World Cup – 29 जून 2024 की रात बारबाडोस में जब आखिरी विकेट गिरा था, तब भारतीय क्रिकेट ने सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं जीती थी—उसने 13 साल की बेचैनी, सवालों और अधूरे सपनों को भी पीछे छोड़ दिया था।
उसी जीत के कुछ ही दिनों बाद राहुल द्रविड़ ने मुख्य कोच के पद से विदा ली। लेकिन टीम इंडिया को लेकर उनकी सोच, उनका भरोसा—वह आज भी वैसा ही मजबूत है।
अब, टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले द्रविड़ ने साफ कहा है: भारत इस बार टाइटल डिफेंड करने का सबसे बड़ा दावेदार है।
“फेवरेट जरूर हैं, लेकिन टी20 किसी को माफ नहीं करता”
राहुल द्रविड़ जिस अंदाज़ में बात करते हैं, उसमें कभी अति-आत्मविश्वास नहीं होता। तारीफ के साथ चेतावनी—हमेशा साथ चलती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम हालिया फॉर्म, गहराई और निरंतरता के आधार पर फेवरेट के तौर पर शुरुआत करेगी, लेकिन टी20 क्रिकेट की फितरत अलग है।
“टी20 में एक खराब दिन सब कुछ बिगाड़ सकता है,” द्रविड़ ने याद दिलाया।
और फिर तारीख आई—19 नवंबर 2023।
वर्ल्ड कप 2023 का फाइनल।
10 मैचों की जीत।
और एक ऐसा दिन, जब सब उल्टा हो गया।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उस हार ने द्रविड़ को गहराई से प्रभावित किया। वही अनुभव आज उनके शब्दों में झलकता है—संयम, सावधानी और यथार्थ।
2024: जहां सूखा खत्म हुआ
टी20 वर्ल्ड कप 2024 भारत के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था।
यह 17 साल का इंतज़ार था, जो खत्म हुआ।
द्रविड़ की कोचिंग में भारत ने 29 जून 2024 को दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीता। इसके साथ ही 2011 के बाद चला आ रहा आईसीसी ट्रॉफी का सूखा भी टूट गया।
| साल | टूर्नामेंट | नतीजा |
|---|---|---|
| 2007 | टी20 वर्ल्ड कप | चैंपियन |
| 2014 | टी20 वर्ल्ड कप | रनर-अप |
| 2024 | टी20 वर्ल्ड कप | चैंपियन |
जीत के बाद द्रविड़ ने हेड कोच के तौर पर पद छोड़ा—हालांकि यह फैसला वह एक साल पहले ही ले चुके थे।
2023 फाइनल के बाद क्यों रुके द्रविड़?
वर्ल्ड कप 2023 फाइनल की हार के बाद द्रविड़ पद छोड़ना चाहते थे।
लेकिन यहीं एक दिलचस्प मोड़ आया।
रोहित शर्मा ने उनसे कहा—
“बस छह महीने और।”
द्रविड़ मान गए।
और उन्हीं छह महीनों में भारत ने वह कर दिखाया, जो पिछले 13 साल में नहीं हो पाया था।
अब जिम्मेदारी गंभीर–सूर्या की जोड़ी पर
अब तस्वीर बदल चुकी है।
कोच: गौतम गंभीर
कप्तान: सूर्यकुमार यादव
और चुनौती—इतिहास की सबसे मुश्किल।
आज तक:
- कोई टीम टी20 वर्ल्ड कप डिफेंड नहीं कर पाई है
- कोई टीम घर पर टी20 वर्ल्ड कप नहीं जीत पाई है
भारत के पास मौका है—दोनों रिकॉर्ड तोड़ने का।
घरेलू दबदबा, लेकिन खतरे की घंटी
आंकड़े भारत के पक्ष में हैं।
पिछले करीब ढाई साल में भारत ने घर पर कोई टी20 सीरीज नहीं गंवाई है।
द्रविड़ ने खुद बताया कि हाल के वर्षों में भारत का टी20 सक्सेज रेट 80 फीसदी के आसपास रहा है।
| पैमाना | आंकड़ा |
|---|---|
| घरेलू टी20 सीरीज हार | 0 (पिछले 2.5 साल) |
| हालिया टी20 सक्सेज रेट | ~80% |
लेकिन द्रविड़ यहीं रुकते नहीं।
“वे सेमीफाइनल तक पहुंचेंगे,” उन्होंने कहा,
“लेकिन टी20 उस दिन बेहतर खेलने वाली टीम को देखता है। एक अच्छी पारी, एक खराब स्पेल—सब बदल सकता है।”
रोहित शर्मा और सफेद गेंद की क्रांति
द्रविड़ ने भारत के व्हाइट-बॉल गेम में बदलाव का बड़ा क्रेडिट रोहित शर्मा को दिया।
2022 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली करारी हार के बाद रोहित ने साफ फैसला लिया—
अब बल्लेबाजी में रक्षात्मक सोच नहीं चलेगी।
पावरप्ले में आक्रामकता
ऊपर से रिस्क
और डर से आज़ादी
इस बदलाव का असर 2024 वर्ल्ड कप में दिखा—और शायद आने वाले कई सालों तक दिखेगा।
द्रविड़ का असली संदेश क्या है?
राहुल द्रविड़ भारत को फेवरेट बता रहे हैं—लेकिन ट्रॉफी की गारंटी नहीं दे रहे।
उनका संदेश साफ है:
- टीम मजबूत है
- सिस्टम तैयार है
- लेकिन टी20 क्रिकेट में घमंड की कोई जगह नहीं
यही सोच शायद भारत को बाकी टीमों से अलग बनाती है।
बड़ी तस्वीर: मौका, दबाव और इतिहास
गौतम गंभीर की आक्रामक सोच
सूर्यकुमार यादव की निडर कप्तानी
और द्रविड़–रोहित युग की विरासत
अगर सब एक लाइन में आ गया, तो भारत वह कर सकता है, जो आज तक किसी ने नहीं किया।
लेकिन जैसा द्रविड़ कहते हैं—
“ऑफिस में एक खराब दिन… सब खत्म कर सकता है।”















