KL Rahul – मुंबई की लाल मिट्टी पर सोमवार की सुबह जैसे-जैसे ढलती गई, वैसे-वैसे एक और पुरानी कहानी नए अंदाज़ में लिखी जा रही थी। सामने 42 बार की चैंपियन मुंबई, पीछे कर्नाटक का ड्रेसिंग रूम—और बीच में खड़ा था एक नाम, जिसने रणजी ट्रॉफी में फिर याद दिला दिया कि क्लास कभी फॉर्म का मोहताज नहीं होता। केएल राहुल।
उनके 24वें फर्स्ट क्लास शतक ने न सिर्फ मैच की दिशा बदली, बल्कि कर्नाटक को रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल का टिकट भी थमा दिया।
राहुल का शतक, मुंबई की विदाई
325 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए कर्नाटक पर दबाव था। मुंबई जैसी टीम के खिलाफ यह स्कोर कागज़ पर आसान नहीं दिखता। लेकिन राहुल ने शुरुआत से ही साफ कर दिया कि यह चेज़ डर से नहीं, धैर्य से जीता जाएगा।
182 गेंद।
14 चौके।
1 छक्का।
130 रन।
यह पारी न आक्रामकता का शोर थी, न जल्दबाज़ी का जोखिम। यह टेस्ट क्रिकेट की भाषा में लिखा गया जवाब था।
लंच तक कर्नाटक तीन विकेट पर 265 रन बना चुका था और मैच लगभग उनकी पकड़ में आ गया था। आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को जिस अनुभव की ज़रूरत थी, वह राहुल ने अकेले दे दिया।
स्मरण के साथ बनी जीत की नींव
राहुल की इस पारी को रविचंद्रन स्मरण का भरपूर साथ मिला। चौथे विकेट के लिए दोनों ने 147 रन की साझेदारी की—बिल्कुल वही साझेदारी, जिसने मुंबई की आख़िरी उम्मीदें भी खामोश कर दीं।
22 साल के स्मरण ने परिपक्वता दिखाई। 123 गेंदों पर नाबाद 83 रन। 11 चौके।
बड़े लक्ष्य के पीछा में जहां युवा अक्सर बह जाते हैं, वहीं स्मरण ने विकेट बचाने को प्राथमिकता दी।
यह साझेदारी सिर्फ रन नहीं जोड़ रही थी, यह मैच को धीरे-धीरे मुंबई से दूर ले जा रही थी।
लंच के बाद झटका, लेकिन कहानी नहीं बदली
लंच के तुरंत बाद राहुल तुषार देशपांडे का शिकार बने। यह विकेट मुंबई के लिए उम्मीद की एक हल्की-सी किरण था। इसके बाद देशपांडे और तनुष कोटियान ने मिलकर कर्नाटक को छह विकेट पर 285 रन तक ला दिया।
मैच फिर थोड़ा सा खुला।
लेकिन पूरी तरह नहीं।
स्मरण की समझदारी और पाटिल की फिनिश
यहीं पर स्मरण ने समझदारी दिखाई। उन्होंने जोखिम नहीं लिया। दूसरी ओर विद्याधर पाटिल ने वही किया, जिसकी टीम को जरूरत थी।
30 गेंद।
नाबाद 31 रन।
4 चौके, 1 छक्का।
बिना किसी नाटकीयता के कर्नाटक ने 6 विकेट पर 325 रन बनाकर मुकाबला खत्म कर दिया। मुंबई—रणजी की सबसे सफल टीम—क्वार्टर फाइनल में ही बाहर।
शतक का वो पल
राहुल ने अपना शतक तनुष कोटियान की गेंद पर चौका लगाकर पूरा किया। कोई उछाल नहीं, कोई आक्रामक जश्न नहीं। बस बैट उठाया, एक नजर ड्रेसिंग रूम की ओर, और फिर फोकस अगली गेंद पर।
यही राहुल की पहचान रही है—काम बोलता है, शब्द नहीं।
सेमीफाइनल में उत्तराखंड से भिड़ंत
इस जीत के साथ कर्नाटक रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंच गया है। अगला मुकाबला बेंगलुरु में उत्तराखंड के खिलाफ खेला जाएगा।
दूसरी ओर, मुंबई के लिए यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं है। यह संकेत है कि रणजी ट्रॉफी में अब नाम नहीं, प्रदर्शन चलता है।
केएल राहुल टेस्ट क्रिकेट का भरोसेमंद नाम
राहुल के लिए यह शतक सिर्फ घरेलू रिकॉर्ड में जुड़ा एक आंकड़ा नहीं है। टेस्ट और वनडे टीम के अहम सदस्य के तौर पर यह पारी उनके क्रिकेटिंग डीएनए की याद दिलाती है।
जब हालात मुश्किल हों,
जब लक्ष्य बड़ा हो,
और जब विपक्ष मुंबई जैसा हो—
तब केएल राहुल अब भी भरोसे का नाम हैं।
















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