Dravid – तीन साल की कोचिंग, एक वर्ल्ड कप ट्रॉफी और अनगिनत बातचीत—लेकिन राहुल द्रविड़ जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो सबसे साफ तस्वीर रोहित शर्मा के नेतृत्व की उभरती है। शांत, मज़ाकिया और बदलाव के लिए तैयार। द्रविड़ के शब्दों में कहें तो, “ऐसा कप्तान, जो खुद आगे खड़ा होकर ज़िम्मेदारी ले, कोच की आधी लड़ाई वहीं खत्म हो जाती है।”
कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए भारत के पूर्व मुख्य कोच ने रोहित शर्मा की खुलकर तारीफ की—खासतौर पर उनकी उस सोच की, जिसने भारतीय सफेद गेंद क्रिकेट को एक नई दिशा दी।
“कप्तान तैयार हो, तो संदेश खुद पहुंच जाता है”
राहुल द्रविड़ 2021 से 2024 तक भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे। इसी दौरान रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने अमेरिका में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2024 का खिताब जीता। द्रविड़ के मुताबिक, इस सफर में सबसे बड़ी ताकत कप्तान और कोच के बीच की साफ सोच रही।
द्रविड़ ने कहा,
“जब कप्तान खड़ा होकर कहता है कि मैं यह ज़िम्मेदारी लेता हूं, भले ही इसके लिए रन कुर्बान करने पड़ें, तो उस सोच को टीम तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाता है। रोहित हर चीज़ की अगुआई करते थे, और बतौर कोच मेरा काम सच में आसान हो गया।”
यह सिर्फ बयान नहीं था—यह उस भरोसे की झलक थी, जो ड्रेसिंग रूम के अंदर काम कर रहा था।
दोस्ताना कप्तान, मजबूत तालमेल
रोहित शर्मा की कप्तानी का एक बड़ा पहलू हमेशा रहा है उनका ड्रेसिंग रूम कल्चर। हल्का-फुल्का मज़ाक, खिलाड़ियों के साथ सहज रिश्ता और बिना दबाव के बातचीत—द्रविड़ मानते हैं कि यही वजह थी कि बदलाव पर चर्चा आसान रही।
रोहित को यह जल्दी समझ आ गया था कि सफेद गेंद क्रिकेट अब वही नहीं रहा, जो 8–10 साल पहले था। स्ट्राइक रेट, पावरप्ले अप्रोच और रिस्क—सब कुछ बदल चुका था।
“वह खुद इस पर काफी सोचते थे,” द्रविड़ ने कहा,
“उन्हें पता था कि खेल बदल रहा है। पिछले दस सालों में बल्लेबाजी का तरीका पूरी तरह बदल गया है और कुछ मायनों में हम थोड़े पीछे रह गए थे। हमें आगे बढ़ना था।”
सफेद गेंद क्रिकेट में बदलाव की शुरुआत
द्रविड़ के अनुसार, रोहित सिर्फ बदलाव की बात नहीं कर रहे थे—वह खुद उदाहरण बनकर आगे बढ़े।
2019 वर्ल्ड कप में पांच शतक लगाने वाला बल्लेबाज अगर अपनी लय बदलने को तैयार हो, तो उससे बड़ा संदेश क्या हो सकता है?
“उनका रिकॉर्ड पहले से ही शानदार था,” द्रविड़ ने कहा,
“लेकिन उस लय को बदलने की जरूरत थी। और रोहित ने खुद को आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से ढाल लिया।”
यही वजह रही कि भारत ने टी20 क्रिकेट में ज्यादा आक्रामक अप्रोच अपनाई—चाहे ऊपर से बड़े शॉट्स हों या मिडिल ओवर्स में रिस्क।
बातचीत आसान थी, क्योंकि सोच एक जैसी थी
द्रविड़ ने साफ कहा कि रोहित के साथ काम करना इसलिए आसान था, क्योंकि दोनों इस बात पर सहमत थे कि टीम को ज्यादा जोखिम उठाने की जरूरत है।
“हमें आगे बढ़ाने वाले खिलाड़ी चाहिए थे,” द्रविड़ बोले,
“और रोहित उन खिलाड़ियों में सबसे आगे थे।”
यह वही मानसिकता थी, जिसने भारत को 2024 टी20 वर्ल्ड कप में एक अलग टीम बना दिया—कम डर, ज्यादा इरादा।
कोचिंग भी बदलती है, जैसे खेल बदलता है
रोहित की तारीफ के साथ-साथ द्रविड़ ने कोचिंग पर भी एक अहम बात कही—आज की कोचिंग, कल जैसी नहीं हो सकती।
उन्होंने अपने कोच केकी तारापोर को याद करते हुए कहा,
“वह महान कोच थे। अगर मैं गेंद हवा में मारता था, तो मुझे मैदान में दौड़ाया जाता था। कहा जाता था—गेंद जमीन पर रखो।”
लेकिन द्रविड़ खुद मानते हैं कि आज के क्रिकेट में वही तरीका काम नहीं करेगा।
“अगर आज कोई खिलाड़ी हवा में शॉट न खेले, तो वह टिक ही नहीं पाएगा। इसलिए कोच को भी समय के साथ बदलना होगा।”
यही रोहित–द्रविड़ युग की असली पहचान
रोहित शर्मा की खुली सोच और द्रविड़ की अनुकूल कोचिंग—यही वो कॉम्बिनेशन था, जिसने भारत को सफेद गेंद क्रिकेट में फिर से ट्रेंडसेटर बनाया।















