Shastri : टी20 में 300 रन – रवि शास्त्री ने बता दी दो सबसे खतरनाक टीमें

Atul Kumar
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Shastri – टी20 क्रिकेट अब उस मोड़ पर खड़ा है, जहां 200 रन कभी पहाड़ लगते थे और आज 240 भी सुरक्षित नहीं माने जाते। बाउंड्री छोटी हो चुकी हैं, बल्ले मोटे हो गए हैं और बल्लेबाज़ों का माइंडसेट… बिल्कुल बेखौफ। ऐसे में सवाल लाज़मी है क्या अब टी20 में 300 रन भी आम नज़ारा बन सकता है?

फैंस के इसी सवाल पर जब भारत के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने अपनी राय रखी, तो उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसने बहस को और दिलचस्प बना दिया। इंग्लैंड जैसी विस्फोटक टीम को छोड़ते हुए शास्त्री ने सिर्फ दो टीमों का नाम लिया—भारत और ऑस्ट्रेलिया।

300 रन का क्लब: अब तक कौन-कौन पहुंचा है?

टी20 क्रिकेट के लंबे इतिहास में 300 रन का आंकड़ा अब भी एक दुर्लभ उपलब्धि है। अभी तक सिर्फ तीन टीमें ही इस जादुई आंकड़े को छू पाई हैं।

फुल मेंबर टीमों में यह कारनामा सिर्फ इंग्लैंड ने किया है, जबकि बाकी दो नाम जिम्बाब्वे और नेपाल के हैं।

सबसे बड़ा रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के नाम दर्ज है, जिसने टी20 इंटरनेशनल में 344 रन ठोक दिए थे—एक ऐसा स्कोर जो अभी भी किसी और के लिए दूर का सपना लगता है।

टी20 में 300+ स्कोर: अब तक का रिकॉर्ड

टीमस्कोरविपक्षसाल
जिम्बाब्वे344गाम्बिया2024
इंग्लैंड314नामीबिया2023
नेपाल314मंगोलिया2023

ये आंकड़े बताते हैं कि 300 रन असंभव नहीं हैं, लेकिन इसके लिए सही कंडीशन, सही दिन और सही खिलाड़ी चाहिए।

रवि शास्त्री का साफ जवाब: भारत और ऑस्ट्रेलिया

आईसीसी रिव्यू शो में संजना गणेशन से बातचीत करते हुए रवि शास्त्री ने बिना किसी घुमाव के अपनी पसंद बता दी।

उन्होंने कहा,
“मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया और भारत ऐसी टीमें हैं जो 300 रन का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इन दोनों टीमों के पास जिस तरह के खिलाड़ी हैं, उन्हें देखते हुए मैं इन्हें सबसे आगे मानता हूं।”

शास्त्री की बात यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने असली वजह भी बताई—टॉप ऑर्डर की मारक क्षमता।

“अगर टॉप ऑर्डर में कोई एक बल्लेबाज़ 100 रन बना लेता है, तो आप अपने आप 300 रन के करीब पहुंच जाते हैं। आज के टी20 में रन गति इतनी तेज है।”

यह बयान अपने आप में बड़ा है, क्योंकि इसमें इंग्लैंड का नाम नहीं है, जो अब तक 300+ स्कोर बनाने वाली इकलौती फुल मेंबर टीम है।

भारत क्यों है 300 रन का मजबूत दावेदार?

भारत की मौजूदा टी20 टीम देखें तो बल्लेबाज़ी गहराई डराने वाली है।

  • टॉप ऑर्डर में आक्रामक शुरुआत
  • मिडिल ऑर्डर में 360-डिग्री हिटर्स
  • और नीचे तक रन बनाने की क्षमता

अगर एक बल्लेबाज़ 100 के पार चला गया और दूसरे छोर से 40–50 की तेज़ पारियां मिल गईं, तो स्कोरबोर्ड रुकता नहीं।

ऑस्ट्रेलिया कम शब्द, ज्यादा तबाही

ऑस्ट्रेलिया की पहचान कभी भी सिर्फ टेक्निक नहीं रही।
यह टीम हमेशा पावर और इंटेंट से खेलती है।

ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों की खास बात यह है कि वे शुरू से ही मैच को तोड़ने की सोचते हैं। एक बार अगर उनका टॉप ऑर्डर चल गया, तो स्कोर 250 से 300 पहुंचने में देर नहीं लगती।

शास्त्री का भरोसा इसी बेखौफ अप्रोच पर टिका है।

टी20 वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर

दिलचस्प बात यह है कि टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर 300 रन अब भी सपना ही है।

अब तक टूर्नामेंट का सबसे बड़ा स्कोर श्रीलंका के नाम है, जिसने 2007 के पहले एडिशन में केन्या के खिलाफ 260 रन बनाए थे।

भारत का सबसे बड़ा वर्ल्ड कप स्कोर भी उसी साल आया था—इंग्लैंड के खिलाफ 218 रन।
ऑस्ट्रेलिया का बेस्ट स्कोर 201 रन रहा है।

टीमस्कोरविपक्षसाल
श्रीलंका260केन्या2007
भारत218इंग्लैंड2007
ऑस्ट्रेलिया201

यानी, वर्ल्ड कप के दबाव में अब तक कोई भी टीम 260 के आगे नहीं जा पाई है।

होम वर्ल्ड कप और दबाव: सूर्या की असली परीक्षा

रवि शास्त्री ने सिर्फ रन बनाने की बात नहीं की, बल्कि दबाव को भी बराबर महत्व दिया।

उनका मानना है कि सूर्यकुमार यादव और टीम इंडिया पर इस बार अलग तरह का दबाव होगा—क्योंकि वे अपने ही घर में टाइटल डिफेंड कर रहे होंगे।

“जब आप अपना टाइटल डिफेंड कर रहे होते हैं और घर पर खेल रहे होते हैं, तो दबाव कहीं से भी आ सकता है,” शास्त्री ने कहा।

टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी सच्चाई भी उन्होंने साफ शब्दों में रख दी—
अगर आपके 10–15 मिनट खराब चले, तो पूरा मैच हाथ से निकल सकता है।

शुरुआत ही तय करेगी भारत का सफर

शास्त्री के मुताबिक, टूर्नामेंट की शुरुआत भारत के लिए सबसे अहम होगी।

अगर भारत अच्छी शुरुआत करता है, तो आगे रास्ते में आने वाली किसी भी रुकावट से निकलने की क्षमता टीम के पास है। वजह साफ है—बैटिंग डेप्थ।

आज की भारतीय टीम सिर्फ 11 खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि 15 मैच-विनर्स की टीम लगती है।

बड़ी तस्वीर क्या वर्ल्ड कप में टूटेगा 300 का तिलिस्म

टी20 क्रिकेट का ग्राफ जिस रफ्तार से ऊपर जा रहा है, उसे देखते हुए यह सवाल अब मज़ाक नहीं रहा।
लेकिन वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में हालात अलग होते हैं।

दबाव, नॉकआउट मैच, क्वालिटी बॉलिंग—सब कुछ बैटिंग के रास्ते में खड़ा होता है।

फिर भी, रवि शास्त्री का भरोसा साफ है—
अगर कोई दो टीमें यह कर सकती हैं, तो भारत और ऑस्ट्रेलिया।

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