World Cup 2025 – साल 2025 भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में हमेशा अलग रंग में लिखा जाएगा। जिस ट्रॉफी का सपना दशकों से देखा जा रहा था, जिसे हर पीढ़ी की महिला क्रिकेटर अधूरा छोड़ती रही—वह सपना आखिरकार पूरा हुआ। और यह कर दिखाया पंजाब की उसी लड़की ने, जो कभी वीरेंद्र सहवाग को देखकर रो पड़ी थी। हरमनप्रीत कौर।
पहली बार आईसीसी महिला वर्ल्ड कप भारत के नाम। और उसके साथ, भारतीय महिला क्रिकेट ने खुद को नए मुकाम पर खड़ा कर दिया।
2025: जब सपना हकीकत बना
ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमों को हराकर भारत का विश्व कप जीतना सिर्फ एक टूर्नामेंट की कहानी नहीं थी। यह मानसिक बाधाओं को तोड़ने का पल था। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक आसान नहीं थी।
फाइनल के बाद देशभर में जश्न था। लेकिन हरमनप्रीत के लिए यह सिर्फ ट्रॉफी उठाने का पल नहीं था—यह एक लंबी यात्रा का नतीजा था, जो 2006–07 के एक छोटे से मुलाकात से शुरू हुई थी।
जब रोल मॉडल से मिलकर रो पड़ी थीं हरमन
आज हरमनप्रीत खुद लाखों लड़कियों की रोल मॉडल हैं। लेकिन एक समय था जब उनका आदर्श कोई और था—वीरेंद्र सहवाग।
हरमनप्रीत ने कई बार यह स्वीकार किया है कि सहवाग उनके फेवरेट क्रिकेटर रहे हैं। लेकिन पहली मुलाकात उनके लिए भावनात्मक तूफान बन गई थी।
जब उन्होंने सहवाग को पहली बार सामने देखा, वह खुद को संभाल नहीं पाईं। रो पड़ीं। और यही वह पल था, जिसने शायद उनके करियर की दिशा तय कर दी।
एनसीए में हुई वो बातचीत, जो जिंदगी बदल गई
हाल ही में एक इंटरव्यू में वीरेंद्र सहवाग ने उस मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि यह 2006–07 का समय था, जब वह नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) में रिहैब कर रहे थे। हरमनप्रीत वहां अभ्यास के लिए आई थीं।
सहवाग के मुताबिक, हरमन ने उन्हें गले लगाया और रोने लगीं। जब सहवाग ने वजह पूछी, तो हरमन ने कहा—“आप मेरे रोल मॉडल हैं।”
यहीं से सहवाग ने वो बातें कहीं, जो आज इतिहास बन चुकी हैं।
“सम्मान प्रदर्शन से मिलता है” — सहवाग का सीधा संदेश
सहवाग ने हरमनप्रीत से कहा था कि रोल मॉडल होने का मतलब रोना नहीं, सीखना होता है। उन्होंने अपना उदाहरण दिया—
उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर उनके रोल मॉडल हैं, लेकिन वह कभी रोए नहीं। उन्होंने उनसे सीखा। सवाल पूछे। बातचीत की।
सहवाग ने हरमनप्रीत को साफ शब्दों में समझाया कि क्रिकेट में पहचान सिर्फ प्रदर्शन से आती है।
उन्होंने बताया कि अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में वह सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए थे—और किसी ने उनसे कुछ नहीं पूछा।
सम्मान तब मिला, जब उन्होंने शतक, दोहरा शतक और तिहरा शतक लगाया।
वो भविष्यवाणी, जो सच हो गई
सहवाग ने उस वक्त हरमनप्रीत से एक बात और कही थी—
“जिस दिन तुम कप्तान बनोगी, और अगर तुम भारत को वर्ल्ड कप जिताओगी, तब लोग तुम्हें आदर्श मानेंगे।”
आज 2025 में वही बात सच हो चुकी है।
हरमनप्रीत न सिर्फ कप्तान बनीं, बल्कि उन्होंने भारत को पहला महिला वर्ल्ड कप जिताया। और आज वही लड़की—देश की बेटियों के लिए सबसे बड़ा आदर्श है।
हरमनप्रीत कौर: रोल मॉडल से लीडर तक का सफर
हरमनप्रीत की खासियत सिर्फ उनकी बल्लेबाज़ी नहीं रही। उन्होंने टीम को विश्वास देना सीखा। दबाव में शांत रहना सीखा। और सबसे अहम—खुद पर भरोसा रखना।
उनकी कप्तानी में भारत ने बड़े मैच जीते। बड़े नामों को हराया। और यह साबित किया कि महिला क्रिकेट अब “संघर्ष की कहानी” नहीं, बल्कि “उपलब्धियों की पहचान” है।
भारतीय महिला क्रिकेट का टर्निंग पॉइंट
2025 का वर्ल्ड कप सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं था। यह सिस्टम की जीत थी—
डोमेस्टिक स्ट्रक्चर
फिटनेस
मेंटल स्ट्रेंथ
और कप्तानी में स्पष्टता
एक प्रेरणा, जो आगे बढ़ती रहेगी
आज जब हरमनप्रीत किसी स्टेडियम में उतरती हैं, तो स्टैंड्स में बैठी लड़कियां उन्हें देखकर सपने बुनती हैं। शायद उन्हीं में से कोई एक, किसी दिन किसी और दिग्गज से मिलेगी—और रोने की जगह सवाल पूछेगी।
यही असली विरासत है।
















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