनी सोच छोड़कर गए।
आज सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम ने उसी आक्रामक अप्रोच को और तेज़ किया है। फर्क बस इतना है कि अब युवाओं का रोल बढ़ गया है—लेकिन डर आज भी नहीं है।
बेंच स्ट्रेंथ + निडर माइंडसेट = नंबर-1 टीम
चहल का बयान ऐसे वक्त आया है जब भारत—
- टी-20 रैंकिंग में नंबर-1 है
- बेंच स्ट्रेंथ पर दुनिया हैरान है
- और हर मैच में नया मैच-विनर सामने आ रहा है
यह सब सिर्फ टैलेंट नहीं, मेंटल फ्रीडम का नतीजा है—जो रोहित के दौर में मिली।
बड़ी तस्वीर: जीत का नया मंत्र
रोहित शर्मा की कप्तानी ने भारतीय टीम को सिर्फ जीतना नहीं सिखाया—
डर के बिना खेलना सिखाया।
आज भारत बड़े से बड़े लक्ष्य को देखकर घबराता नहीं। और यही कारण है कि चहल जैसे खिलाड़ी खुलेआम कह रहे हैं—
यह टीम पहले से कहीं ज्यादा घातक है।















