Nabi – इंदौर की सुबह में हल्की ठंड थी, लेकिन होल्कर स्टेडियम के बीचों-बीच माहौल तप चुका था। सामने 42 बार की रणजी परंपरा वाला मध्य प्रदेश, और दूसरी ओर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा जम्मू-कश्मीर।
चौथे दिन जैसे ही आख़िरी विकेट गिरा, स्कोरबोर्ड ने जो कहा, वह सिर्फ एक जीत नहीं थी—यह भारतीय घरेलू क्रिकेट के नक्शे में एक नया अध्याय था। जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंच चुका था। और इस कहानी का नायक था—आकिब नबी।
आकिब नबी 12 विकेट एक इतिहास
29 साल के तेज़ गेंदबाज़ आकिब नबी ने वह कर दिखाया, जो रणजी ट्रॉफी में सालों तक याद रखा जाएगा। पहली पारी में सात विकेट, दूसरी पारी में पांच—कुल 12 विकेट। करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, और वो भी क्वार्टर फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में।
291 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही 2021–22 की चैंपियन मध्य प्रदेश की टीम 234 रन पर ढेर हो गई। आंकड़ों में यह 56 रन की जीत है, लेकिन असल में यह आत्मविश्वास और अनुशासन की जीत थी।
चौथे दिन की सुबह और निर्णायक पल
दिन की शुरुआत मध्य प्रदेश के लिए उम्मीद के साथ हुई, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं सकी। अभी 20 रन ही जुड़े थे कि अनुभवी वेंकटेश अय्यर (17) सुनील कुमार की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों लपके गए।
यहीं से खेल धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर की पकड़ में आता गया।
आकिब नबी ने पहले रामवीर गुर्जर (11) को चलता किया, फिर उस बल्लेबाज़ को आउट किया जो मध्य प्रदेश की आख़िरी उम्मीद बन चुका था—सारांश जैन। 81 गेंदों में 64 रन की जुझारू पारी खेल रहे सारांश जैसे ही आउट हुए, स्टेडियम में साफ हो गया कि मैच हाथ से निकल चुका है।
आख़िरी विकेट आर्यन पांडे (22) का गिरा—और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का सेमीफाइनल टिकट पक्का।
आबिद मुश्ताक और सपोर्ट कास्ट का योगदान
इस जीत को सिर्फ आकिब नबी की कहानी बनाना बाकी गेंदबाज़ों के साथ नाइंसाफी होगी। वामहस्त स्पिनर आबिद मुश्ताक ने 49 रन देकर तीन अहम विकेट लिए और मध्य ओवरों में रन फ्लो को पूरी तरह रोक दिया।
यही संतुलन—तेज़ गेंदबाज़ का आक्रमण और स्पिनर की पकड़—जम्मू-कश्मीर की असली ताकत बनकर उभरा।
पहली बार सेमीफाइनल, अगली चुनौती कौन
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची जम्मू-कश्मीर की टीम अब बंगाल और आंध्र के बीच खेले जा रहे क्वार्टर फाइनल के विजेता से भिड़ेगी।
दूसरे सेमीफाइनल में उत्तराखंड और कर्नाटक आमने-सामने होंगे। यानी टूर्नामेंट अब उस मोड़ पर है, जहां हर टीम इतिहास या विरासत में से किसी एक को आगे ले जाने उतरेगी।
इंदौर से मुंबई तक: केएल राहुल का क्लास शो
उधर, एक और क्वार्टर फाइनल में बड़े नामों की भिड़ंत थी—कर्नाटक बनाम मुंबई। 42 बार की चैंपियन मुंबई को हराना आसान नहीं होता, लेकिन केएल राहुल ने इसे आसान बना दिया।
325 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए राहुल ने 182 गेंदों में 130 रन की बेहतरीन पारी खेली। 14 चौके, एक छक्का—और वही ठहराव, वही तकनीक, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।
यह राहुल का 24वां प्रथम श्रेणी शतक था। उनकी पारी की बदौलत कर्नाटक ने छह विकेट पर 325 रन बनाकर मैच जीत लिया।
रणजी का बदलता नक्शा
एक तरफ जम्मू-कश्मीर जैसी टीम का सेमीफाइनल में पहुंचना, दूसरी ओर मुंबई जैसी दिग्गज टीम का बाहर होना—यह बताता है कि रणजी ट्रॉफी अब सिर्फ इतिहास से नहीं चलती।
यह टूर्नामेंट अब—
तैयारी
फिटनेस
बेंच स्ट्रेंथ
और मानसिक मजबूती
इन चार चीज़ों का खेल बन चुका है।
आकिब नबी घरेलू क्रिकेट का नया चेहरा
आकिब नबी का यह प्रदर्शन सिर्फ एक मैच-विनिंग स्पेल नहीं है। यह एक मैसेज है—कि घरेलू क्रिकेट में प्रतिभा हर कोने से निकल रही है।
12 विकेट लेना आसान नहीं होता। और जब सामने एक पूर्व चैंपियन हो, तो यह प्रदर्शन और भी बड़ा हो जाता है।
















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