PCB – पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां फैसला सिर्फ एक टूर्नामेंट का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्रिकेट की दिशा तय करेगा। आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने जब भागीदारी पर अंतिम मुहर लगाने से इनकार किया, तो यह मामला तुरंत खेल से निकलकर नीति, कूटनीति और क्रिकेट हितों की बहस में बदल गया।
बांग्लादेश के समर्थन में खड़े होने के बाद अब सवाल यह है—
क्या पाकिस्तान अपनी टीम को वर्ल्ड कप में न भेजकर खुद को नुकसान पहुंचाएगा?
पूर्व खिलाड़ियों और बोर्ड के पूर्व अधिकारियों की राय लगभग एक जैसी है:
समर्थन ठीक है, लेकिन कीमत बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए।
पीसीबी का स्टैंड और समयसीमा
पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने साफ किया है कि पाकिस्तान की भागीदारी या बहिष्कार पर अंतिम फैसला शुक्रवार या सोमवार तक ले लिया जाएगा। यह स्थिति तब बनी जब बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के बाद पाकिस्तान ने सैद्धांतिक रूप से उसका समर्थन किया।
लेकिन अब वही सैद्धांतिक रुख व्यावहारिक सवालों से घिर चुका है।
मोहम्मद हफीज: टीम को जाना चाहिए
पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान मोहम्मद हफीज ने बिना लाग-लपेट के कहा कि पीसीबी को टीम भेजनी चाहिए।
उनका मानना है कि बड़े टूर्नामेंट से दूर रहना खिलाड़ियों और टीम के विकास के लिए नुकसानदायक होगा। खासकर तब, जब पाकिस्तान के पास इस समय एक संतुलित और प्रतिभाशाली स्क्वॉड मौजूद है।
न भेजकर हासिल क्या होगा?” – आरिफ अली अब्बासी
पीसीबी के पूर्व सचिव आरिफ अली अब्बासी का सवाल सबसे सीधा और सबसे तीखा है।
उनके मुताबिक,
पाकिस्तान बांग्लादेश का समर्थन कर रहा है, यह समझ में आता है। लेकिन टीम को वर्ल्ड कप में न भेजकर आईसीसी और अन्य बोर्डों से रिश्ते खराब करने के अलावा पीसीबी को क्या मिलेगा?
जगमोहन डालमिया और आईएस बिंद्रा जैसे दिग्गजों के दौर में बोर्ड से जुड़े रहे अब्बासी ने साफ कहा कि पीसीबी को भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक फैसला लेना चाहिए।
श्रीलंका का नुकसान, पाकिस्तान की जिम्मेदारी?
पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष खालिद महमूद ने एक अहम पहलू उठाया—
अगर पाकिस्तान नहीं जाता है, तो नुकसान सिर्फ पाकिस्तान का नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ मुकाबलों समेत पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में होने हैं। ऐसे में पाकिस्तान के बाहर होने से श्रीलंका क्रिकेट को आर्थिक और आयोजन स्तर पर नुकसान होगा।
उनके शब्दों में,
पीसीबी का रुख सैद्धांतिक रूप से सराहनीय है, लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि क्रिकेट हित सर्वोपरि हैं।
बांग्लादेश को समर्थन मिला ही नहीं – महमूद की दो टूक
खालिद महमूद ने यह भी याद दिलाया कि आईसीसी की बैठक में भारत के खिलाफ मैच हटाने की बांग्लादेश की मांग को किसी अन्य बोर्ड का समर्थन नहीं मिला।
यानी पाकिस्तान अकेला खड़ा रहा।
ऐसे में सवाल उठता है—
क्या अकेले खड़े रहकर खुद को नुकसान पहुंचाना समझदारी है?
मोहसिन खान की चेतावनी
पूर्व टेस्ट बल्लेबाज, पूर्व मुख्य कोच और चयनकर्ता मोहसिन खान ने पीसीबी को साफ चेतावनी दी।
उनका कहना है कि पाकिस्तान-भारत के बीच राजनीतिक मुद्दे अलग हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान को भारत जाकर नहीं खेलना है।
मैच श्रीलंका में हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश बोर्ड खुद आईसीसी के फैसले के खिलाफ न तो अपील करेगा और न ही कानूनी चुनौती देगा।
तो फिर पीसीबी किस आधार पर टीम को रोक सकता है?
इंजमाम और यूसुफ: संतुलन जरूरी
पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक और मोहम्मद यूसुफ ने भावनात्मक बयान देने से बचते हुए संतुलित सलाह दी।
इंजमाम ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में खेलते देखना चाहते हैं।
टीम के पास अच्छे खिलाड़ी हैं और बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है।
बहिष्कार का ठोस कारण नहीं – हारून राशिद
पूर्व टेस्ट बल्लेबाज, कोच और चयनकर्ता हारून राशिद का मानना है कि पाकिस्तान के खेलने की संभावना ज्यादा है।
उनके मुताबिक,
बांग्लादेश का समर्थन एक सही सैद्धांतिक कदम था, लेकिन अब समय आ गया है कि पीसीबी अपने क्रिकेट हितों को प्राथमिकता दे।
टूर्नामेंट से हटने का कोई मजबूत, ठोस कारण फिलहाल मौजूद नहीं है।
बड़ी तस्वीर: सियासत बनाम क्रिकेट
यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि पाकिस्तान क्रिकेट अक्सर खेल और राजनीति के बीच फंस जाता है।
लेकिन इस बार पूर्व खिलाड़ियों और अधिकारियों की राय लगभग एक जैसी है—
अगर नुकसान सिर्फ पाकिस्तान का है, तो फैसले पर दोबारा सोचना चाहिए।















