ODI – कोलंबो की शाम इंग्लैंड क्रिकेट के लिए यादगार बन गई। आर. प्रेमदासा स्टेडियम में जैसे ही हैरी ब्रुक ने 57वीं गेंद पर शतक पूरा किया, माहौल पूरी तरह बदल चुका था। स्टैंड्स में शोर था, श्रीलंकाई गेंदबाजों के कंधे झुके हुए थे और इंग्लैंड की ड्रेसिंग रूम में साफ दिख रहा था—यह सिर्फ एक शतक नहीं, एक कप्तानी पारी थी।
तीसरे और निर्णायक वनडे में ब्रुक ने वो कर दिखाया, जो बड़े खिलाड़ी बड़े मौकों पर करते हैं। 66 गेंदों पर नाबाद 136 रन, 11 चौके, 9 छक्के और 206 से ऊपर का स्ट्राइक रेट—यह पारी सिर्फ स्कोरबोर्ड पर नहीं, बल्कि सीरीज के नतीजे पर लिखी गई।
57 गेंदों का शतक और खास क्लब में एंट्री
हैरी ब्रुक का यह शतक सिर्फ तेज नहीं था, बल्कि ऐतिहासिक भी था। 57 गेंदों में सैकड़ा पूरा कर वह इंग्लैंड के लिए छठा सबसे तेज वनडे शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।
इस उपलब्धि के साथ ब्रुक उस क्लब में शामिल हो गए, जिसमें पहले से जोस बटलर, मोईन अली और जॉनी बैर्यस्टो जैसे पावर हिटर्स मौजूद हैं। खास बात यह रही कि ब्रुक ने यह कारनामा निर्णायक मुकाबले में किया—जब दबाव सबसे ज्यादा होता है।
इंग्लैंड के लिए सबसे तेज वनडे शतक की सूची अब कुछ यूं दिखती है:
| गेंद | खिलाड़ी | विरोधी | साल |
|---|---|---|---|
| 46 | जोस बटलर | पाकिस्तान | 2015 |
| 47 | जोस बटलर | नीदरलैंड | 2015 |
| 50 | जोस बटलर | पाकिस्तान | 2015 |
| 53 | मोईन अली | वेस्टइंडीज | 2017 |
| 54 | जॉनी बैर्यस्टो | स्कॉटलैंड | 2018 |
| 57 | हैरी ब्रुक | श्रीलंका | 2026 |
ब्रुक–रूट की 191 रन की साझेदारी: मैच का टर्निंग पॉइंट
इस मैच का असली मोड़ आया चौथे विकेट के लिए हुई 191 रन की नाबाद साझेदारी से। हैरी ब्रुक और जो रूट ने 113 गेंदों में श्रीलंकाई गेंदबाजी की कमर तोड़ दी।
रूट ने एक छोर संभाला—108 गेंदों पर नाबाद 111 रन।
ब्रुक ने दूसरे छोर से हमला बोला—हर ओवर में दबाव।
यह साझेदारी क्लास और पावर का बेहतरीन मिश्रण थी। एक तरफ रूट का धैर्य, दूसरी तरफ ब्रुक की आक्रामकता। श्रीलंका के लिए फील्ड बदलने, गेंदबाज बदलने—कुछ भी काम नहीं आया।
357/3: इंग्लैंड की बल्लेबाजी का स्टेटमेंट
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 50 ओवरों में 357/3 का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह सिर्फ बड़ा स्कोर नहीं था, बल्कि एक संदेश था—इस टीम की बल्लेबाजी किसी भी कंडीशन में खतरनाक है।
ब्रुक और रूट के अलावा जैकब बेथल ने भी शुरुआती ओवरों में 65 रन की अहम पारी खेली, जिसने मंच तैयार किया। उसके बाद जो हुआ, वह पूरी तरह इंग्लैंड के नाम रहा।
श्रीलंका की कोशिश, लेकिन दबाव भारी पड़ा
357 रन का पीछा आसान नहीं था, लेकिन श्रीलंका की तरफ से पवन रथनायके ने जरूर संघर्ष किया। उनकी 121 रन की जुझारू पारी ने एक वक्त मैच में जान डाल दी थी।
लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। साझेदारी नहीं बन पाई और दबाव बढ़ता चला गया। नतीजा—पूरी टीम 46.4 ओवरों में 304 रन पर सिमट गई।
इंग्लैंड की गेंदबाजी: सामूहिक प्रयास
इस जीत में गेंदबाजों का योगदान भी कम नहीं रहा।
जेमी ओवरटन, लियाम डॉसन, विल जैक्स और आदिल राशिद—चारों ने दो-दो विकेट लेकर श्रीलंका की उम्मीदों पर ब्रेक लगाया।
यह वही संतुलन है, जिसकी इंग्लैंड लंबे समय से तलाश कर रहा था—जहां बल्लेबाज बड़ा स्कोर बनाएं और गेंदबाज उसे डिफेंड करें।
कप्तान हैरी ब्रुक: जिम्मेदारी में निखरता सितारा
यह मैच सिर्फ हैरी ब्रुक की बल्लेबाजी का नहीं था, बल्कि कप्तानी का भी इम्तिहान था। निर्णायक मुकाबला, विदेशी जमीन, दबाव भरा माहौल—और कप्तान खुद सबसे आगे।
ब्रुक की यह पारी बताती है कि वह सिर्फ अगली पीढ़ी का बल्लेबाज नहीं, बल्कि इंग्लैंड का लॉन्ग-टर्म लीडर बनने की पूरी क्षमता रखते हैं।
क्रिकेट एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, ब्रुक का स्ट्राइक रेट और बाउंड्री प्रतिशत इस सीरीज में इंग्लैंड के किसी भी बल्लेबाज से बेहतर रहा।
सीरीज 2-1 से इंग्लैंड के नाम
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने न सिर्फ तीसरा वनडे 53 रनों से जीता, बल्कि तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। शुरुआती मुकाबलों में कड़ी चुनौती के बाद निर्णायक मैच में इस तरह का प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा।
विदेशी धरती पर इस वापसी ने यह भी साफ कर दिया कि इंग्लैंड की वनडे टीम संक्रमण के दौर से बाहर निकल चुकी है।















