India : सूर्या की कला या अभिषेक की रफ्तार—किसकी पारी बेस्ट गावस्कर

Atul Kumar
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India – न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में जो हुआ, वह सिर्फ एक तेज़ रनचेज़ नहीं था—वह भारतीय टी20 क्रिकेट की बदलती परिभाषा थी। एक तरफ अभिषेक शर्मा का बल्ला आग उगल रहा था, दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव अपने ट्रेडमार्क अंदाज़ में असंभव शॉट्स को सामान्य बना रहे थे।

10 ओवर में 154 रन का पीछा, वह भी पहले ही ओवर की पहली गेंद पर विकेट गंवाने के बाद—और फिर सुनील गावस्कर का वह वाक्य, जिसने बहस को जन्म दे दिया: “19–20 का फर्क है।”

तो आखिर गावस्कर के हिसाब से किसकी पारी बेहतर थी—अभिषेक या सूर्या? और क्यों?

68 बनाम 57: नंबर नहीं, नज़रिया अहम

तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा ने 20 गेंदों में 68 रन ठोके—स्ट्राइक रेट करीब 340। उधर सूर्यकुमार यादव ने 26 गेंदों में 57 रन बनाए—स्ट्राइक रेट 220 के आसपास। काग़ज़ पर देखें तो अभिषेक की पारी ज़्यादा विस्फोटक दिखती है। लेकिन क्रिकेट सिर्फ़ अंकगणित नहीं, एस्थेटिक्स और इम्पैक्ट का खेल भी है।

सुनील गावस्कर ने इसी फर्क की ओर इशारा किया।

गावस्कर क्यों झुके सूर्या की ओर?

मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत में गावस्कर थोड़े असमंजस में दिखे—दोनों की तारीफ़ की, फिर फैसला सुनाया। उनके शब्दों में, यह बहुत करीबी कॉल थी, लेकिन सूर्या के पक्ष में फैसला उनके शॉट सेलेक्शन और कठिन शॉट्स की क्लीन एग्ज़िक्यूशन के कारण गया।

ऑफ-स्टंप के बाहर से स्वीप, वह फ्लिक जो सीधे स्टैंड्स में—ये वो शॉट्स हैं जो जोखिम भी हैं और कला भी। गावस्कर के मुताबिक, यही “19–20 का फर्क” बना।

और फिर उन्होंने एक अहम बात कही—किसे फर्क पड़ता है कि किसकी पारी बेहतर थी, जब भारत जीत रहा है?

रिकॉर्ड-चेज़: इतिहास का नया पन्ना

यह जीत सिर्फ़ सीरीज़ की बढ़त नहीं थी, वर्ल्ड रिकॉर्ड भी थी। भारत फुल मेंबर नेशन्स में पहली टीम बनी जिसने 150+ का टी20 लक्ष्य 10 ओवर में चेज़ किया। तुलना के लिए, वेस्टइंडीज़ ने 2024 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 37 गेंद शेष रहते जीत दर्ज की थी—भारत ने इसे 60 गेंद शेष रहते खत्म कर दिया।

40 गेंद, 102 रन: साझेदारी जिसने मैच तोड़ा

पहला विकेट पहली गेंद पर गिरा—और वहीं से कहानी और तेज़ हो गई। अभिषेक और सूर्या ने सिर्फ़ 40 गेंदों में 102 रन जोड़ दिए। फील्ड सेट करने का मौका नहीं, बॉलिंग चेंज बेअसर—यह पूरी तरह कंट्रोल्ड कैओस था।

न्यूजीलैंड को 153 पर सीमित रखने में गेंदबाज़ों का हाथ रहा, खासकर जसप्रीत बुमराह, जिन्होंने 17 रन देकर 3 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच बने। आईसीसी के मैच-सेंटर पर बुमराह के स्पेल को “टर्निंग पॉइंट” कहा गया

किसकी पारी ‘बेस्ट’ थी? जवाब सीधा नहीं

अगर पूछा जाए—सबसे तेज़, सबसे धमाकेदार? अभिषेक।
सबसे क्रिएटिव, सबसे कठिन शॉट्स? सूर्या।

गावस्कर का फैसला भावनात्मक नहीं, तकनीकी था—शॉट की कठिनाई और जोखिम। इसलिए सूर्या को हल्की-सी बढ़त। लेकिन उन्होंने खुद माना—यह फर्क इतना छोटा है कि जीत के शोर में खो जाता है।

सीरीज़ पर कब्ज़ा, आत्मविश्वास चरम पर

भारत ने पहले तीनों मैच जीतकर 5 मैचों की सीरीज़ अपने नाम कर ली। यह सिर्फ़ स्कोरलाइन नहीं, मेंटैलिटी स्टेटमेंट है। टॉप ऑर्डर से लेकर बॉलिंग यूनिट तक—सब सिंक में।

न्यूजीलैंड के लिए यह सीख है; भारत के लिए यह संकेत—टी20 में हम जहां चाहें, जितनी तेज़ी से चाहें, पहुंच सकते हैं।

19–20 का फर्क, लेकिन तस्वीर साफ

अभिषेक और सूर्या—दोनों की पारियां याद रखी जाएंगी। एक ने रफ्तार से कुचल दिया, दूसरे ने कला से। गावस्कर का तराज़ू सूर्या की तरफ़ झुका, लेकिन उन्होंने बहस को वहीं खत्म कर दिया जहां होनी चाहिए—जीत।

और जब जीत इस अंदाज़ में आए, तो “बेस्ट” की बहस भी जश्न का हिस्सा बन जाती है।

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