BCCI – आईपीएल में हर बार जब कोई खिलाड़ी चोटिल होता है या अचानक बाहर होता है, तो एक सवाल उठता है—रिप्लेसमेंट कौन?
यहीं से एक टर्म सामने आती है, जिसे फैंस शायद ही जानते हों, लेकिन फ्रेंचाइज़ियों के लिए यह रोज़मर्रा की भाषा है—RAPP।
और अब इसी RAPP को लेकर बीसीसीआई ने ऐसा नियम बदल दिया है, जिसने टीमों की मनमानी पर साफ ब्रेक लगा दिया है।
RAPP क्या है, जिसे IPL टीमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं?
RAPP का फुल फॉर्म है—
Registered Available Players Pool।
सरल भाषा में कहें तो यह उन खिलाड़ियों की आधिकारिक लिस्ट होती है:
- जिन्होंने IPL ऑक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया
- ऑक्शन प्रोसेस से पीछे नहीं हटे
- लेकिन ऑक्शन में अनसोल्ड रहे या जिन पर बोली नहीं लगी
यही वो पूल है,
जहां से टीमें सीजन के बीच रिप्लेसमेंट खिलाड़ी चुन सकती हैं।
IPL 2026 के बाद RAPP लिस्ट: 1300+ खिलाड़ी, बड़े-बड़े नाम
क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक,
BCCI ने 1307 खिलाड़ियों की RAPP लिस्ट सभी फ्रेंचाइजियों के साथ शेयर कर दी है।
इस लिस्ट में नाम देखकर यह साफ हो जाता है कि यह सिर्फ “बैकअप खिलाड़ियों” की लिस्ट नहीं है।
RAPP में शामिल कुछ बड़े इंटरनेशनल नाम
- स्टीव स्मिथ
- डेरिल मिचेल
- रीस टॉपली
- जेमी स्मिथ
- जॉनी बेयरस्टो
खास तौर पर डेरिल मिचेल का नाम चर्चा में है।
हाल ही में भारत–न्यूजीलैंड ODI सीरीज़ में प्लेयर ऑफ द सीरीज़ रहे मिचेल का बेस प्राइस 2 करोड़ रुपये है।
यानी अगर किसी टीम को मिड-सीजन एक भरोसेमंद विदेशी बल्लेबाज़ चाहिए, तो विकल्प खुले हैं।
कैप्ड इंडियन प्लेयर्स भी लाइन में
RAPP सिर्फ विदेशी खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है।
इसमें कई जाने-पहचाने भारतीय नाम भी मौजूद हैं।
RAPP में शामिल कैप्ड भारतीय खिलाड़ी
| खिलाड़ी | बेस प्राइस |
|---|---|
| मयंक अग्रवाल | ₹75 लाख |
| केएस भरत | ₹75 लाख |
| दीपक हुड्डा | ₹75 लाख |
| नवदीप सैनी | ₹75 लाख |
| चेतन सकारिया | ₹75 लाख |
| संदीप वॉरियर | ₹75 लाख |
| उमेश यादव | ₹75 लाख |
मतलब साफ है—
टीमों के पास भारतीय बैकअप की भी कोई कमी नहीं है।
अब बड़ा ट्विस्ट: BCCI का सख्त आदेश
अब आते हैं उस फैसले पर, जिसने पूरा मामला बदल दिया।
BCCI ने फ्रेंचाइजियों को साफ निर्देश दिया है—
कोई भी टीम RAPP से किसी खिलाड़ी को
उसकी ऑक्शन रिजर्व प्राइस से कम में साइन नहीं कर सकती।
यह नियम छोटा लग सकता है,
लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है।
पहले क्या होता था?
अब तक अक्सर ऐसा देखा गया है कि:
- फ्रेंचाइज़ियां RAPP खिलाड़ियों को नेट बॉलर के तौर पर बुलाती थीं
- फिर जरूरत पड़ने पर उन्हें कम पैसों में रिप्लेसमेंट बना लिया जाता था
कई बार खिलाड़ी का बेस प्राइस कुछ और होता था,
लेकिन रिप्लेसमेंट डील उससे काफी कम में हो जाती थी।
यहीं से BCCI को आपत्ति थी।
नया नियम क्यों जरूरी था?
BCCI का यह फैसला दो बड़े मकसद पूरे करता है:
1. खिलाड़ियों की वैल्यू प्रोटेक्ट करना
अगर किसी खिलाड़ी ने 75 लाख या 2 करोड़ का बेस प्राइस रखा है,
तो उसे उससे कम में साइन करना
उसकी मार्केट वैल्यू को गिराना माना गया।
2. फ्रेंचाइजियों की जुगाड़ संस्कृति पर रोक
नेट बॉलर → सस्ता रिप्लेसमेंट
इस शॉर्टकट पर अब ब्रेक लग चुका है।















