U19 : 100 के पीछे मत भाग – लक्ष्मण की सलाह और वैभव का तूफान

Atul Kumar
Published On:
U19

U19 – हरारे की उस शाम, स्टेडियम में सिर्फ रन नहीं बरस रहे थे—इतिहास लिखा जा रहा था। आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल, सामने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम और क्रीज पर खड़ा एक 14 साल का लड़का।

नाम—वैभव सूर्यवंशी। न चेहरे पर दबाव, न दिमाग में डर। सिर्फ बल्ला, गेंद और एक साफ सोच। नतीजा—भारत ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 विश्व कप जीत लिया।

यह जीत बड़ी थी। लेकिन उससे भी बड़ी थी वो पारी, जिसने फाइनल को एकतरफा बना दिया।

14 साल का तूफान, जिसने फाइनल उड़ा दिया

जिम्बाब्वे के हरारे में खेले गए खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने ऐसी बल्लेबाजी की, जो जूनियर क्रिकेट में कम ही देखने को मिलती है। 80 गेंदों में 175 रन—वो भी फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मैच में।

उनकी पारी में शामिल थे
15 चौके और 15 गगनचुंबी छक्के।
यह न सिर्फ अंडर-19 वर्ल्ड कप की एक पारी में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड है, बल्कि यूथ वनडे क्रिकेट में भी नया विश्व रिकॉर्ड है।

वैभव ने सिर्फ 55 गेंदों में शतक पूरा किया और अंडर-19 वर्ल्ड कप इतिहास में दूसरे सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। 218.75 की स्ट्राइक रेट—फाइनल में। यह आंकड़ा ही बता देता है कि इंग्लैंड के गेंदबाज किस दबाव में थे।

411 रन: जब स्कोरबोर्ड ही बयान बन गया

वैभव की इस विस्फोटक पारी की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 411 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया। यह अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास के सबसे बड़े स्कोरों में शामिल है।

जवाब में इंग्लैंड ने कोशिश तो की, लेकिन लक्ष्य बहुत बड़ा था। पूरी टीम 311 रन पर सिमट गई और भारत ने 100 रनों से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

100 के पीछे मत भाग—लक्ष्मण की एक लाइन, जो गेम बदल गई

मैच के बाद वैभव जितने खुश दिखे, उतने ही शांत भी। उनकी पारी के पीछे क्या सोच थी? इसका जवाब खुद वैभव ने दिया।

आईसीसी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में वैभव ने बताया कि फाइनल से एक दिन पहले उनकी बातचीत वीवीएस लक्ष्मण से हुई थी।

वैभव के शब्दों में,
“मैंने लक्ष्मण सर से कल बात की थी। लक्ष्मण सर ने मुझे बोला था कि तू 100 के पीछे मत भाग, तू अपना प्रोसेस फॉलो कर। तू अपने स्ट्रेंथ को बैक कर। खुद पे खुद 100 आएगा।”

बस यही एक लाइन।
कोई तकनीकी लेक्चर नहीं, कोई दबाव नहीं—सिर्फ भरोसा।

बिना दबाव, पूरी आज़ादी

यही वजह रही कि वैभव की बल्लेबाजी में कहीं भी जल्दबाजी या घबराहट नहीं दिखी। वह शॉट खेलते रहे, लेकिन चयन साफ था। गेंदबाज बदले, फील्ड बदली—लेकिन वैभव की सोच नहीं बदली।

खास बात यह भी रही कि पूरे टूर्नामेंट में वैभव के बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला था। लेकिन जब सबसे बड़ा मंच आया, जब फाइनल का दबाव था—तभी उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल निकाला।

यही बड़े खिलाड़ियों की पहचान होती है।

वीवीएस लक्ष्मण: पर्दे के पीछे का हीरो

इस जीत के बाद वैभव ने खुलकर श्रेय दिया बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और उसके हेड ऑफ क्रिकेट वीवीएस लक्ष्मण को।

लक्ष्मण ने वैभव को सिर्फ बल्लेबाजी नहीं, मानसिक मजबूती सिखाई। व्यक्तिगत स्कोर के बजाय अपनी क्षमता पर भरोसा करना—यही संदेश था।

भारत की छठी बादशाहत

इस जीत के साथ भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में—

  • छठा खिताब जीता
  • सबसे ज्यादा बार चैंपियन बनने वाली टीम का रिकॉर्ड मजबूत किया
  • और एक बार फिर साबित किया कि जूनियर क्रिकेट में भारत का सिस्टम सबसे मजबूत है
सालभारत की जीत
2000चैंपियन
2008चैंपियन
2012चैंपियन
2018चैंपियन
2022चैंपियन
2026चैंपियन
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